हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल 1969 में रिलीज हुई रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'आराधना' एक ऐसा मील का पत्थर साबित हुई, जिसने राजेश खन्ना के करियर की दिशा हमेशा के लिए बदल दी। इस फिल्म की अपार सफलता के साथ ही राजेश खन्ना को बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार का दर्जा मिला। इसके बाद उनका ऐसा दौर शुरू हुआ कि साल 1971 तक उन्होंने बैक-टू-बैक 17 सुपरहिट फिल्में देकर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसकी बराबरी आज तक कोई दूसरा अभिनेता नहीं कर पाया है।
प्रेम, त्याग और मां-बेटे के जज्बातों की अनूठी कहानी
शक्ति सामंत के निर्देशन में तैयार हुई इस फिल्म की कहानी सिर्फ एक साधारण प्रेम प्रसंग नहीं थी, बल्कि इसमें गहरे त्याग और पारिवारिक रिश्तों का ताना-बाना बुना गया था। फिल्म में राजेश खन्ना ने दोहरी भूमिका निभाई थी, जिसमें उन्होंने पिता अरुण वर्मा और बेटे सूरज का किरदार जीवंत किया। वहीं, अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने वंदना त्रिपाठी के चुनौतीपूर्ण रोल को पर्दे पर उतारा। शुरुआत में अरुण और वंदना की प्रेम कहानी से आगे बढ़ते हुए यह कथा एक मां के संघर्ष और बेटे के साथ उसके भावनात्मक जुड़ाव के कई मर्मस्पर्शी मोड़ों से गुजरती है। शर्मिला टैगोर के इस संवेदनशील अभिनय ने उन्हें उस साल के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के सम्मान से नवाजा।
1 टेक में कैमरे में कैद हुआ था 3.43 मिनट का रोमांटिक गाना
इस फिल्म से जुड़ा सबसे चर्चित किस्सा इसके गाने 'रूप तेरा मस्ताना' का है। आज से पांच दशक पहले आधुनिक कैमरों और डिजिटल तकनीकों की भारी कमी थी। इसके बावजूद निर्देशक शक्ति सामंत ने इस पूरे 3 मिनट 43 सेकेंड के गाने को बिना किसी कट के सिर्फ एक ही टेक में शूट करने का बड़ा जोखिम उठाया। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर के बीच फिल्माए गए इस बेहद रोमांटिक और इंटीमेट गाने को सिंगल टेक में पूरा करना उस जमाने में तकनीकी रूप से एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया, जिसकी चर्चा आज भी सिनेमा जगत में होती है।
एस.डी. बर्मन के 7 जादुई गानों ने रचा इतिहास
'आराधना' को अमर बनाने में इसके संगीतकार एस.डी. बर्मन और गीतकार आनंद बख्शी की जोड़ी का बेमिसाल योगदान रहा। फिल्म में कुल 7 गाने शामिल किए गए थे, जिन्हें किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गज आवाजों ने सजाया। 'मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू', 'कोरा कागज था ये मन मेरा', 'गुनगुना रहे हैं भंवरे' और 'रूप तेरा मस्ताना' जैसे गीत रिलीज होते ही हर गली-नुक्कड़ पर गूंजने लगे। इन तरानों ने राजेश खन्ना की चॉकलेटी और रोमांटिक छवि को दर्शकों के दिलों में गहराई से स्थापित कर दिया।
सिनेमाघरों में लगातार 100 दिनों तक चलने का बनाया कीर्तिमान
दर्शकों के जबर्दस्त प्यार की बदौलत 'आराधना' हिंदी सिनेमा की पहली ऐसी फिल्म बनी, जिसने थिएटर्स में लगातार 100 दिनों तक टिके रहने का अनूठा रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया। सिनेमाघरों में उमड़ी भारी भीड़ और बंपर कमाई ने इसे भारतीय सिनेमा की सदाबहार ब्लॉकबस्टर फिल्मों की सूची में हमेशा के लिए शीर्ष पर बैठा दिया।



















