अचार और चटनी के लिए मशहूर करौंदा अब एक नए अंदाज़ में रसोई में वापसी कर रहा है। राजस्थान के कई गांव-कस्बों में आज भी करौंदे को सब्जी के रूप में पकाया जाता है और इसका खट्टा-मीठा स्वाद खाने वालों की थाली में एक अलग ही रंग भर देता है।
सेहत का पिटारा है यह छोटा सा फल
करौंदा दिखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके अंदर सेहत का पूरा खजाना छिपा है। इसमें विटामिन-सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी यह फल कारगर माना जाता है। यही वजह है कि पारंपरिक रूप से इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि सेहत के नजरिए से भी अहम माना जाता रहा है।
गर्मी और बरसात में बाजार में छा जाता है करौंदा
गर्मियों की शुरुआत से लेकर बरसात के मौसम तक बाजार में ताजे करौंदे आसानी से देखने को मिलते हैं। इस सब्जी की सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता, महज पांच मिनट में यह कढ़ाई से उतरकर थाली में परोसी जा सकती है। कम समय और कम मेहनत में तैयार होने वाली यह रेसिपी उन लोगों के लिए बेहद मुफीद है, जिनके पास रोज़ाना खाना बनाने के लिए ज्यादा वक्त नहीं होता।
भीलवाड़ा की निशा ने बताया करौंदे का किस्सा
भीलवाड़ा में रहने वाली निशा के मुताबिक करौंदा वह फल है जो अमूमन गांव-देहात या खेतों के आसपास आसानी से मिल जाता है। उन्होंने बताया, "इसका आचार-चटनी तो बनता ही है, लेकिन इसकी सब्जी का स्वाद कहीं ज्यादा लाजवाब होता है." निशा के अनुसार इसे घर पर बनाना बेहद आसान काम है और ज्यादा सामान की भी जरूरत नहीं पड़ती।
चंद मिनटों में तैयार होने वाली रेसिपी
करौंदे की यह देसी सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले करौंदों को साफ पानी से धो लिया जाता है और फिर हर दाने को बीच से चीरकर उसके बीज अलग कर दिए जाते हैं। इसके बाद कढ़ाई में तेल डालकर गर्म किया जाता है और उसमें राई, जीरा तथा एक चुटकी हींग डालकर तड़का तैयार किया जाता है। तड़का लगने के बाद इसमें हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। मसाले भुनने पर कटे हुए करौंदे कढ़ाई में डाल दिए जाते हैं और धीमी आंच पर करीब दस से पंद्रह मिनट तक पकने दिया जाता है। खट्टे स्वाद को संतुलित करने के लिए इसमें चुटकीभर गुड़ या चीनी भी मिलाई जा सकती है। पकने के बाद ऊपर से हरा धनिया डालकर इसे गरमागरम परोसा जाता है।
बाजरे की रोटी से दाल-चावल तक, हर थाली में जंचेगा यह जायका
इस सब्जी का असली मजा बाजरे की रोटी, गेहूं की फुल्की, पराठे या फिर दाल-चावल के साथ आता है। कम मसालों और कम सामग्री में बन जाने वाली यह रेसिपी उन लोगों के लिए भी अच्छा विकल्प है, जो रोज़मर्रा के खाने में कुछ नया और परंपरागत स्वाद जोड़ना चाहते हैं। वक्त के साथ राजस्थान की रसोई से जुड़ी ऐसी कई देसी रेसिपियां धीरे-धीरे गायब होती जा रही हैं, और करौंदे की यह सब्जी भी उन्हीं भूली-बिसरी रेसिपियों में शामिल है, जिसे कम से कम एक बार जरूर आजमाना चाहिए। अगर घर पर कुछ हटकर, सेहतमंद और देसी अंदाज़ का खाना बनाने का मन हो, तो करौंदे की यह झटपट सब्जी थाली का स्वाद कई गुना बढ़ा सकती है।


















