बॉलीवुड और टेलीविजन जगत में अपनी दमदार अभिनय छाप छोड़ने वाले मशहूर अभिनेता प्रदीप रावत का 5 अगस्त को मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। अंतिम विदाई के इस बेहद संवेदनशील मौके पर उनके बेटे विक्रमादित्य अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। अपने पिता को अंतिम विदाई देते हुए विक्रमादित्य ने पिछले कुछ दिनों में परिवार पर टूटे दुखों के पहाड़ और पिता की अचानक बिगड़ी तबीयत का पूरा घटनाक्रम साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह महज़ डेढ़ महीने के भीतर एक सामान्य दिखने वाली बीमारी ने उनके पिता की जान ले ली और परिवार इस अचानक आए संकट से पूरी तरह बिखर गया।
पेट के संक्रमण से ब्लड कैंसर तक का दुखद सफर
पिता की बीमारी की शुरुआत को याद करते हुए विक्रमादित्य ने बताया कि जब प्रदीप रावत पहली बार बीमार पड़े, तो परिवार उन्हें तुरंत चिकित्सक के पास ले गया। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने पेट में इन्फेक्शन या इसी तरह की किसी समस्या की आशंका जताई थी। डॉक्टरों ने उपचार के तौर पर कई दवाइयां दीं, लेकिन किसी भी दवा से उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद मां ने ध्यान दिया कि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। गंभीर स्थिति को देखते हुए जब उनका ब्लड टेस्ट करवाया गया, तो रिपोर्ट में वाइट ब्लड काउंट अत्यधिक बढ़ा हुआ पाया गया।
अस्पताल में जांच और दुर्लभ कैंसर का खुलासा
ब्लड टेस्ट की गंभीर रिपोर्ट आते ही परिवार उन्हें बिना कोई देर किए मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम ने स्थिति का गहन अध्ययन करने के बाद बताया कि 99 परसेंट आशंका है कि वे ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं। अगले दिन आई विस्तृत जांच रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हो गई कि प्रदीप रावत को ब्लड कैंसर है। विक्रमादित्य के अनुसार, यह खबर सुनते ही पूरा परिवार गहरे सदमे में आ गया। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यह कैंसर का एक बेहद दुर्लभ और अत्यंत एग्रेसिव स्वरूप था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि करीब दो महीने पहले करवाए गए नियमित परीक्षणों में उनकी सभी स्वास्थ्य रिपोर्ट एकदम सामान्य आई थीं। इस प्रकार, बीमारी की शुरुआत से लेकर दुखद अंत तक का पूरा घटनाक्रम महज डेढ़ महीने के छोटे से अंतराल में घटित हो गया।
आईसीयू के बाहर के वे आखिरी दर्दनाक पल
विक्रमादित्य ने अस्पताल के आईसीयू के बाहर बिताए गए अपने पिता के अंतिम क्षणों की हृदयविदारक यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि वे आईसीयू वार्ड के बाहर खड़े थे और अंदर डॉक्टरों की पूरी टीम मुस्तैद थी। जब उन्होंने कमरे का दरवाजा खोलकर अंदर देखा, तो डॉक्टर उनके पिता को सीपीआर दे रहे थे। उस दृश्य को देखते ही उन्हें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हो गया और उनकी मां फूट-फूटकर रोने लगीं। विक्रमादित्य ने बेहद भावुक होकर कहा कि भले ही वे आज उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके पिता अब इस दुनिया के दुखों से दूर एक बेहतर स्थिति में हैं।
अंतिम यात्रा में पहुंचे प्रशंसकों का आभार और सिनेमाई योगदान
पारिवारिक दुख की इस विकट घड़ी के बावजूद विक्रमादित्य ने उन सभी लोगों, शुभचिंतकों और प्रशंसकों का दिल से शुक्रिया अदा किया जो प्रदीप रावत को अंतिम श्रद्धांजलि देने ओशिवारा पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि उनके पिता यह देखकर बेहद प्रसन्न होते कि इतने सारे लोग उन्हें प्यार देने आए हैं। प्रदीप रावत ने अपने करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाई थीं। वे 'गजनी', 'लगान' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों और बीआर चोपड़ा के मशहूर धारावाहिक 'महाभारत' में अपने शानदार अभिनय के लिए हमेशा याद किए जाएंगे।



















