साल 2004 में रिलीज हुई बॉलीवुड की मशहूर एक्शन थ्रिलर फिल्म 'टार्जन: द वंडर कार' को आज 22 साल पूरे हो चुके हैं। इस खास अवसर पर हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता अजय देवगन ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी इस लोकप्रिय फिल्म से जुड़ी पुरानी यादों को ताजा किया है। मशहूर निर्देशक जोड़ी अब्बास-मस्तान के निर्देशन में बनी यह फिल्म अपनी अनोखी कहानी और खास तौर पर डिजाइन की गई फ्यूचरिस्टिक स्पोर्ट्स कार के लिए जानी जाती है। रिलीज के दो दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह फिल्म दर्शकों, विशेषकर बच्चों और गाड़ियों के शौकीनों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
अजय देवगन का इंस्टाग्राम पोस्ट और खास संदेश
फिल्म की 22वीं वर्षगांठ के मौके पर अजय देवगन ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट की स्टोरी पर फिल्म की एक यादगार क्लिप साझा की। इस क्लिप को शेयर करते हुए अभिनेता ने एक दिलचस्प कैप्शन लिखा, "सिर्फ गाड़ी उड़ाता नहीं, जरूरत पड़े तो गाड़ी बन भी जाता हूं।" इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि फिल्म 'टार्जन: द वंडर कार' ने रिलीज के 22 साल पूरे कर लिए हैं। साल 2004 की इस थ्रिलर फिल्म में वत्सल सेठ और आयशा टाकिया ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं, जबकि अजय देवगन ने वत्सल सेठ के पिता देवेंद्र का महत्वपूर्ण किरदार निभाया था।
जादुई कार और बदले की सस्पेंस भरी कहानी
'टार्जन: द वंडर कार' की कहानी मुख्य रूप से एक दूरदर्शी कार डिजाइनर देवेंद्र यानी अजय देवगन के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में देवेंद्र एक बेहद आधुनिक और शानदार स्पोर्ट्स कार का डिजाइन तैयार करते हैं। हालांकि, कुछ लालची और धोखेबाज़ कारोबारी उनके इस क्रांतिकारी डिजाइन को हड़पने की नीयत से देवेंद्र की निर्मम हत्या कर देते हैं और उनकी बनाई कार को पानी में फेंक देते हैं। इस घटना के कई वर्षों बाद देवेंद्र का बेटा राज यानी वत्सल सेठ कबाड़खाने से उसी पुरानी और जर्जर कार को खरीदता है। राज अपनी कड़ी मेहनत से उस कार को एक नया और आकर्षक रूप देता है और अपने पिता की याद में उसका नाम 'टार्जन' रखता है। इसके बाद कहानी में अलौकिक मोड़ आता है और मृत पिता की आत्मा उस कार में प्रवेश कर जाती है। टार्जन कार खुद-ब-खुद स्टार्ट होकर देवेंद्र के हत्यारों से एक-एक करके बदला लेने लगती है। अंत में सच सबके सामने आता है और देवेंद्र की आत्मा को शांति प्राप्त होती है।
दिलीप छाबड़िया का डिजाइन, 8 महीने की मेहनत और 2 करोड़ की लागत
इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसमें दिखाई गई बैंगनी रंग की अनोखी और जादुई कार थी। इस फ्यूचरिस्टिक कार का निर्माण भारत के मशहूर ऑटोमोबाइल डिजाइनर दिलीप छाबड़िया ने किया था। उस दौर में पर्दे पर ऐसी अत्याधुनिक कार देखना भारतीय दर्शकों के लिए बेहद नया और रोमांचक अनुभव था। इस खास कार को पूरी तरह तैयार करने में लगभग 8 महीने का लंबा वक्त लगा था। वर्ष 2004 के समय में इस स्पोर्ट्स कार को बनाने में करीब 2 करोड़ रुपए की भारी लागत आई थी। तकनीकी रूप से यह आइकॉनिक कार 1991 के टोयोटा MR2 प्लेटफॉर्म पर मॉडिफाई करके तैयार की गई थी, जिसने पर्दे पर आते ही युवाओं और बच्चों के बीच गाड़ियों का एक नया क्रेज पैदा कर दिया था।



















