उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्र ऋषिकेश में शाम ढलते ही गंगा तटों की रौनक पूरी तरह बदल जाती है। इन दिनों जानकी सेतु पर की गई विशेष सजावटी लाइटिंग स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले सैलानियों के बीच जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जैसे ही रात का अंधेरा घिरता है, पुल की चमकदार रोशनी गंगा की बहती जलधारा पर एक मनमोहक प्रतिबिंब तैयार करती है, जिसे देखने के लिए बड़ी तादाद में लोग किनारों पर जुट रहे हैं। कई लोग शांत वातावरण में बैठकर कलकल बहती नदी की ध्वनि का आनंद लेते हैं, जबकि युवा और परिवार अपने मोबाइल फोन से वीडियो और तस्वीरें खींचते दिखाई देते हैं।
रात के वक्त पुल का बदलता रूप और सैलानियों की आवाजाही
दिन की तुलना में रात के समय जानकी सेतु और आसपास का इलाका बिल्कुल अलग एहसास कराता है। सेतु पर स्थापित चमकीली लाइटों का अक्स जब गंगाजल पर लहराता है, तो यह दृश्य दूर से ही लोगों को अपनी ओर खींच लेता है। कामकाज से मुक्त होकर स्थानीय नागरिक यहां कुछ सुकून भरे पल बिताने आते हैं, वहीं देश भर से पहुंचे पर्यटक भी इस खास रात के नजारे को अपने कैमरों में कैद करने के लिए रुकते हैं। ठंडी हवा और घाटों का शांत माहौल लोगों को घंटों एक ही जगह बांधे रखता है, लेकिन इसी आकर्षण के बीच कई लोग जाने-अनजाने में खतरनाक स्थानों की तरफ बढ़ जाते हैं।
नदी तट का अंधेरा और फिसलन भरे पत्थरों से जुड़ा जोखिम
गंगा की खूबसूरती का दीदार करने की चाहत में अक्सर सैलानी सुरक्षित किनारों को छोड़कर जलधारा के अत्यधिक निकट पहुंच जाते हैं। रात के पहर में घाटों और किनारों के कई हिस्सों में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था नहीं होती, जिससे पानी और सूखी जमीन के बीच का अंतर साफ नजर नहीं आता। नदी से सटे पत्थरों और मिट्टी में लगातार नमी रहने के कारण वहां तेज फिसलन पैदा हो जाती है। जरा सी चूक या पैर का संतुलन बिगड़ने पर कोई भी व्यक्ति सीधे तेज बहाव वाली धारा में समा सकता है, जिससे जान पर सीधा खतरा बन जाता है।
तस्वीरों और वीडियो के चक्कर में ध्यान भटकने की समस्या
गंगा तट पर होने वाली लापरवाहियों में सबसे बड़ी वजह सोशल मीडिया के लिए बेहतरीन तस्वीरें और रील बनाने की होड़ है। मोबाइल की स्क्रीन पर सही एंगल तलाशने के चक्कर में लोग अपने कदमों और आसपास की सतह से नजरें हटा लेते हैं। बेहतर रोशनी या बैकग्राउंड पाने के लिए कुछ लोग पानी के बिल्कुल छोर पर बने पत्थरों पर जा बैठते हैं, तो कुछ लोग खतरनाक ढलानों पर कदम रख देते हैं। गंगा का प्रवाह स्वभाविक रूप से काफी तेज रहता है, ऐसे में अचानक गिरने पर संभलने या बाहर निकलने का मौका बेहद कम मिलता है।
स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने साझा किए सुरक्षा से जुड़े अनुभव
ऋषिकेश के स्थानीय निवासी अंकित का कहना है कि जानकी सेतु की छटा का दीदार करना हर किसी के लिए बेहतरीन अनुभव है, लेकिन लोगों को अपनी सुरक्षा की प्राथमिकता कभी नहीं भूलनी चाहिए। उनका मानना है कि नदी किनारे समय बिताते वक्त तट से उचित दूरी बनाए रखना और अंधेरे वाले रास्तों पर बिना सोचे-समझे आगे न बढ़ना बेहद आवश्यक है। वहीं घूमने पहुंचे पर्यटक सुरेश ने बताया कि रात में पुल की रोशनी पानी पर तैरती दिखती है और यहां का माहौल बहुत सुखद है, लेकिन नदी के बेहद पास जाने से भय भी लगता है। सुरेश ने सलाह दी कि सभी को खूबसूरती देखने जरूर आना चाहिए, परंतु किसी तस्वीर या वीडियो के लिए अपनी जिंदगी को दांव पर लगाना कतई समझदारी नहीं है।


















