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अन्नू कपूर ने सुनाया 38 साल पुराना आशिकी का किस्सा, राजेश खन्ना के आखिरी दिनों की भावुक यादें भी कीं साझाबॉलीवुड
30 जुल॰ 2026, 12:55 pm (44 दिन पहले)· 2

अन्नू कपूर ने सुनाया 38 साल पुराना आशिकी का किस्सा, राजेश खन्ना के आखिरी दिनों की भावुक यादें भी कीं साझा

अभिनेता अन्नू कपूर और निर्माता संदीप कपूर ने एक खास टॉक शो में अपने जीवन के कई अनसुने पन्नों को खोला, जिसमें 38 साल पुरानी मोहब्बत, राजेश खन्ना के साथ बिताए लम्हे और फिल्म उत्तर दा पुत्तर से जुड़े किस्से शामिल हैं।

डिजिटल मीडिया के लोकप्रिय बातचीत आधारित कार्यक्रम 'नथिंग सीरीयस' के आठवें संस्करण में भारतीय मनोरंजन जगत के वरिष्ठ अभिनेता अन्नू कपूर और निर्माता सह लेखक संदीप कपूर ने शिरकत की। कार्यक्रम के संचालक आर्यमन गौतम के साथ हुई इस चटपटी और दिलचस्प चर्चा में दोनों हस्तियों ने अपने जीवन, पुराने संस्मरणों, सिनेमाई अनुभवों और व्यक्तिगत रिश्तों से जुड़े कई न सुने गए किस्सों से पर्दा उठाया। इस खास मुलाकात के दौरान हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' से जुड़ी जानकारियों के साथ-साथ राजस्थान के झालावाड़ शहर की यादें, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के कलाकारों का योगदान और बॉलीवुड के प्रथम सुपरस्टार राजेश खन्ना के अंतिम दौर की भावुक दास्तान भी सामने आई।

मड आइलैंड की रात और 38 साल पुराना आशिकी का यादगार किस्सा

कार्यक्रम के दौरान जब बातचीत का सिलसिला दिल के मामलों, प्रेम और शायरी के जरिए किसी को रिझाने की तरफ मुड़ा, तो अन्नू कपूर ने अपने ही अनूठे अंदाज में जीवन का एक बड़ा सबक साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शायरी केवल किसी को आकर्षित करने का जरिया नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बहुत व्यापक होता है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि किसी को रिझाना भी अपने आप में एक बारीक कला है।

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इसी संदर्भ में अन्नू कपूर ने 38 साल पुरानी एक बेहद दिलचस्प घटना का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि यह बात करीब 38 वर्ष पहले की है, जब वे एक दावत के बाद देर रात वापस लौट रहे थे। मशहूर फिल्म निर्माता सुभाष घई के आवास पर आयोजित एक पार्टी से रात को निकलने के बाद उनका सामना एक बेहद खूबसूरत महिला से हुआ, जो साड़ी और माथे पर टीका लगाए हुए थीं।

रात के करीब 12:30 या 1:30 बजे के बीच, शांत और सुनसान मड आइलैंड के पास अपनी गाड़ी रोककर अन्नू कपूर ने लगभग आधे घंटे तक उस महिला को शायरी सुनाई। इस दौरान उन्होंने अपनी बहन द्वारा माता-पिता के निश्छल प्रेम पर लिखी गई कुछ पंक्तियां भी पढ़कर सुनाईं, जिनमें जेठ की चिलचिलाती धूप में मां के आंचल की ठंडी छांव की तुलना एक थके हुए मुसाफिर के पड़ाव से की गई थी। शायरी के इस जादुई प्रभाव से प्रभावित होकर उस महिला ने स्वीकार किया कि आज तक किसी ने संगीत और शायरी के माध्यम से उन्हें इस तरह प्रभावित नहीं किया था। इस बात पर साथ बैठे संदीप कपूर ने भी चुटकी लेते हुए अपनी खुशी जाहिर की।

पुराने दौर का सिनेमा बनाम आधुनिक युग की जीवनशैली

भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप और पुराने जमाने की अभिनेत्रियों के अभिनय पर बात करते हुए अन्नू कपूर ने अपने विचार बेबाकी से रखे। उन्होंने कहा कि बीते दौर की अभिनेत्रियां पर्दे पर परिपक्व और गरिमामय स्त्री के रूप में दिखाई देती थीं। उस समय जब फिल्मों में नायक और नायिका का मिलन होता था या पक्षियों के जोड़ों के जरिए प्रेम दर्शाया जाता था, तो अभिनेत्रियों की स्वाभाविक लज्जा पर्दे पर बेहद जंचती थी।

आधुनिक युग की महिलाओं और अभिनेत्रियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आज के दौर की लड़कियां अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में संकोच नहीं करतीं। उनके अनुसार, आज के समय में काम और प्रतिभा पर ध्यान केंद्रित करना अधिक महत्वपूर्ण है, न कि पारंपरिक संकोच दिखाना।

