अयोध्या के राम मंदिर में दान के सोने-चांदी को लेकर उठे विवाद के बीच उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं के भरोसे को और मजबूत करने के लिए एक नई तकनीक अपनाने का फैसला किया है। मंदिर में अब भक्तों की तरफ से चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के जेवरों की शुद्धता कुछ ही मिनटों में आधुनिक कैरेटोमीटर मशीन से जांची जाएगी, और यह जांच दानदाता की मौजूदगी में ही पूरी होगी।
15 लाख की मशीन, 20 जुलाई से शुरुआत
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध कमेटी ने इस काम के लिए करीब 15 लाख रुपए की लागत वाली कैरेटोमीटर मशीन मंगाई है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक यह मशीन 20 जुलाई से मंदिर परिसर में काम करना शुरू कर देगी। इसका सीधा मकसद यह है कि दान में मिलने वाले आभूषणों की जांच पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हो और श्रद्धालुओं को किसी तरह की शंका न रहे।
बिना नुकसान पहुंचाए मिनटों में जांच
कैरेटोमीटर मशीन की खासियत यह है कि यह आभूषण को जरा भी नुकसान पहुंचाए बिना उसकी शुद्धता, कैरेट और उसमें मिली दूसरी धातुओं की सटीक जानकारी चंद मिनटों में दे देती है। यानी अब जो भी श्रद्धालु मंदिर में सोना या चांदी दान करेगा, उसकी जांच उसी वक्त, उसी की मौजूदगी में हो जाएगी। इससे दान की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ-साथ भक्तों का भरोसा भी बढ़ेगा।
अब तक क्या थी व्यवस्था
अभी तक मंदिर में मिलने वाले आभूषणों को पहले कोठार में सुरक्षित रखा जाता था। इसके बाद तीन सदस्यों की एक कमेटी इन आभूषणों की जांच कर यह तय करती थी कि उनमें शुद्धता कितनी है। यह पूरी प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में और डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों की देखरेख में होती थी। नई मशीन आने के बाद यही प्रक्रिया अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और सटीक हो जाएगी।
मशीन के लिए खास एसी कमरा तैयार
मशीन को ठीक से चलाने के लिए मंदिर परिसर में एक खास एसी कमरा बनाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होते ही श्रद्धालु को तुरंत यह प्रमाण मिल जाएगा कि उसका आभूषण कितने कैरेट का है और उसमें किन-किन धातुओं का मिश्रण है। इससे मंदिर के दान रिकॉर्ड में पूरी पारदर्शिता आएगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।



















