अभिनेता अनुपम खेर की फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' को सिनेमाघरों में पहुंचे ठीक एक बरस बीत चुका है, और इस मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो शेयर करते हुए फिल्म से जुड़े अनुभव बांटे. उन्होंने कहा कि इस फिल्म की असली उपलब्धि दुनिया भर से मिली वाहवाही नहीं, बल्कि परिवारों की सोच में आया बदलाव और ऑटिज्म को देखने के नजरिए में आई नई समझ रही.
अनुपम खेर का भावुक पोस्ट
इंस्टाग्राम पर एक लंबा कैप्शन लिखते हुए अनुपम खेर ने कहा कि फिल्म को रिलीज हुए आज पूरा एक साल हो गया है और जब वो इस पूरे सफर को पीछे मुड़कर देखते हैं तो उनका मन गर्व और शुक्रगुजारी के भाव से भर जाता है. उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक फिल्म बनकर नहीं रह गया, बल्कि देश की सीमाएं लांघकर कई मुल्कों के दर्शकों के बीच अपनी अलग जगह बना चुका है. उनके मुताबिक इसे नामी अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाया गया, जहां इसे भरपूर सराहना भी मिली.
फेस्टिवल्स में सम्मान और अवॉर्ड्स की झड़ी
अनुपम खेर ने अपनी पोस्ट में फिल्म को मिली उपलब्धियों का पूरा ब्यौरा भी दिया. उन्होंने बताया कि इफ्फी के इंडियन पैनोरमा सेक्शन में इस फिल्म का चयन हुआ, FIPRESCI अवॉर्ड्स में इसे बेस्ट फीचर फिल्म चुना गया और ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसे बेस्ट स्क्रीनप्ले की ट्रॉफी मिली. इसके अलावा फिल्म की मुख्य कलाकार शुभांगी को उनके अभिनय के लिए बेस्ट एक्ट्रेस और बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस, दोनों खिताबों से नवाजा गया. फिर भी अनुपम खेर ने साफ किया कि इन तमाम सम्मानों से भी कहीं बड़ी बात उनके लिए कुछ और है.
फैंस के मैसेज ने दिल जीत लिया
अनुपम खेर के मुताबिक उनकी और उनकी टीम के लिए असली सम्मान माता-पिता, टीचरों और युवा दर्शकों की तरफ से मिले हजारों मैसेज हैं. एक दर्शक ने कमेंट किया कि इसे देखने के बाद ऑटिज्म को लेकर उसकी सोच पूरी तरह बदल गई. किसी और दर्शक ने बताया कि अब उसने अपने ऑटिज्म पीड़ित बच्चे को दुनिया से छुपाना बंद कर दिया है. वहीं कई पैरेंट्स ने यह भी माना कि इस फिल्म की वजह से वे अपने बच्चों को कहीं बेहतर तरीके से समझ पाए और उनके साथ रिश्ता पहले से मजबूत हुआ.
अनुपम खेर ने अपनी पोस्ट में लिखा, "अगर मुझसे पूछा जाए कि इस फिल्म की सबसे बड़ी सफलता क्या है, तो मेरा जवाब इन ट्रॉफियों या पुरस्कारों से कहीं आगे होगा." उन्होंने आगे कहा कि यही मैसेज उनके लिए किसी भी अवॉर्ड से बढ़कर कीमती हैं, क्योंकि ये इस बात के सबूत हैं कि सिनेमा महज मनोरंजन तक सीमित नहीं, समाज में सचमुच सकारात्मक बदलाव लाने का जरिया भी बन सकता है.



















