भारतीय सिनेमा के लंबे इतिहास में रिलीज की कुछ तारीखें निर्माताओं और निर्देशकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुई हैं। कैलेंडर की ऐसी ही एक चर्चित तारीख 7 अगस्त है, जिसे बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड के लिहाज से काफी अनलकी माना जाता है। इस खास दिन पर रिलीज हुई कई बड़ी और बहुचर्चित फिल्मों ने दर्शकों को बेहद निराश किया। दिग्गज अभिनेता और निर्देशक देव आनंद से लेकर एक्शन स्टार अक्षय कुमार तथा रितेश देशमुख जैसे स्थापित कलाकारों की फिल्में इस तारीख को सिनेमाघरों में दर्शकों को खींचने में नाकाम रहीं। चाहे भारी भरकम बजट की एक्शन फिल्में हों या अनोखे प्रयोग करने वाली सस्पेंस और कॉमेडी फिल्में, 7 अगस्त को रिलीज होने वाली अधिकतर रचनाओं को बॉक्स ऑफिस पर असफलता का ही सामना करना पड़ा है।
1998 में दो बड़े स्टार्स की फिल्में रही असफलता का शिकार
साल 1998 में 7 अगस्त का दिन हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ था। इसी तारीख को फिल्म उद्योग के सबसे बड़े दिग्गजों में शामिल देव आनंद का एक बड़ा प्रोजेक्ट 'मैं सोलह बरस की' सिनेमाघरों में उतरा था। इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म का निर्देशन खुद देव आनंद ने किया था और इसके जरिए उन्होंने स्कॉटलैंड की बेहद खूबसूरत लोकेशन पर नए कलाकारों शाइस्ता उस्ता और जस अरोड़ा को लॉन्च किया था। देव आनंद के विशाल स्टारडम और फिल्म के जबरदस्त प्रचार के बावजूद, कमजोर पटकथा की वजह से दर्शकों ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई।
इसी दिन यानी 7 अगस्त 1998 को ही अक्षय कुमार की बड़े बजट वाली एक्शन फिल्म 'बारूद' भी रिलीज हुई थी। प्रमोद चक्रवर्ती के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रवीना टंडन और अमरीश पुरी जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। नब्बे के दशक में अक्षय कुमार का एक्शन अवतार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय था और उनकी फिल्मों को देखने के लिए भीड़ उमड़ती थी। हालांकि, 'बारूद' का स्क्रीनप्ले इतना घिसा-पिटा और कमजोर था कि थिएटर्स पहुंचे दर्शक निराश होकर वापस लौटे। देव आनंद की फिल्म के साथ टकराने के बावजूद यह एक्शन ड्रामा भी अपनी लागत निकालने में नाकाम रहा और फ्लॉप साबित हुआ।
2009 में सस्पेंस ड्रामा और सोशल कॉज की फिल्में हुईं पस्त
अलग तरह के सिनेमा के लिए मशहूर निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने 7 अगस्त 2009 को जंगल सफारी और डर के ताने-बाने पर बनी सस्पेंस-हॉरर फिल्म 'अज्ञात' को सिनेमाघरों में उतारा था। दक्षिण भारतीय अभिनेता नितिन और प्रियंका कोठारी स्टारर इस फिल्म से दर्शकों को बहुत उम्मीदें थीं। रिलीज से पहले फिल्म के टीजर और साउंड इफेक्ट्स की काफी सराहना की गई थी। हालांकि, जब यह फिल्म बड़े पर्दे पर आई तो दर्शकों को न तो कोई डरावना अहसास मिला और न ही कोई मजबूत कहानी देखने को मिली। नतीजतन, राम गोपाल वर्मा का यह अनोखा प्रयोग बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह विफल हो गया।
इसी तारीख यानी 7 अगस्त 2009 को छोटे बजट और संवेदनशील विषय पर बनी एक और फिल्म रिलीज हुई थी। निर्देशक सतीश कौशिक की फिल्म 'तेरे संग' टीनएज प्रेग्नेंसी जैसे गंभीर और सामाजिक मुद्दे पर आधारित थी। इस प्रयोग के बावजूद फिल्म दर्शकों को आकर्षित नहीं कर सकी। इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि 7 अगस्त की तारीख का असर सिर्फ बड़े बजट या बड़े स्टार्स वाली व्यावसायिक फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे बजट के सामाजिक नाटकों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
2015 में कॉमेडी और पीरियड ड्रामा दोनों को दर्शकों ने नकारा
साल 2015 में 7 अगस्त की तारीख को एक बार फिर दो अलग-अलग जॉनर की फिल्में सिनेमाघरों में पहुंचीं, लेकिन दोनों का हश्र एक जैसा ही रहा। करण अंशुमान के निर्देशन और एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी 'बैंगिस्तान' 7 अगस्त 2015 को प्रदर्शित की गई थी। रितेश देशमुख और पुलकित सम्राट के अभिनय से सजी यह फिल्म आतंकवाद और धर्म के नाम पर फैलते पाखंड पर प्रहार करने वाली एक डार्क सटायरिकल कॉमेडी थी। फिल्म का प्रोमो काफी मजेदार था, लेकिन इसका हास्य सिनेमाघरों में दर्शकों से जुड़ाव नहीं बना पाया। बड़े बैनर और मजबूत स्टार कास्ट के बावजूद यह फिल्म अपने पहले वीकेंड में ही पस्त हो गई और बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर घोषित हुई।
उसी दिन यानी 7 अगस्त 2015 को ही प्रसिद्ध फिल्म 'उमराव जान' के निर्देशक मुजफ्फर अली की पीरियड ड्रामा फिल्म 'जानिसार' भी रिलीज हुई थी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को भी दर्शकों ने पूरी तरह नकार दिया, जिससे यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होकर 7 अगस्त के अनलकी रिकॉर्ड का हिस्सा बन गई।
बॉलीवुड के लिए इस तारीख का क्या है ऐतिहासिक पैटर्न
अगर इन सभी सालों के आंकड़ों और रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया जाए तो यह साफ दिखाई देता है कि 1998 से लेकर 2015 तक 7 अगस्त को रिलीज हुई फिल्मों में पटकथा की कमजोरी सबसे बड़ा कारण रही। चाहे रोमांटिक फिल्में हों, एक्शन थ्रिलर, हॉरर, कॉमेडी या ऐतिहासिक ड्रामा, इस खास तारीख पर आने वाली ज्यादातर फिल्मों को दर्शकों का प्यार नहीं मिल सका। यही वजह है कि बॉलीवुड के गलियारों में 7 अगस्त को फिल्मों की रिलीज के लिए एक चुनौतीपूर्ण और अनलकी दिन के रूप में देखा जाता है।



















