सुल्तानपुर की सरिता कुमारी ने चाय बनाते समय बर्तन से बाहर छलकने से बचाने के कुछ आसान तरीके बताए हैं, जिन्हें अपनाकर रसोई गंदी होने और दूध चाय की बर्बादी से बचा जा सकता है.
आंच मध्यम रखना सबसे जरूरी
सरिता कुमारी के मुताबिक चाय बनाते समय गैस की आंच हमेशा मध्यम रखनी चाहिए. तेज आंच पर दूध और पानी जल्दी गर्म होते हैं और उबाल आते ही झाग तेजी से ऊपर उठकर बर्तन से बाहर निकल जाता है. मध्यम आंच पर चाय धीरे धीरे पकती है, जिससे झाग को संभलने का समय मिल जाता है और वह बाहर नहीं गिरता.
बर्तन का आकार भी मायने रखता है
छोटे पतीले में चाय बनाने पर झाग को ऊपर आने में ज्यादा वक्त नहीं लगता और वह जल्दी किनारों से बाहर बहने लगता है. इसलिए हमेशा उतना बड़ा बर्तन इस्तेमाल करें, जिसमें दूध पानी भरने के बाद भी काफी खाली जगह बची रहे. इस खाली हिस्से में उबाल के दौरान झाग आसानी से फैल जाता है और चाय आराम से पक जाती है.
पहला उबाल दिखते ही आंच कम कर दें
जैसे ही पतीले में पहली बार उबाल नजर आए, गैस की आंच तुरंत धीमी कर देनी चाहिए. ऐसा न करने पर झाग लगातार ऊपर उठता रहता है और कुछ ही सेकंड में चाय बर्तन के बाहर गिरने लगती है. बहुत से लोग उबाल आने के बाद भी तेज आंच पर चाय पकाते रहते हैं, जिस वजह से यह दिक्कत बार बार होती है, जबकि थोड़ी सतर्कता से इसे टाला जा सकता है.
चाय बनाते वक्त वहीं मौजूद रहें
चाय चढ़ाकर दूसरे काम में लग जाना अक्सर इसके बहने की वजह बनता है. सरिता कुमारी सुझाव देती हैं कि चाय पकते समय कुछ मिनट गैस के पास ही खड़े रहकर उबाल पर नजर रखनी चाहिए. जैसे ही झाग ऊपर की ओर बढ़ने लगे, आंच कम करने के साथ पतीले को हल्के से ऊपर उठा लेना चाहिए. इतनी सी सावधानी चाय को बाहर गिरने से बचा सकती है.
बर्तन को हल्का तिरछा रखने का नुस्खा
कुछ बर्तनों में चाय बार बार बहने लगती है, ऐसे में उबाल आने के समय पतीले को थोड़ा तिरछा करके रख देना फायदेमंद रहता है. इससे झाग सीधा ऊपर चढ़ने के बजाय एक तरफ फैल जाता है और बर्तन के बाहर गिरने से बच जाता है. हालांकि इसे करते समय सावधानी बरतना जरूरी है, ताकि गर्म तरल छलककर हाथ या गैस चूल्हे पर न गिरे.
दूध पानी की मात्रा और झाग हटाना
चाय बनाते वक्त पतीले को ऊपर तक दूध और पानी से भर देना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे बर्तन में उबाल के लिए जगह ही नहीं बचती. हमेशा बर्तन का कुछ हिस्सा खाली छोड़ना चाहिए. साथ ही जब उबाल आने लगे तो ऊपर जमा झाग को छन्नी की मदद से बाहर निकाल देना चाहिए, क्योंकि यही झाग बढ़कर बर्तन से बाहर बहता है.
बीच बीच में चम्मच से चलाते रहें
चाय को उबलते समय चम्मच से बीच बीच में चलाना भी एक कारगर तरीका है. उबाल आने से पहले और उबाल के दौरान एक दो बार चाय चला देने से झाग का दबाव कम हो जाता है और वह अचानक ऊपर की ओर नहीं बढ़ता. इस छोटी सी आदत से चाय बहने का खतरा काफी हद तक घट जाता है.
झाग तेज उठे तो बर्तन को गैस से हटा लें
अगर झाग बहुत तेजी से ऊपर उठने लगे तो घबराने की बजाय पतीले को कुछ सेकंड के लिए गैस से नीचे उतार लें. ऐसा करते ही झाग तुरंत बैठ जाता है, इसके बाद बर्तन को दोबारा गैस पर रखकर चाय पकाई जा सकती है. यह तरीका लगभग हर घर में अपनाया जाता है और इससे चाय के स्वाद पर कोई फर्क नहीं पड़ता.


















