वर्ष 1991 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म सौदागर का सदाबहार गीत सौदागर सौदा कर, दिल ले ले दिल देकर भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है। ऊर्जा से भरपूर इस गाने की लोकप्रियता तीन दशकों के बाद भी बरकरार है। जब भी 90 के दशक के सबसे यादगार और जोशीले ट्रैक्स की बात होती है, तब इस रचना का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
तीन दिग्गज गायकों की त्रिवेणी का प्रभाव
इस गीत की सबसे बड़ी खासियत तीन बेहतरीन पार्श्व गायकों का अनूठा संगम है। कविता कृष्णमूर्ति, सुखविंदर सिंह और मनहर उधास की सशक्त आवाजों ने इस ट्रैक में एक अद्भुत ऊर्जा भर दी। तीनों गायकों की अलग अलग गायकी शैली और तालमेल ने गाने के हर बोल को जीवंत बना दिया, जिससे यह आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों को छू लेता है।
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और आनंद बक्शी की जुगलबंदी
गीत की सांगीतिक संरचना का श्रेय दिग्गज संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को जाता है। उन्होंने अपने पारंपरिक और ऊर्जावान संगीत संयोजन से इस ट्रैक को तैयार किया। वहीं, जाने माने गीतकार आनंद बक्शी द्वारा लिखे गए बोलों ने प्रेम और भावनाओं के लेन देन को बेहद सहज और प्रभावी ढंग से बयां किया है। इन दोनों दिग्गजों के काम ने इस गाने को उस दौर के सबसे लोकप्रिय गीतों की श्रेणी में ला खड़ा किया।
स्टार कास्ट की मौजूदगी ने बढ़ाया आकर्षण
फिल्म सौदागर में दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार और राज कुमार की मुख्य भूमिकाएं थीं। इसके साथ ही विवेक मुश्रान और मनीषा कोइराला ने इस फिल्म से अपना अभिनय सफर शुरू किया था। पर्दे पर कलाकारों की मौजूदगी और इस ऊर्जावान गीत के फिल्मांकन ने इसकी पहुंच को और व्यापक बना दिया। प्यार के लेन देन का यह सुरीला तराना आज भी पुराने गानों के शौकीनों की पहली पसंद बना हुआ है।



















