घरेलू बजट और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर बना दबाव आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) के ताज़ा अनुमानों के अनुसार अक्टूबर 2026 में देश की थोक महंगाई 12 प्रतिशत से ऊपर निकल सकती है, जबकि खुदरा महंगाई के 6 प्रतिशत के स्तर को पार कर जाने की आशंका बनी हुई है। मौसम में हुए बदलावों, ईंधन तथा ऊर्जा की बढ़ती लागत और प्रतिकूल बेस इफेक्ट की वजह से कीमतों में यह उछाल आने की संभावना जताई गई है।
थोक मूल्य सूचकांक में दोहरे अंकों का दबाव
थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई आने वाले कई महीनों तक ऊंचे पायदान पर टिके रहने के संकेत दे रही है। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक प्रतिकूल बेस इफेक्ट के असर से फरवरी 2027 तक थोक मुद्रास्फीति दोहरे अंकों में बनी रह सकती है। इससे पहले सितंबर के आधिकारिक आंकड़ों में थोक महंगाई बढ़कर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो मौजूदा सीरीज का सबसे ऊंचा स्तर दर्ज हुआ था। अगस्त में यह आंकड़ा 9.92 प्रतिशत रहा था, यानी एक ही महीने के अंतराल में थोक कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई थी।
उपभोक्ता बाजार और खुदरा महंगाई की स्थिति
बाजार से खरीदारी करने वाले आम उपभोक्ताओं के लिए भी राहत के संकेत नहीं मिल रहे हैं। सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो पिछले 23 महीनों का सर्वाधिक स्तर है, जबकि इससे पिछले महीने यानी अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत दर्ज की गई थी। एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत के विश्लेषण के अनुसार अक्टूबर में खुदरा आंकड़ा 6 प्रतिशत की सीमा लांघ सकता है, जिससे दैनिक खर्च चलाने वाले परिवारों की वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
कच्चा तेल, कमजोर मुद्रा और आयात पर असर
थोक दरों में होने वाले बदलावों पर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय भावों का सीधा और तीव्र असर देखने को मिलता है। दूसरी ओर, खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल की दरों के साथ सरकारी करों और शुल्कों के निर्धारण का व्यापक प्रभाव पड़ता है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की कमजोरी ने भी आयात को महंगा बनाकर इस दबाव को बढ़ाया है। मुख्य अर्थशास्त्री के अनुसार दोनों ही श्रेणियों में महंगाई का दायरा अब व्यापक हो रहा है। यदि पश्चिम एशिया का तनाव कम होता है, तो वास्तविक आंकड़े अनुमानों से कुछ नीचे रह सकते हैं।
कर्ज और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना
मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने मौजूदा मौद्रिक कड़ेपन के क्रम में नीतिगत ब्याज दरों में 50 से 75 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है। पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक ने रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा कर इसे 5.50 प्रतिशत निर्धारित किया था, जो फरवरी 2023 के बाद पहली बार की गई दर वृद्धि थी। यदि ब्याज दरों में यह वृद्धि आगे भी जारी रहती है, तो वाणिज्यिक बैंकों से मिलने वाले आवास ऋण और अन्य प्रकार के उपभोक्ता ऋणों की मासिक किस्त यानी EMI में इजाफा होना तय माना जा रहा है।



















