बेटे को खोने का दुख जीवन भर रहता है, और बॉलीवुड अभिनेता व होस्ट शेखर सुमन के लिए भी यह कड़वी सच्चाई है. 1994 में अपने 11 वर्षीय बेटे आयुष को खोने के बाद भी, शेखर सुमन आज भी उसकी यादों और मौजूदगी को अपने करीब महसूस करते हैं. हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने जीवन के सबसे दर्दनाक पलों और एक अविश्वसनीय घटना का खुलासा किया, जिसने उनके परिवार को अंदर तक हिला दिया था.
शुरुआती लक्षण और एक चौंकाने वाला खुलासा
शेखर सुमन ने लेहरेन रेट्रो को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उनके डॉक्टर पिता ने सबसे पहले आयुष की बीमारी के लक्षणों को पहचाना था. जब आयुष बचपन में अपने दादा की गोद में बैठा था, तभी उनके पिता को कुछ गड़बड़ महसूस हुई. पेशे से डॉक्टर होने के कारण, उन्होंने तुरंत शेखर सुमन को मुंबई लौटकर बच्चे के लीवर की जांच कराने की सलाह दी, क्योंकि उन्हें लगा कि वह थोड़ा बढ़ा हुआ है. उन्होंने परिवार को घबराने से मना किया लेकिन जांच को ज़रूरी बताया.
लाइलाज बीमारी: एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस
पिता की सलाह पर शेखर सुमन ने मुंबई लौटकर आयुष के मेडिकल टेस्ट करवाए. इन टेस्ट्स के नतीजों ने परिवार को सदमे में डाल दिया. डॉक्टरों ने बताया कि आयुष एक गंभीर और दुर्लभ हृदय रोग 'एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस' से पीड़ित था. यह एक ऐसी लाइलाज बीमारी है जो करोड़ों लोगों में से किसी एक को होती है. जब शेखर सुमन ने फोन पर अपने पिता को इस बीमारी के बारे में बताया, तो दूसरी तरफ सन्नाटा छा गया, और उनके पिता के मुंह से केवल 'हे भगवान' निकला.
शेखर सुमन के अनुसार, उनके पिता की इस प्रतिक्रिया ने उन्हें बीमारी की गंभीरता का एहसास करा दिया था. परिवार को जल्द ही पता चल गया कि आयुष की हालत बेहद नाज़ुक है और बीमारी एक लाइलाज चरण में पहुँच चुकी है. तमाम कोशिशों के बावजूद, आयुष का 1994 में, केवल 11 साल की उम्र में निधन हो गया.
काशी विश्वनाथ मंदिर में एक रहस्यमयी घटना
बेटे को खोने के दर्द पर बात करते हुए शेखर सुमन ने कहा कि ऐसी क्षति से कोई कभी पूरी तरह उबर नहीं सकता. उनका परिवार आज भी रोज़ आयुष को याद करता है और उसकी तस्वीरें देखता है. समय भले ही आगे बढ़ जाए, लेकिन बच्चे को खोने का दर्द जीवन भर साथ रहता है.
इसी इंटरव्यू में, शेखर सुमन ने एक ऐसा अनुभव साझा किया जिसे उनका परिवार कभी नहीं भूल पाया. यह घटना 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान हुई थी, जब शेखर सुमन चुनाव प्रचार में व्यस्त थे. तभी उनकी पत्नी अल्का सुमन का फोन आया, जो वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में थीं. अल्का बेहद घबराई हुई और रो रही थीं. इससे पहले कि वह कुछ कह पातीं, शेखर सुमन ने उनसे पूछा, 'क्या तुम आयुष से मिलीं?' अल्का यह सुनकर स्तब्ध रह गईं.
आयुष की आवाज़ और अचानक गायब हुआ व्यक्ति
अल्का सुमन ने बताया कि मंदिर में दर्शन करने के बाद जब वह बाहर निकलीं, तो एक व्यक्ति उनके पास आया और पैसे मांगने लगा. अल्का ने जैसे ही उसे कुछ पैसे दिए, उस व्यक्ति ने आयुष की हूबहू आवाज़ और उसी अंदाज़ में कहा, 'इतने से मेरा क्या होगा?' शेखर सुमन ने बताया कि यह बिल्कुल वही लाइन थी जो आयुष बचपन में अक्सर बोला करता था. बीमारी के कारण उसके खाने-पीने पर कड़ी पाबंदी थी, और उसे बहुत कम खाना दिया जाता था. तब वह हमेशा इसी अंदाज़ में चिढ़कर कहता था 'इतने से मेरा क्या होगा?'
आयुष की आवाज़ सुनकर अल्का इतनी हैरान हुईं कि वह तुरंत पर्स से और पैसे निकालने के लिए मुड़ीं, लेकिन जब उन्होंने सिर उठाया, तो वह व्यक्ति वहां से पूरी तरह गायब हो चुका था. उन्होंने आसपास उसे बहुत ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिला. यह घटना और भी अजीब थी क्योंकि भीड़भाड़ वाली जगह से कोई भी इतनी जल्दी ओझल नहीं हो सकता था.
पुनर्जन्म की उम्मीद: 'अध्ययन के बेटे के रूप में लौटेगा'
शेखर सुमन ने बताया कि कई पुजारियों और ज्योतिषियों ने उन्हें सांत्वना दी थी कि आयुष एक दिन उन्हें अपनी मौजूदगी का कोई न कोई संकेत ज़रूर देगा. अल्का सुमन का आज भी दृढ़ विश्वास है कि वह साया और कोई नहीं, बल्कि उनका बेटा आयुष ही था. शेखर सुमन ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें कई लोगों ने यह भी बताया है कि आयुष एक दिन दूसरे रूप में उनके परिवार में वापस लौटेगा. उनसे कहा गया है कि वह अध्ययन के बेटे के रूप में दोबारा जन्म लेगा. शेखर सुमन और उनका परिवार उस पल का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है. शेखर सुमन कहते हैं, 'मुझे सच में महसूस होता है कि वह हमारे आसपास ही है, मैं उसकी आवाज़ सुन सकता हूँ.'