राजेश खन्ना के अंतिम दौर की रातें और 2 बजे सुलाने की कहानी

वार्तालाप के दौरान अन्नू कपूर भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने सुपरस्टार के ढलते दिनों से जुड़ा एक बेहद अनछुआ और दिल को छू लेने वाला संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि राजेश खन्ना के जीवन की अंतिम फिल्म में वे उनके साथ काम कर रहे थे।

उस समय का माहौल ऐसा था कि शूटिंग का काम खत्म होने यानी पैकअप के बाद राजेश खन्ना अक्सर फिल्म के निर्माता और निर्देशक को अपने पास बुला लेते थे। इसके बाद बातचीत का यह दौर देर रात से शुरू होकर तड़के सुबह 4:00 बजे से 5:00 बजे तक लगातार चलता रहता था। इस दौरान समय बीतने के साथ-साथ अन्नू कपूर के मन में गज़ल की वे मशहूर पंक्तियां गूंजने लगती थीं, जो चढ़ते सूरज के ढलने और जवानी के ढलते वक्त का अहसास कराती हैं।

जब लगातार देर रात तक चलने वाली इन बैठकों के कारण सुबह की शूटिंग प्रभावित होने लगी, तो स्थिति को संभालने के लिए अन्नू कपूर ने खुद पहल की। वे खुद राजेश खन्ना के पास पहुंचे और उनसे बड़े प्यार से आराम करने का आग्रह किया। अन्नू कपूर ने उनसे कहा कि वे तौलिया हटाकर आराम से ढीले कपड़े पहन लें और सो जाएं। अन्नू कपूर के इस प्रयास से सुपरस्टार सो गए, जिससे फिल्म के कर्मचारियों और स्टाफ को पहली बार रात 2:00 बजे ही सोने का अवसर मिल गया, जिससे सभी ने राहत की सांस ली।

'उत्तर दा पुत्तर' की वास्तविक पृष्ठभूमि और वास्तु शास्त्र का विज्ञान

चर्चा के अंतिम पड़ाव में हालिया रिलीज़ फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' के निर्माण और उसकी पटकथा पर गहराई से बात हुई। फिल्म के निर्माता संदीप कपूर ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि इस फिल्म की 80 प्रतिशत कहानी उनकी अपनी निजी जिंदगी की घटनाओं पर आधारित है। यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति के आसपास घूमती है जो वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार 90 डिग्री उत्तरमुखी मकान बनाने के जुनून से घिरा हुआ है।

वास्तु शास्त्र और उत्तर दिशा के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए अन्नू कपूर ने समझाया कि दुनिया भर के सभी दिशा सूचक यानी कंपास हमेशा उत्तर दिशा की ओर ही इशारा करते हैं। उत्तरी ध्रुव से निकलने वाली तरंगे और विकिरण मनुष्य के मस्तिष्क को सचेत और जागरूक बनाए रखने में मदद करते हैं। इसी वैज्ञानिक कारण से भारतीय परंपराओं में उत्तर दिशा की ओर सिर करके न सोने की सलाह दी जाती है।

फिल्म की स्टारकास्ट और थिएटर के कलाकारों के जुड़ाव पर संदीप कपूर ने बताया कि इस फिल्म में अन्नू कपूर के साथ बहुमुखी अभिनेता विजय राज मुख्य भूमिका में हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से जुड़े कलाकार उनकी फिल्मों में इसलिए शामिल होते हैं क्योंकि वे थिएटर के अपने अनुभव की वजह से किसी भी किरदार की संवेदनशीलता और गहराई को बहुत अच्छी तरह समझते हैं।

सवाल-जवाब

अन्नू कपूर ने मड आइलैंड की रात कौन सा किस्सा सुनाया?
अन्नू कपूर ने बताया कि 38 साल पहले सुभाष घई के घर पार्टी के बाद उन्होंने रात 12:30 से 1:30 बजे के आसपास मड आइलैंड में एक महिला को आधे घंटे तक शायरी सुनाई थी।
राजेश खन्ना के साथ अंतिम फिल्म के दौरान क्या स्थिति बनती थी?
राजेश खन्ना पैकअप के बाद निर्माता-निर्देशक के साथ सुबह 4:00 से 5:00 बजे तक बातचीत करते थे, जिसे नियंत्रित करने के लिए अन्नू कपूर ने उन्हें रात 2:00 बजे सुलाया।
फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' की कहानी किस पर आधारित है?
निर्माता संदीप कपूर के अनुसार, इस फिल्म की 80 प्रतिशत कहानी उनके अपने वास्तविक जीवन और 90 डिग्री उत्तरमुखी घर बनाने के जुनून पर आधारित है।
उत्तर दिशा में सिर रखकर न सोने का क्या वैज्ञानिक कारण बताया गया?
अन्नू कपूर के अनुसार, कंपास हमेशा उत्तर दर्शाता है और नॉर्थ पोल की तरंगे दिमाग को अलर्ट रखती हैं, इसलिए उत्तर दिशा में सिर रखकर नहीं सोना चाहिए।
फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' में मुख्य अभिनय भूमिकाएं किसने निभाई हैं?
इस फिल्म में वरिष्ठ अभिनेता अन्नू कपूर और विजय राज मुख्य भूमिकाओं में हैं।
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