राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक मेघना गुलजार अपनी आगामी थ्रिलर फिल्म दायरा के जरिए एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी के लिए पूरी तरह तैयार हैं. करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन के मुख्य अभिनय से सजी यह फिल्म अपनी आधिकारिक घोषणा के समय से ही सिनेप्रेमियों के बीच लगातार चर्चा का केंद्र बनी हुई है. अपने पूरे फिल्मी करियर में मेघना गुलजार ने हर बार एक अलग जॉनर चुना है और मानवीय संवेदनाओं की जटिल परतों को बेहद संजीदगी से दर्शकों के सामने पेश किया है. जासूसी थ्रिलर, असल घटनाओं पर केंद्रित क्राइम ड्रामा और ऐतिहासिक बायोपिक जैसी विविध शैलियों में उनका निर्देशन हमेशा दर्शकों के दिलों को गहराई से छूने में सफल रहा है. अब जब दायरा बहुत जल्द सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है, तो दर्शकों के लिए मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी उन छह यादगार फिल्मों को दोबारा जानना और देखना बेहद सामयिक हो जाता है, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में अपना खास मुकाम हासिल किया है.
राजी की जासूसी गाथा
साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर तैयार की गई राजी एक बेहद कसी हुई जासूसी थ्रिलर फिल्म के रूप में सामने आई थी. इस कहानी में आलिया भट्ट ने सहमत नाम की एक ऐसी कश्मीरी युवती का किरदार निभाया था, जो अपने वतन की सुरक्षा के लिए एक अंडरकवर जासूस बनकर सीमा पार पाकिस्तान जाती है. निर्देशक मेघना गुलजार ने बिना किसी अनावश्यक नाटकीयता या फिल्मी तड़क-भड़क के इस संवेदनशील विषय को पर्दे पर उतारा. एक युवा लड़की के भीतर चलने वाले भावनात्मक संघर्ष और देश के प्रति उसकी अडिग निष्ठा को इतने प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया कि फिल्म का हर एक दृश्य दर्शकों के दिल में उतर जाता है.
तलवार और जांच प्रणाली की पड़ताल
साल 2008 के बेहद चर्चित और सनसनीखेज नोएडा डबल मर्डर केस की वास्तविक घटनाओं पर आधारित तलवार एक ऐसी क्राइम थ्रिलर है, जो देखने वालों की सांसें थमा देती है. इस फिल्म में अभिनेता इरफान खान ने अपनी सधी हुई और बेमिसाल अदाकारी से जांच अधिकारी के किरदार में गहरी छाप छोड़ी. निर्देशक ने मामले में पुलिस प्रशासन और सीबीआई जांच के उलझे हुए बयानों तथा अलग-अलग पहलुओं को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ पर्दे पर रखा. यह कहानी भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली की अंतर्निहित कमजोरियों और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली की कमियों को उजागर करते हुए दर्शकों को अंत तक सोचने पर मजबूर रखती है.
सैम बहादुर का शौर्य
भारत के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के गौरवशाली जीवन और उनके सैन्य सफर पर केंद्रित फिल्म सैम बहादुर एक ऐतिहासिक वॉर ड्रामा है. इस फिल्म में विक्की कौशल ने सैम मानेकशॉ के करिश्माई व्यक्तित्व, हाजिरजवाबी और उनके दबंग अंदाज को बेहद जीवंत और वास्तविक बना दिया. मेघना गुलजार ने उनके दशकों लंबे सैन्य करियर, 1971 के ऐतिहासिक युद्ध के दौरान उनकी रणनीतिक सूझबूझ और मातृभूमि की सेवा के प्रति उनके आजीवन समर्पण को पूरे सम्मान के साथ प्रस्तुत किया. यह रचना हर देखने वाले के मन में देशभक्ति का गहरा जज्बा जगाती है.
छपाक में संघर्ष और गरिमा
एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के वास्तविक जीवन के संघर्षों से प्रेरित फिल्म छपाक में दीपिका पादुकोण ने मालती का बेहद सशक्त और मार्मिक किरदार निभाया था. मेघना गुलजार ने समाज के इस अत्यंत दर्दनाक और संवेदनशील विषय को पूरी गरिमा और मानवीय संवेदना के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया. यह कहानी केवल किसी हादसे के शिकार व्यक्ति का दर्द बयान करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इलाज के कठिन दौर, वर्षों लंबी कानूनी लड़ाई, समाज की संकीर्ण मानसिकता और विषम परिस्थितियों के खिलाफ एक महिला के अटूट हौसले को सामने लाती है. यह फिल्म सामाजिक चेतना को झकझोरने का काम करती है.
फिलहाल के मानवीय रिश्ते
बतौर निर्देशक मेघना गुलजार ने अपने सिने करियर की शुरुआत फिलहाल फिल्म के साथ की थी. सुष्मिता सेन और तब्बू के मुख्य अभिनय से सजी यह फिल्म दो बेहद करीबी और पक्की सहेलियों के आपसी रिश्ते की नाजुक कहानी बयां करती है. निर्देशक ने इसमें बहुत ही नफासत के साथ यह दिखाया कि जब जीवन में सरोगेसी जैसी स्थिति आती है, तो उसके बाद पैदा होने वाले गहरे भावनात्मक तनाव, सामाजिक दबाव और गलतफहमियां किस तरह बचपन की सबसे मजबूत दोस्ती की नींव को भी झकझोर कर रख देती हैं.
जस्ट मैरिड का वैवाहिक तालमेल
मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी फिल्म जस्ट मैरिड एक हल्की-फुल्की और दिल को छू लेने वाली रोमांटिक कॉमेडी ड्रामा है. अभिनेता फरदीन खान और अभिनेत्री ईशा देओल ने इस कहानी में मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं. पूरी फिल्म का ताना-बाना एक ऐसे नए-नवेले जोड़े के इर्द-गिर्द बुना गया है, जिनकी अरेंज मैरिज होती है और वे शादी के तुरंत बाद हनीमून के सफर पर रवाना होते हैं. निर्देशक ने बेहद सादगी और वास्तविकता के साथ वैवाहिक जीवन के शुरुआती संकोच, आपसी खिंचाव, तालमेल बिठाने की कोशिशों और दो अजनबियों के हमसफर बनने के खूबसूरत अहसास को कैमरे में कैद किया है.



















