1982 की क्राइम थ्रिलर विधाता की कहानी भले ही आज बहुत लोगों को याद न हो, लेकिन इसका एक गाना उड़ी बाबा साढ़े चार दशक बाद भी सुनने वालों के जेहन में ताजा है। इस गाने की पहचान सिर्फ इसकी धुन से नहीं बनी, बल्कि आशा भोसले की जोशीली आवाज, महज 17 साल की उम्र में पद्मिनी कोल्हापुरे के आत्मविश्वास से भरे डांस और उस दौर के दो दिग्गज संगीतकारों की साख ने मिलकर इसे खास बना दिया। यह गाना दिखाता है कि 80 के दशक में सिनेमा के गानों की ताकत महज कहानी तक सीमित नहीं होती थी, बल्कि वे पर्दे से निकलकर अपना स्वतंत्र सफर तय कर लेते थे।
आवाज, बोल और धुन का मेल
उड़ी बाबा को अपनी आवाज दी थी आशा भोसले ने, जिनकी अदायगी ने गाने में शरारत भरा मिजाज घोल दिया। इसके बोल आनंद बख्शी की कलम से निकले थे, जबकि इसकी धुन कल्याणजी-आनंदजी की जोड़ी ने रची थी। आवाज, बोल और संगीत के इस मेल ने 1982 में इस गाने को सड़कों, रेडियो और फिल्मी हलकों तक पहुंचा दिया, उस दौर में जब हिंदी फिल्मी गाने सिनेमाघरों की चारदीवारी लांघकर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाते थे। ऐसे कई गाने उस दौर में फिल्म की पहचान से भी बड़े हो जाते थे, और उड़ी बाबा भी उन्हीं में शुमार हुआ।
छह मिनट का गाना, पर्दे पर सिमटा सिर्फ पांच मिनट में
ऑफिशियल म्यूजिक स्ट्रीमिंग रिकॉर्ड बताते हैं कि उड़ी बाबा का असली वर्जन करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक चलता है। लेकिन जब इसे विधाता में शामिल किया गया, तो मेकर्स ने इसे छोटा कर दिया और पर्दे पर दर्शकों ने इसका जो वर्जन देखा, वह महज करीब 5 मिनट का था। उस दौर में गानों को फिल्म की रफ्तार के हिसाब से इस तरह छोटा करना आम बात हुआ करती थी, भले ही मेकर्स को अंदाजा हो कि गाना फिल्म से अलग भी उतना ही मशहूर होने वाला है।
17 बरस की पद्मिनी कोल्हापुरे के ठुमकों का जलवा
उड़ी बाबा सिर्फ अपने संगीत के लिए नहीं, बल्कि पद्मिनी कोल्हापुरे के डांस के लिए भी उतनी ही, बल्कि कहीं ज्यादा चर्चा में रहा। फिल्म की शूटिंग के वक्त पद्मिनी की उम्र सिर्फ 17 साल थी, फिर भी उनके एक्सप्रेशन और डांस स्टेप्स ने सेट पर मौजूद हर शख्स पर गहरा असर छोड़ा था। इतनी कम उम्र में इस तरह की स्क्रीन प्रेजेंस ही वजह है कि आज भी यह गाना धुन से ज्यादा उनके डांस के लिए याद किया जाता है।
क्राइम थ्रिलर में रंगीन तड़का, दिग्गजों की स्टारकास्ट
विधाता की पहचान एक क्राइम थ्रिलर के रूप में थी, ऐसी शैली जो आमतौर पर हल्के-फुल्के डांस नंबरों के लिए नहीं जानी जाती। उड़ी बाबा इसी वजह से अलग खड़ा नजर आता है, क्योंकि इसने कहानी के गंभीर ताने-बाने के बीच एक रंगीन और उत्सवी माहौल घोल दिया। पद्मिनी कोल्हापुरे के जबरदस्त डांस के चलते ही आज भी इस गाने को खासतौर पर याद किया जाता है और अपने दौर में यह शादियों और पार्टियों में खूब बजा, महज अपने जोश की बदौलत, इसका फिल्म की कहानी से कोई सीधा नाता नहीं था। पद्मिनी कोल्हापुरे के अलावा इस फिल्म में संजीव कुमार, शम्मी कपूर, दिलीप कुमार और संजय दत्त जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी अहम किरदार निभाए थे, जिससे फिल्म की स्टारकास्ट बेहद दमदार बन गई, भले ही इसका एक गाना आगे चलकर अपनी अलग ही पहचान बना बैठा।



















