देश की सर्वोच्च अदालत के सख्त आदेशों को नजरअंदाज कर गौतम बुद्ध नगर के एक पुलिस अधिकारी द्वारा छात्र को पांच लाख रुपये का मुचलका भरने का नोटिस दिए जाने पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे अदालत के आदेशों की अवहेलना करार दिया है। इस घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन से लेकर पुलिस महकमे तक हड़कंप मच गया है।
छात्र अक्षत त्रिपाठी और सीजेपी प्रोटेस्ट का पूरा मामला
झांसी के रहने वाले अक्षत त्रिपाठी ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कुछ समय पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन में भाग लिया था। अक्षत पर आरोप लगाया गया कि उसने शांतिपूर्ण तरीके से छात्रों को लामबंद किया था और इस दौरान किसी भी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ की कोई घटना सामने नहीं आई थी। इसके बावजूद, सुप्रीम कोर्ट द्वारा संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पूरे मामले में सुरक्षात्मक राहत दिए जाने के ठीक तीन दिन बाद यानी 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट व एसीपी डॉ. रवि शंकर मिश्रा ने अक्षत को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126/135 के तहत नोटिस जारी कर दिया। इस नोटिस में दावा किया गया कि छात्र सरकार के खिलाफ भ्रामक बातें फैला रहा है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उससे पांच लाख रुपये का निजी मुचलका तथा दो स्थानीय जमानतें मांगी गईं।
सुप्रीम कोर्ट में वकीलों का पक्ष और अदालत का रुख
जब इस मनमाने कदम को वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा मुख्य न्यायाधीश की अदालत के समक्ष उठाया गया, तो न्यायूर्ति ने इस पर गहरी हैरानी जताई। वकीलों ने मीडिया को जानकारी दी कि अदालत ने इसे बहुत गंभीरता से लिया है। जब देश की सबसे बड़ी अदालत पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी थी कि छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो ऐसे में किसी स्थानीय अधिकारी द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर इस तरह का नोटिस जारी करना गंभीर कानूनी सवाल खड़े करता है।
एसीपी डॉ. रवि शंकर मिश्रा का प्रशासनिक ब्योरा
जिस पुलिस अधिकारी की इस कार्रवाई पर देश की सर्वोच्च अदालत ने नाराजगी व्यक्त की है, उनका आधिकारिक विवरण इस प्रकार है
- नाम: डॉ. रवि शंकर मिश्रा
- बैच व कैडर: पीसीएस 2018 (नियुक्ति तिथि: 31 मई 2021)
- वर्तमान पदभार: एसीपी व कार्यपालक मजिस्ट्रेट (तृतीय), पुलिस कमिश्नरेट गौतम बुद्ध नगर
- मूल निवास स्थान: प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश
- शैक्षणिक योग्यता: पीएचडी
जिला प्रशासन और पुलिस पर पहले भी लग चुकी है फटकार
यह पहला मौका नहीं है जब गौतम बुद्ध नगर के अधिकारियों को अदालती आदेशों की अनदेखी करने पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। कुछ समय पहले ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक चौबीस साल की छात्रा पर गलत तरीके से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने के मामले में नोएडा की तत्कालीन डीएम मेधा रूपम को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस तरह का तानाशाही रवैया व्यवस्था को बेहद निराशाजनक दिशा में ले जा रहा है। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि पांच लाख रुपये का जुर्माना संबंधित जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों के वेतन से काटा जाए। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन ने इससे कोई सबक नहीं सीखा और ताजा मामले में एसीपी रवि शंकर ने फिर से मनमाना रवैया अपनाते हुए अदालत के निर्देशों को ताक पर रख दिया।





















