पाकिस्तान में बुनियादी बिजली की कीमतें आसमान छूने के कारण आम परिवारों के घरेलू बजट पूरी तरह चरमरा गए हैं। हालात इस हद तक पहुंच चुके हैं कि लोग अब शादी-ब्याह में घरेलू रोशनी और पंखों का सहारा सुनिश्चित करने के लिए दहेज और उपहार के रूप में सोलर पैनल देने लगे हैं। पारंपरिक तौर पर पनबिजली यानी हाइड्रोपॉवर पर निर्भर इस मुल्क में उत्पादन लागत लगातार बढ़ी है, जिसके चलते बिजली की दरें 21 से 25 रुपये प्रति यूनिट के स्तर तक जा पहुंची हैं। इस भारी भरकम खर्च ने आम नागरिकों के लिए ग्रिड वाली बिजली का नियमित इस्तेमाल करना लगभग नामुमकिन बना दिया है, जिसके विकल्प के रूप में चीनी सोलर उपकरणों ने देश के ऊर्जा परिदृश्य को बदलना शुरू कर दिया है।
पनबिजली से सौर ऊर्जा की तरफ बदलता रुख
पाकिस्तान में अधिकांश बड़े हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता और निवेश चीन की तरफ से ही मिलता रहा है। हालांकि, निर्माण और संचालन के ऊंचे खर्च को देखते हुए यह साफ हो गया कि पनबिजली के मुकाबले सोलर एनर्जी कहीं अधिक किफायती विकल्प साबित हो सकती है। इसी रणनीति के तहत चीन ने पाकिस्तान को सौर ऊर्जा का दायरा बढ़ाने की सलाह दी, जिसके बाद स्थानीय बाजारों में चीनी उपकरणों की आपूर्ति बड़े पैमाने पर शुरू हुई। देश की लगभग 25 करोड़ की आबादी में से करीब 5 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे अपना जीवन गुजार रहे हैं। ऐसे परिवारों के लिए 21 से 25 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल भरना संभव नहीं रह गया था। नतीजतन, देश में तकनीक आधारित ऊर्जा की हिस्सेदारी जो एक दशक पहले केवल 3 फीसदी थी, वह अब छलांग लगाकर 20 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
शादियों में उपहार और चीन से बढ़ता आयात
महंगे बिलों से निजात पाने के लिए आवासीय इलाकों से लेकर दूरदराज के क्षेत्रों तक सोलर सिस्टम लगाने की होड़ मची है। मांग में आए इस जबरदस्त उछाल के कारण बीते साल पाकिस्तान सौर उपकरणों की खरीद के मामले में चीन का तीसरा सबसे बड़ा आयातक देश बनकर उभरा। घरेलू स्तर पर यह बदलाव इतना गहरा चुका है कि विवाह समारोहों में सोलर किट, पैनल और इनवर्टर दहेज सामग्री के रूप में दिए जा रहे हैं। रिश्तेदार और परिचित भी अब एक-दूसरे को पारंपरिक उपहारों की जगह सौर उपकरण भेंट कर रहे हैं, ताकि घरों में बिना भारी बिल के बुनियादी बिजली चालू रह सके।
छोटे इलाकों में राहत लेकिन ग्रिड संकट गहराया
दूरदराज के कस्बों और छोटे ग्रामीण इलाकों में सौर ऊर्जा ने उन घरों तक भी रोशनी पहुंचाई है, जहां पहले ग्रिड का नेटवर्क बेहद कमजोर था। इसके अलावा, औद्योगिक उपभोक्ताओं ने भी एशिया की सबसे महंगी बिजली दरों से अपने कारोबार को बचाने के लिए सौर संयंत्रों का सहारा लिया है। हालांकि, इस बदलाव ने एक नया संरचनात्मक संकट खड़ा कर दिया है। जैसे-जैसे संपन्न परिवार और उद्योग मुख्य ग्रिड से कटकर अपनी छतों पर निर्भर हो रहे हैं, वैसे-वैसे सरकारी बिजली कंपनियों की मांग और आय में भारी गिरावट आ रही है। इस राजस्व घाटे के कारण देश के सबसे बड़े कोयला आधारित बिजलीघरों को चलाने वाली चीनी कंपनियों के बकाए का भुगतान करना पाकिस्तान सरकार के लिए बेहद कठिन होता जा रहा है।
बैटरी आयात में 150 फीसदी की तेजी और वित्तीय उलझन
कस्टम आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा साल की पहली छमाही के दौरान चीन से बैटरी का आयात लगभग 150% बढ़कर तकरीबन 39.2 करोड़ डॉलर दर्ज किया गया। लाहौर स्थित कंपनी ‘इनोवो कॉर्प’ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुहम्मद मुजाहिद का कहना है कि जो भी उपभोक्ता पारंपरिक ग्रिड छोड़कर सौर ऊर्जा अपना रहा है, उससे समूचे सिस्टम पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। पाकिस्तान की सरकार बकाया चीनी कर्जों पर राहत पाने के लिए बातचीत कर रही है, परंतु चीनी अधिकारी फिलहाल किसी बड़ी रियायत के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इससे उनकी अपनी सरकारी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को सीधा नुकसान पहुंच सकता है।



















