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सुपौल में किशोर को डसने वाले सांप को डिब्बे में भरकर अस्पताल ले आया पिता, सही पहचान से बची जानबिहार
6 अक्तू॰ 2026, 10:46 am (2 घंटे पहले)· 0

सुपौल में किशोर को डसने वाले सांप को डिब्बे में भरकर अस्पताल ले आया पिता, सही पहचान से बची जान

बिहार के सुपौल में 13 वर्षीय मुन्ना कुमार को जहरीले सांप ने काटा, जिसके बाद पिता विजेंद्र कुमार यादव सांप को डिब्बे में बंद कर सीधे अस्पताल पहुंचे ताकि डॉक्टर सटीक इलाज कर सकें।

बिहार के सुपौल जिले से एक हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया है, जहां एक पिता की मौजूदगी और सूझबूझ ने अपने 13 साल के बेटे की जान बचा ली। त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र स्थित बभनगामा वार्ड-11 में मुन्ना कुमार नाम के एक किशोर को जहरीले सांप ने काट लिया था। इस अचानक हुए हादसे से घर में कोहराम मचने के बजाय बच्चे के पिता विजेंद्र कुमार यादव ने धैर्य बनाए रखा। उन्होंने न केवल अपने बेटे को तत्काल चिकित्सीय मदद दिलाने की व्यवस्था की, बल्कि काटने वाले जिंदा सांप को भी पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर लिया और उसे सीधे अस्पताल ले पहुंचे ताकि चिकित्सक सटीक इलाज शुरू कर सकें।

आंगन जाते समय किशोर पर सांप का हमला

यह घटना उस समय घटित हुई जब 13 वर्षीय मुन्ना कुमार अपने घर के आंगन की तरफ बढ़ रहा था। इसी दौरान रास्ते में मौजूद एक साखर प्रजाति के सांप ने अचानक उस पर हमला कर दिया और उसे डस लिया। चीख-पुकार सुनकर घर के लोग मौके पर दौड़े और उन्होंने सांप को वहां मौजूद देखा। लोगों की आहट और नजर पड़ते ही सांप तेजी से भागकर पास ही मौजूद एक बिल में जा छिपा। सांप के काटने की पुष्टि होते ही परिजन गंभीर चिंता और घबराहट में आ गए, क्योंकि जहरीले सांप का काटना सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो सकता था।

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हिम्मत जुटाकर बिल से निकाला जिंदा सांप

ऐसी आपात स्थिति में मुन्ना के पिता विजेंद्र कुमार यादव ने अपना मानसिक संतुलन नहीं खोया। उन्होंने तुरंत तय किया कि सांप की सही पहचान होना बेटे के इलाज के लिए बेहद जरूरी है। इसके बाद उन्होंने अत्यधिक जोखिम उठाते हुए बिल से उस साखर सांप को बाहर निकाला और उसे सावधानीपूर्वक एक डिब्बे में सुरक्षित तरीके से बंद कर दिया। पिता का सोचना था कि डॉक्टरों को जब यह पता होगा कि किस प्रजाति के सांप ने काटा है, तो वे बिना समय गंवाए सही एंटी-वेनम और दवाएं दे सकेंगे। इसके तुरंत बाद वे अपने बेटे और डिब्बे में बंद सांप दोनों को लेकर त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल के लिए रवाना हो गए।

अस्पताल में डिब्बा खुलते ही मची हलचल

त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचते ही जब परिजनों ने चिकित्सकों के सामने वह डिब्बा खोला और उसमें मौजूद जिंदा सांप दिखाया, तो वहां का चिकित्सा स्टाफ और डॉक्टर दंग रह गए। ड्यूटी पर मौजूद डॉ संजीव कुमार सुमन ने हालात की गंभीरता को भांपते हुए बिना एक पल गंवाए मुन्ना कुमार का प्राथमिक परीक्षण शुरू किया। डॉक्टर ने डिब्बे में बंद सांप को देखकर पुष्टि की कि वह विषैला है। इस पुष्टि के आधार पर मेडिकल टीम ने तुरंत उपचार की सही प्रक्रिया शुरू कर दी और किशोर की स्थिति पर लगातार सघन निगरानी बनाए रखी।

समय पर मिले उपचार से टला बड़ा खतरा

त्वरित चिकित्सीय सहायता और सटीक दवाओं के असर से मुन्ना कुमार की बिगड़ती हालत संभलने लगी और कुछ ही देर में उसकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। बच्चे की जान खतरे से बाहर होने के बाद पूरे परिवार ने राहत की सांस ली। अस्पताल परिसर में हर कोई पिता विजेंद्र कुमार यादव की हिम्मत और तत्परता की तारीफ कर रहा था। हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि सांप को जिंदा पकड़ने का प्रयास करना अत्यंत खतरनाक हो सकता है। किसी भी व्यक्ति को सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या किसी अन्य घरेलू नुस्खे में समय बर्बाद किए बिना मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

सवाल-जवाब

यह घटना सुपौल जिले के किस इलाके में हुई?
यह घटना बिहार के सुपौल जिले में त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत बभनगामा वार्ड-11 में घटित हुई।
सांप के काटने का शिकार कौन हुआ था?
विजेंद्र कुमार यादव का 13 वर्षीय बेटा मुन्ना कुमार सांप के डसने का शिकार हुआ था।
किशोर को किस प्रजाति के सांप ने काटा था?
किशोर को साखर प्रजाति के एक जहरीले सांप ने काटा था।
पिता जिंदा सांप को अस्पताल क्यों लेकर गए?
पिता का मानना था कि सांप की प्रजाति देखकर डॉक्टरों को सही इलाज करने और सटीक दवा देने में आसानी होगी।
बच्चे को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया?
बच्चे को तत्काल त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया।
अस्पताल में बच्चे का इलाज किस डॉक्टर की देखरेख में हुआ?
ड्यूटी पर तैनात डॉ संजीव कुमार सुमन ने सांप की पहचान विषैले जीव के रूप में की और बच्चे का उपचार शुरू किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

पापा की सूझबूझ से बच्चे की जान तो बच गई, पर सांप को पकड़कर डिब्बे में बंद करना कितना खतरनाक हो सकता था? क्या डॉक्टर बिना जिंदा सांप देखे इलाज नहीं कर पाते?

Ravikash Gupta@ravikash·59 मिनट पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है कि खतरा था, पर कई बार मेडिकल इमरजेंसी में सही एंटी-वेनम मिलने में देरी से बचने के लिए लोग ऐसा जोखिम उठा लेते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

साँप को डिब्बे में बंद करके अस्पताल ले जाना जान बचाने में बहुत काम आया, डॉक्टरों को तुरंत पता चल गया कि कौन सा एंटी-वेनम देना है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण जी, बिल्कुल सही कहा आपने। पिता की उस सूझबूझ ने डॉक्टर का काम कितना आसान कर दिया, वरना गलत एंटी-वेनम से जान भी जा सकती थी।

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