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जमुई सदर अस्पताल में दो मरीजों की जान जाने के बाद बड़ा एक्शन, डॉक्टर का अवैध निजी क्लिनिक सीलबिहार
5 अक्तू॰ 2026, 11:52 pm (24 मिनट पहले)· 0

जमुई सदर अस्पताल में दो मरीजों की जान जाने के बाद बड़ा एक्शन, डॉक्टर का अवैध निजी क्लिनिक सील

बिहार के जमुई सदर अस्पताल में ड्यूटी से गायब रहने और दो महिलाओं की जान जाने के मामले में आरोपी डॉक्टर का गैर-पंजीकृत निजी अस्पताल सील कर दिया गया है। मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया गया है।

बिहार के जमुई स्थित सदर अस्पताल में सर्जरी के बाद गंभीर हालत में पहुंचीं दो महिला मरीजों की देखभाल में बरती गई अनदेखी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में दोनों महिलाओं के ऑपरेशन किए गए थे, जिसके बाद देर रात उनकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई। तीमारदार और परिजन पूरी रात ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की तलाश करते रहे, लेकिन उस समय नाइट ड्यूटी पर रोस्टर में शामिल डॉक्टर शालिनी सिंह अपने कार्यस्थल से पूरी तरह नदारद थीं। जब परिजनों ने फोन पर संपर्क साधा और मरीजों की नाजुक स्थिति की जानकारी दी, तो उन्होंने रात में आने से साफ मना कर दिया और कहा कि वे सुबह आकर देखेंगी, तब तक अपनी जूनियर को भेज रही हैं। उचित चिकित्सीय निगरानी न मिलने की वजह से दोनों महिलाओं ने तड़पते हुए सुबह होने से पहले ही दम तोड़ दिया। इस दुखद घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और अस्पताल परिसर में जोरदार हंगामा शुरू हो गया।

विधायक व मंत्री श्रेयसी सिंह ने अस्पताल पहुंचकर प्रशासन पर उठाए सवाल

घटना की खबर मिलते ही बिहार सरकार की मंत्री और स्थानीय विधायक श्रेयसी सिंह सीधे जमुई सदर अस्पताल पहुंचीं और हालात का जायजा लिया। वहां तैनात नर्सिंग स्टाफ ने जब अपनी ओर से सफाई पेश करने का प्रयास किया, तो मंत्री ने सख्त नाराजगी जताई और कड़े शब्दों में फटकार लगाई। उन्होंने सवाल किया कि कोई भी चिकित्सक मरीजों के जीवन के साथ इस तरह का खिलवाड़ कैसे कर सकता है और इतनी गंभीर लापरवाही कैसे बरती जा सकती है।

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श्रेयसी सिंह ने जमुई सदर अस्पताल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट से सीधे जवाब मांगा कि अगर मरीजों की हालत इतनी ज्यादा नाजुक हो रही थी, तो सीनियर डॉक्टर को तत्काल सूचना देकर मौके पर क्यों नहीं बुलवाया गया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस पूरे प्रकरण और घोर लापरवाही की शिकायत राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार तथा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से की जाएगी। अस्पताल का मुआयना करने के बाद वे सीधे जिला प्रशासन के पास पहुंचीं।

मामले की छानबीन के लिए बनी एसआईटी, सख्त कार्रवाई के निर्देश

मंत्री द्वारा जमुई के जिलाधिकारी के समक्ष पूरे मामले का ब्योरा रखे जाने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया गया। जमुई के डीएम नवीन ने स्पष्ट किया कि यह सीधे तौर पर चिकित्सक की भारी लापरवाही का मामला है और इस प्रकरण में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।

अवैध रूप से चल रहे निजी अस्पताल पर छापा, मिलीं भारी खामियां

प्रशासनिक जांच आगे बढ़ने पर मामले में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। सरकारी सेवा में तैनात डॉक्टर शालिनी सिंह जमुई में ही 'मातृ सेवा सदन' नाम से एक निजी अस्पताल भी संचालित कर रही थीं। सरकारी अस्पताल में नाइट ड्यूटी होने के बावजूद वे अपने मरीजों को बेसहारा छोड़कर अपने निजी अस्पताल चली गई थीं, जिससे समय पर इलाज न मिलने पर दो महिलाओं की जान चली गई।

इस खुलासे के बाद प्रशासनिक टीम ने डॉक्टर शालिनी सिंह के निजी अस्पताल पर छापेमारी की। जांच पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि अस्पताल का कोई वैध सरकारी रजिस्ट्रेशन ही नहीं था। परिसर में केवल छह कमरे बने हुए थे, जहां बिना किसी कानूनी अनुमति के ऑपरेशन थिएटर और पैथोलॉजी लैब धड़ल्ले से चलाई जा रही थी। नियमों की धज्जियां उड़ते देख अधिकारियों ने बिना देर किए उस अनधिकृत अस्पताल को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया।

सवाल-जवाब

जमुई सदर अस्पताल में किस डॉक्टर की लापरवाही का मामला सामने आया है?
सदर अस्पताल में नाइट ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर शालिनी सिंह की लापरवाही सामने आई है, जो मरीजों की हालत बिगड़ने के बावजूद अस्पताल में मौजूद नहीं थीं।
महिलाओं की मौत के बाद परिजनों ने क्या आरोप लगाए?
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद रात में हालत बिगड़ने पर फोन करने के बावजूद डॉक्टर ने आने से मना कर दिया और सुबह देखने की बात कही, जिससे बिना इलाज महिलाओं की मौत हो गई।
अस्पताल में हंगामे के बाद मौके पर कौन पहुंचा?
घटना की सूचना मिलने पर बिहार सरकार की मंत्री और स्थानीय विधायक श्रेयसी सिंह अस्पताल पहुंचीं और ड्यूटी स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई।
मामले में प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
जमुई के डीएम नवीन के निर्देश पर मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
डॉक्टर शालिनी सिंह के निजी अस्पताल पर क्या कार्रवाई हुई?
जांच में उनके निजी अस्पताल 'मातृ सेवा सदन' का रजिस्ट्रेशन न होने और बिना अनुमति ऑपरेशन थिएटर व लैब चलने की पुष्टि के बाद उसे सील कर दिया गया।
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