भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शुमार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का भव्य आयोजन मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को गुजरात के केवड़िया में संपन्न हुआ। आमतौर पर नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में सजने वाली यह ऐतिहासिक महफिल 72 वर्षों के इतिहास में पहली बार देश की राजधानी से बाहर आयोजित की गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश भर के उत्कृष्ट सिनेमाई हुनर को मंच पर सम्मानित किया। वर्ष 1954 से शुरू हुए इन पुरस्कारों में हर साल फीचर फिल्म, गैर-फीचर फिल्म और सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए हस्तियों को चुना जाता है। इस समारोह में वर्ष 2024 में रिलीज हुई फिल्मों और शॉर्ट फिल्मों के योगदान को सराहा गया। जहां कार्तिक आर्यन, यामी गौतम और ममूटी जैसे स्थापित सितारों को मंच पर गौरव हासिल हुआ, वहीं इस पूरी शाम की सबसे खास चमक पांच युवा बाल कलाकारों के नाम रही जिन्होंने अपनी मासूम अदाकारी से राष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान खींचा।
72वें समारोह में सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार वर्ग के विजेता
इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का सम्मान तीन अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में अभिनय करने वाले पांच प्रतिभाशाली बच्चों को संयुक्त रूप से दिया गया। इनमें कन्नड़ सिनेमा की फीचर फिल्म 'मिथ्या' के लिए आतिश एस शेट्टी को चुना गया। तेलुगु सिनेमा का प्रतिनिधित्व करते हुए फिल्म 'चिन्ना कथा कादु' के युवा अभिनेता अरुणदेव पोथुला ने यह पुरस्कार हासिल किया। वहीं बंगाली भाषा की चर्चित फिल्म 'ओंको की कोथिन' से एक साथ तीन बाल कलाकारों रिद्धिमान बनर्जी, तपोमोय देब और गीताश्री चक्रवर्ती को सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। इन बच्चों ने अपनी अनूठी भूमिकाओं के जरिए यह साबित किया कि उम्र से परे जाकर किस तरह गहरा अभिनय रचा जा सकता है।
कन्नड़ फिल्म मिथ्या से आतिश एस शेट्टी का शानदार सफर
कन्नड़ फिल्म 'मिथ्या' में अपनी सशक्त और संवेदनशील भूमिका के दम पर आतिश एस शेट्टी ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में अपनी जगह पक्की की। आतिश कन्नड़ फिल्म उद्योग में एक बेहद उम्दा और कुशल युवा कलाकार के तौर पर जाने जाते हैं। बचपन के दिनों से ही कैमरे के सामने सक्रिय रहे आतिश अब तक विभिन्न विधाओं की 20 से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय का हुनर दिखा चुके हैं। लगातार कई परियोजनाओं में काम करने के बाद फिल्म 'मिथ्या' उनके करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हुई है, जिसके लिए उन्हें पूरे देश में भारी सराहना और राष्ट्रीय स्तर का शीर्ष सम्मान प्राप्त हुआ है।
चिन्ना कथा कादु से अरुणदेव पोथुला ने रचा इतिहास
तेलुगु सिनेमा के प्रतिभाशाली बाल कलाकार अरुणदेव पोथुला को फिल्म 'चिन्ना कथा कादु' में निभाए गए भावनात्मक किरदार के लिए यह सर्वोच्च सिनेमाई सम्मान मिला। समीक्षकों द्वारा जमकर सराही गई इस तेलुगु फिल्म में अरुणदेव ने 'अरुण' नाम के पात्र को पर्दे पर जिया था। इस सधे हुए और परिपक्व प्रदर्शन ने उन्हें पूरे देश में एक नई पहचान दिलाई। सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का यह पुरस्कार अपने नाम करने के साथ ही अरुणदेव पोथुला भारत का यह शीर्ष सिनेमाई सम्मान हासिल करने वाले तेलुगु फिल्म जगत के सबसे कम उम्र के अभिनेताओं में शामिल हो गए हैं।
ओंको की कोथिन की बाल तिकड़ी ने बिखेरा जादू
बंगाली फिल्म 'ओंको की कोथिन' के तीन नन्हे कलाकारों रिद्धिमान बनर्जी, तपोमोय देब और गीताश्री चक्रवर्ती की तिकड़ी ने इस पुरस्कार समारोह में खासी चर्चा बटोरी। फिल्म में 'टायर' की भूमिका निभाने वाले 10 वर्षीय तपोमोय देब पहले से ही बंगाली सिनेमा में एक पहचाना हुआ चेहरा हैं। वहीं 10 साल की गीताश्री चक्रवर्ती ने फिल्म में 'डॉली' के चरित्र को बखूबी निभाया और दर्शकों के साथ जूरी की भी प्रशंसा हासिल की। फिल्म में 'बाबिन' का महत्वपूर्ण किरदार निभाने वाले रिद्धिमान बनर्जी ने भी अपने सहज अभिनय से गहरा प्रभाव छोड़ा। दिलचस्प बात यह है कि सिनेमा के इस सबसे बड़े मंच पर पुरस्कार जीतने के बावजूद रिद्धिमान का असली सपना भविष्य में पायलट बनने का है।

















