स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजस्थान के वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में सिनेमा प्रेमियों का उत्साह चरम पर देखने को मिला। देशभक्ति के पावन अवसर पर बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता सनी देओल की क्लासिक फिल्म 'बटवारा' के री-रिलीज़ होने से शहर के थिएटर्स में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे भीलवाड़ा में सिनेमा हॉल दर्शकों से पूरी तरह भरे नजर आए और हर तरफ देशभक्ति के नारों के साथ-साथ अभिनेता के नाम की गूंज सुनाई दी। स्वतंत्रता दिवस के जश्न को और खास बनाते हुए शहर के युवाओं ने हाथों में तिरंगा झंडा थामकर 'भारत माता की जय' के गगनभेदी नारे लगाए और सड़कों पर जुलूस निकाला, जिससे पूरा माहौल देशप्रेम के रंगों में रंग गया।
नारायण भदाला की अनूठी दीवानगी और पुरानी परंपरा
भीलवाड़ा में सनी देओल के प्रशंसकों के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में बना हुआ है, और वह नाम है नारायण भदाला। नारायण भदाला अभिनेता सनी देओल के अत्यंत समर्पित और अनोखे प्रशंसक माने जाते हैं। सिनेमा हॉल में उनकी एंट्री हमेशा पूरे शहर के लिए कौतुहल का विषय बनती रही है। इससे पहले भी वे सनी देओल की फिल्में देखने के लिए ऐसे विचित्र अंदाज में पहुंचे हैं कि पूरा शहर और मीडिया हैरान रह गया था। किसी फिल्म के शो के लिए वे सीधे ट्रैक्टर चलाकर टॉकीज पहुंच गए थे, तो किसी अन्य फिल्म के दौरान अपने कंधों पर लकड़ी का हल लेकर सिनेमा हॉल के गेट तक आ पहुंचे थे। इस बार भी 15 अगस्त के पावन अवसर पर उन्होंने अपनी इस अनोखी परंपरा को कायम रखा। वे अपने दर्जनों साथियों और प्रशंसकों के साथ पूरी ऊर्जा, असीम उत्साह और हाथों में लहराता हुआ तिरंगा झंडा लेकर 'बटवारा' फिल्म का प्रदर्शन देखने पहुंचे।
'बॉर्डर' फिल्म से शुरू हुआ प्रशंसकों का यह अटूट सफर
सनी देओल के प्रति अपनी इस अगाध दीवानगी और लगाव का कारण बताते हुए नारायण भदाला ने अपनी पुरानी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह दीवानगी हाल-फिलहाल की नहीं है, बल्कि दशकों पुरानी है। जब उन्होंने पहली बार सिनेमाघरों में सनी देओल की ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर फिल्म 'बॉर्डर' देखी थी, तभी से वे उनके पक्के और निष्ठावान प्रशंसक बन गए। उस फिल्म में दिखाए गए देशभक्ति के जज्बे, भारतीय सेना के शौर्य और भारत माता के प्रति समर्पण ने उनके दिल को गहराई से छू लिया था। भदाला के अनुसार, सनी देओल की फिल्मों ने केवल मनोरंजन नहीं किया, बल्कि उन्हें और उनके जैसे लाखों युवाओं को पारिवारिक संस्कार, भारतीय संस्कृति, बड़ों का सम्मान और देशप्रेम का सच्चा पाठ पढ़ाया है। यही वजह है कि वे अभिनेता की हर फिल्म को एक उत्सव की तरह मनाते हैं।
सिनेमा से सकारात्मक ऊर्जा और 'माँ व मानवता' का अमूल्य संदेश
सिनेमा के प्रभाव और समाज पर पड़ने वाले उसके असर पर बात करते हुए नारायण भदाला ने एक बेहद विचारणीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनका मानना है कि हर कहानी और फिल्म की पटकथा में मुख्य रूप से दो तरह के किरदार होते हैं, एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक। यदि दर्शक पर्दे पर दिखाए जाने वाले केवल सकारात्मक पक्ष और अच्छे चरित्रों को अपने व्यक्तिगत जीवन में उतार लें, तो उनकी पूरी जीवनशैली सकारात्मक रूप से बदल सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म 'बटवारा' का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय संदेश 'माँ और मानवता' की रक्षा करना है। समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग मामूली विवादों और छोटी-छोटी बातों पर एक-दूसरे की माताओं के प्रति अभद्र भाषा और गालियों का इस्तेमाल करते हैं।
समाज के लिए सोच बदलने की जरूरत और कलाकार को सच्ची श्रद्धांजलि
नारायण भदाला ने एक गहरी सामाजिक सीख देते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपनी माँ से सच्चा और पवित्र प्रेम करता है, वह कभी भी किसी दूसरे की माँ का अनादर या अपमान करने की सोच भी नहीं सकता, क्योंकि दुनिया की हर माँ एक समान होती है और पूजनीय होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज समाज को अपनी इस दूषित और अभद्र मानसिकता को हर हाल में बदलना होगा, क्योंकि माँ का सम्मान और सुरक्षा समाज में सबसे ऊपर और सर्वोपरि होनी चाहिए। बातचीत के समापन पर उन्होंने कहा कि उन्होंने सनी देओल के निभाए किरदारों और उनके वास्तविक व्यक्तित्व से जीवन जीने के कई उच्च आदर्श सीखे हैं। उनके अनुसार, एक सच्चा फैन वही है जो अपने पसंदीदा कलाकार की पर्दे पर मिलने वाली अच्छी सीख को अपने दैनिक जीवन में अपनाए और समाज में अच्छाई फैलाए। यही किसी भी महान कला और कलाकार के प्रति एक प्रशंसक की सच्ची श्रद्धांजलि और सामाजिक उत्तरदायित्व है।



















