हिंदी सिनेमा जगत में भोजपुरी भाषा और उसकी संस्कृति का प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है। दिलीप कुमार से लेकर आमिर खान जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी फिल्मों के दौरान पर्दे पर भोजपुरी में संवाद बोले हैं। हालांकि, बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि नब्बे के दशक के सुपरस्टार गोविंदा के सिने करियर का एक ऐसा बेहद लोकप्रिय गाना भी है, जो मूल रूप से एक पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत का हिंदी रूपांतरण था। इस गाने को संगीत प्रेमियों के बीच लाने के पीछे टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की सूझबूझ और गीतकार समीर अनजान की रचनात्मकता का बड़ा हाथ था, जिन्होंने मिलकर इस सुरीले सफर की नींव रखी थी।
बिहार के किसी गांव से गुलशन कुमार लेकर आए थे धुन
इस पूरे किस्से का खुलासा खुद गीतकार समीर अनजान ने अपने एक पुराने साक्षात्कार के दौरान किया था। उन्होंने याद करते हुए बताया था कि वह एक बार टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार के निवास पर गए थे। मुलाकात के दौरान गुलशन कुमार उन्हें अपने बेडरूम के एक कोने में लेकर गए और उन्हें भोजपुरी भाषा में एक ग्रामीण लोकगीत की कुछ पंक्तियां सुनाईं। समीर ने बताया कि गुलशन कुमार की संगीत को परखने की क्षमता बेहद मजबूत थी और उनके कान काफी पक्के थे। उन्हें इस बात का पूरा भरोसा था कि वे जिस अनूठे गाने की तलाश करके लाए हैं, वह बॉक्स ऑफिस और संगीत जगत में कमाल कर सकता है। उन्होंने समीर को जो शुरुआती लाइनें सुनाई थीं, वे थीं जब से सिपहिया से भईल हवलदार कि नाथुनिए से गोली मारे। इसके बाद गुलशन कुमार ने गीतकार समीर से विशेष अनुरोध किया कि वे इस लोकगीत का एक नया हिंदी संस्करण तैयार करें जो मुख्यधारा के दर्शकों को पसंद आ सके।
आनंद-मिलिंद की जोड़ी और फिल्म दूल्हे राजा में एंट्री
गुलशन कुमार के कहने पर समीर अनजान ने उस लोकगीत की मूल पंक्ति को संगीतकार जोड़ी आनंद-मिलिंद के सामने प्रस्तुत किया। संगीतकारों को वह अनोखी लाइन तुरंत पसंद आ गई और उसके बाद एक विशेष बैठक में इस गाने का पूरा हिंदी वर्जन तैयार किया गया। जब यह गाना पूरी तरह बनकर तैयार हुआ, तो इसे वर्ष 1998 में रिलीज हुई निर्देशक हरेश शर्मा की फिल्म दूल्हे राजा में शामिल किया गया, जिसमें गोविंदा और रवीना टंडन मुख्य भूमिकाओं में थे। वह चर्चित गाना अपने दीवाने का कर दे बुरा हाल कि अंखियों से गोली मारे था। पर्दे पर रवीना टंडन और गोविंदा के एनर्जेटिक डांस मूव्स तथा शानदार एक्सप्रेशन ने इस गाने को हमेशा के लिए अमर बना दिया। इस गाने की सफलता इतनी जबरदस्त थी कि बाद में इसी नाम से एक फिल्म भी बनाई गई, हालांकि वह फिल्म मूल गीत जैसी लोकप्रियता हासिल नहीं कर सकी।
सोनू निगम से पहले अल्ताफ राजा के पास गया था यह गाना
इस प्रसिद्ध गाने के गायन को लेकर भी एक दिलचस्प किस्सा जुड़ा हुआ है। गीतकार समीर अनजान ने अपने उसी इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया था कि शुरुआती योजना के तहत इस गाने को रिकॉर्ड करने के लिए गायक अल्ताफ राजा को बुलाया गया था। उस दौर में अल्ताफ राजा का गाना तुम तो ठहरे परदेसी अभूतपूर्व रूप से मशहूर हो चुका था। अपनी इस अपार सफलता के चलते उन्होंने अपनी गायकी की फीस बढ़ा दी थी। इसी वित्तीय फेरबदल के कारण यह गाना उनके हाथ से निकल गया और अंततः प्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम के पास पहुंच गया। आज यह गाना गोविंदा के फिल्मी सफर के सबसे बड़े और सदाबहार चार्टबस्टर गानों में गिना जाता है।



















