बॉलीवुड का सबसे लोकप्रिय रोमांटिक नग्मा कभी कभी मेरे दिल में भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक बेहद दिलचस्प अध्याय है। साल 1976 में रिलीज हुई फिल्म कभी कभी से हर दिल अजीज बने इस गाने की धुन असल में फिल्म के पर्दे पर आने से 26 साल पहले ही तैयार कर ली गई थी। एक मशहूर नज्म से शुरू होकर सुपरहिट गाना बनने तक का यह सफर आगे चलकर एक बड़े कानूनी विवाद का कारण भी बना था।
1950 में तैयार हुई थी नग्मे की धुन
इस गाने की कहानी साल 1950 से शुरू होती है, जब मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने अपनी प्रसिद्ध किताब तलखियां में इसे एक नज्म के रूप में शामिल किया था। उसी दौर में जाने-माने संगीत निर्देशक खय्याम ने फिल्म निर्माता चेतन आनंद की फिल्म काफिर के लिए इस नज्म को एक धुन में पिरोया था। साल 1950 के उस शुरुआती वर्जन में इस गाने को मशहूर पार्श्व गायिका गीता दत्त और सुधा मल्होत्रा ने अपनी आवाज दी थी।
मुकेश और लता मंगेशकर की आवाज में मिला नया जीवन
भले ही वह पुरानी फिल्म काफिर आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन खय्याम के पास वह धुन सुरक्षित रही। करीब ढाई दशक बाद जब 1976 में फिल्म कभी कभी का निर्माण शुरू हुआ, तब इस खूबसूरत धुन का दोबारा इस्तेमाल किया गया। मुकेश और लता मंगेशकर की सुरीली आवाज में रिकॉर्ड हुआ यह गाना रिलीज होते ही पूरे देश में छा गया और भारतीय संगीत जगत का एक शाहकार नग्मा बन गया।
कॉपीराइट विवाद और कोर्ट के बाहर समझौता
साल 1976 में जब यह गाना संगीत प्रेमियों के बीच जबरदस्त हिट साबित हुआ, तब निर्देशक चेतन आनंद ने अपनी 1950 की फिल्म के लिए बनी धुन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। चेतन आनंद ने कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाते हुए गीतकार साहिर लुधियानवी और संगीतकार खय्याम को लीगल नोटिस भेज दिया। हालांकि, यह कानूनी मामला अदालती कार्रवाई में लंबा नहीं खिंचा और दोनों पक्षों के बीच कोर्ट के बाहर ही सहमति से मामला सुलझा लिया गया।



















