वित्त वर्ष 2026-27 के शुरू हुए अभी छह महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन केंद्र सरकार के राजस्व संग्रह में भारी उछाल दर्ज किया गया है। सरकारी खजाने में प्रत्यक्ष कर के रूप में एक बड़ी राशि जमा हो चुकी है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 फीसदी की दर से बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इस दौरान कॉरपोरेट घरानों ने अग्रिम कर (अग्रिम भुगतान) के रूप में सरकार को भारी भुगतान किया है, जिससे कर संग्रह को मजबूत सहारा मिला है। चालू वित्त वर्ष में अग्रिम कर संग्रह 16.18 प्रतिशत की वृद्धि के साथ करीब 5.22 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
अग्रिम कर भुगतान में कॉरपोरेट क्षेत्र का दबदबा
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि देश में अग्रिम कर जमा करने के मामले में कॉरपोरेट क्षेत्र का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान कॉरपोरेट क्षेत्र से होने वाला अग्रिम कर संग्रह 18 प्रतिशत की तेजी के साथ 4.16 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर, गैर-कॉरपोरेट क्षेत्र, जिसमें व्यक्तिगत करदाता और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हैं, से प्राप्त होने वाला अग्रिम कर संग्रह 9.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। कर संग्रह बढ़ने के साथ ही सरकार ने करदाताओं को पैसे लौटाने की प्रक्रिया भी तेज की है। आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर तक जारी किया गया कुल कर रिफंड 29.19 प्रतिशत बढ़कर 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह और अन्य मदों का विवरण
सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके बाद यह कुल 14.32 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इस सकल राशि में से करदाताओं को जारी किए गए रिफंड को समायोजित करने के बाद, कॉरपोरेट, गैर-कॉरपोरेट और प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) सहित कुल शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 12.96 फीसदी की दर से बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहा। इसमें से शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 19.48 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ करीब 5.56 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वहीं, शुद्ध गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह में 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और यह 6.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इस दौरान शेयर बाजार में मची हलचल का असर भी साफ दिखा, जहां 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच एसटीटी (STT) संग्रह 53 फीसदी के बड़े उछाल के साथ 40,214 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का विश्लेषण और सालाना लक्ष्य
इस कर संग्रह ढांचे का विश्लेषण करते हुए पेशेवर सेवा प्रदाता संस्था ईवाई इंडिया (EY India) ने जानकारी दी है कि वर्तमान में कुल संग्रह में गैर-कॉरपोरेट कर का योगदान 48.7 प्रतिशत रहा है, जबकि कॉरपोरेट कर की हिस्सेदारी लगभग इसके बराबर यानी 48.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस शानदार प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) की टैक्स पार्टनर ऋषा सावनी ने बताया कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में दिख रही यह तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। उनके अनुसार, अग्रिम कर भुगतान में लगातार हो रही यह वृद्धि करदाताओं के मजबूत भरोसे, कंपनियों के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और आने वाले समय में कमाई की मजबूत उम्मीदों का एक बेहद सकारात्मक संकेत है। सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 26.97 लाख करोड़ रुपये तय किया है। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में प्राप्त हुए 23.40 लाख करोड़ रुपये के कुल कर संग्रह से पूरे 15 प्रतिशत अधिक है।



















