भारतीय सिनेमा के इतिहास में रेखा उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने कई दशकों तक अपने अभिनय और आकर्षण से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है। एक बाल कलाकार के रूप में फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाली रेखा ने लंबे करियर में अलग-अलग दौर देखे और हर दौर में अपनी खास पहचान बनाई। 80 और 90 के दशक में शीर्ष नायिका के तौर पर अपनी चमक बिखेरने के बाद भी उनका जादू थमा नहीं। जब फिल्म उद्योग 2000 के नए दौर में प्रवेश कर रहा था, तब भी उन्होंने लीक से हटकर नए किरदार चुने और अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई।
शुरुआती सफर और क्लासिक दौर की बड़ी सफलताएं
रेखा के करियर की शुरुआत साल 1969 में हुई थी। हिंदी सिनेमा में उनकी पहली फिल्म 'अंforeground सफर' थी, हालांकि सेंसरशिप से जुड़े मुद्दों के कारण वह करीब 10 साल तक अटकी रही। इस तरह दर्शकों के सामने उनकी पहली रिलीज फिल्म 'सावन भादो' बनी। अपनी इस पहली ही रिलीज से वह रातों-रात चर्चा में आ गईं और सिनेमा प्रेमियों के बीच एक उभरते हुए सितारे के रूप में पहचान बनाने में सफल रहीं।
इसके बाद 80 और 90 के दशक में रेखा ने अपनी अदाकारी का ऐसा परचम लहराया कि वह दौर की सबसे लोकप्रिय और सफल अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं। इस दौरान उन्होंने कई प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किए। उन्होंने 'खूबसूरत', 'सिलसिला', 'एक ही भूल', 'उमराव जान', 'विजेता' और 'खून भरी मांग' जैसी अनेक चर्चित फिल्मों में यादगार अभिनय किया। विशेष रूप से 'उमराव जान' में उनके प्रदर्शन को ऐतिहासिक सराहना मिली और उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
बुलंदी और लज्जा में सशक्त किरदारों की छाप
साल 2000 के बाद के समय में भी रेखा ने कई दिलचस्प प्रोजेक्ट्स में काम किया। निर्देशक टी रामा राव द्वारा निर्देशित ड्रामा फिल्म 'बुलंदी' में वह प्रमुख भूमिका में दिखाई दीं। इस फिल्म में अनिल कपूर दोहरी भूमिका में थे, जबकि रेखा और रवीना टंडन ने मुख्य किरदार निभाए थे। यह ड्रामा फिल्म यूट्यूब पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है।
इसके बाद राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी फिल्म 'लज्जा' में रेखा ने रामदुलारी के रूप में एक बेहद मजबूत और प्रभावशाली किरदार निभाया। 2 घंटा 22 मिनट की अवधि वाली इस फिल्म में उनके साथ अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित, मनीषा कोइराला और अजय देवगन जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। सामाजिक मुद्दों को उठाती इस मल्टीस्टारर फिल्म को दर्शक अमेजन प्राइम पर देख सकते हैं।
जुबैदा और कोई मिल गया में यादगार अभिनय
वर्ष 2001 में रिलीज हुई 'जुबैदा' भी रेखा के करियर की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। दिग्गज निर्देशक श्याम बेनेगल के निर्देशन में तैयार हुई यह रोमांटिक-म्यूजिकल फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित थी। इसमें रेखा के साथ मनोज बाजपेयी और करिश्मा कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे। आईएमडीबी पर 6.6 की रेटिंग हासिल करने वाली यह फिल्म भी अमेजन प्राइम पर स्ट्रीम की जा सकती है।
इसके अलावा निर्देशक राकेश रोशन की साइंस फिक्शन फिल्म 'कोई मिल गया' में भी रेखा एक अहम सहायक भूमिका में सामने आईं। बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफल रही इस 7.2 आईएमडीबी रेटिंग वाली फिल्म को समीक्षकों की भरपूर सराहना मिली। फिल्म में एक मां के संवेदनशील किरदार को जीवंत करने के लिए रेखा को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए नॉमिनेशन भी हासिल हुआ था। यह साइंस फिक्शन फिल्म अमेजन प्राइम पर उपलब्ध है।
महिला प्रधान सिनेमा और सुपरनानी
जिस दौर में मुख्य रूप से पुरुष सुपरस्टार्स का दबदबा देखने को मिल रहा था, उस समय में भी रेखा ने महिला प्रधान कहानियों को तरजीह दी। साल 2014 में रिलीज हुई फिल्म 'सुपरनानी' इस सोच का प्रमुख उदाहरण है। निर्देशक इंद्र कुमार के निर्देशन में बनी इस पारिवारिक फिल्म में रेखा के अलावा अनुपम खेर, रणधीर कपूर और शरमन जोशी अहम किरदारों में दिखे थे। परिवार और आत्मसम्मान के संदेश को रेखांकित करती यह फिल्म भी यूट्यूब पर देखी जा सकती है।


















