ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने अमेजन नदी के मुहाने के पास तेल के नए भंडार मिलने पर बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस खोज को देश की तरक्की के लिए एक अहम कदम बताया है। राष्ट्रपति ने एक शीशी में उस तेल को थामे हुए अपनी बात रखी जिसे खोजबीन के दौरान ड्रिलिंग करके निकाला गया था।
यह तेल खोज देश की सरकारी तेल कंपनी पेत्रोब्रास की तरफ से घोषित की गई थी। इसके ऐलान के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि यह देश के भविष्य का पासपोर्ट साबित हो सकता है। हालांकि इस इलाके में खोजपूर्ण ड्रिलिंग की इजाजत देने के उनके फैसले की पर्यावरणविदों ने कड़ी आलोचना की थी। जानकारों का कहना था कि यदि इस क्षेत्र में तेल रिसाव जैसी कोई दुर्घटना होती है तो वहां का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह तबाह हो सकता है।
चुनाव से पहले उठाया गया बड़ा कदम और जलवायु प्रतिबद्धताएं
आगामी अक्टूबर महीने में होने वाले चुनावों में राष्ट्रपति पद के लिए उतर रहे लूला डा सिल्वा ने यह भी साफ किया कि वह जलवायु परिवर्तन पर लगाम लगाने के लिए जीवाश्म ईंधन को धीरे-धीरे पूरी तरह बंद करने की अपनी प्रतिबद्धता पर आज भी कायम हैं। यह तेल खोज समुद्र के भीतर अमेजन के तट से करीब 175 किलोमीटर यानी 110 मील की दूरी पर की गई है। इसके बावजूद इस तेल क्षेत्र का कुल आकार अभी तक साफ तौर पर सामने नहीं आया है।
इसके अलावा यह बात भी अभी तक तय नहीं हो पाई है कि 2,886 मीटर यानी 9,469 फीट की गहराई पर मौजूद इस तेल को व्यावसायिक रूप से निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। प्रकृति प्रेमियों और संरक्षणवादियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि जिस क्षेत्र में यह गहरे पानी की ड्रिलिंग की जा रही है वह जैव विविधता से भरपूर है। उन्हें इस बात का गहरा डर है कि किसी भी दुर्घटना से न केवल पास की रीफ को खतरा पैदा हो सकता है बल्कि समुद्री धाराएं रिसाव वाले तेल को वन्यजीवों से भरे तटीय आर्द्रभूमि तक भी पहुंचा सकती हैं।
विदेशी दखलअंदाजी और राष्ट्रीय संप्रभुता पर बयान
पर्यावरण कार्यकर्ताओं की तरफ से पहले उठाई गई आलोचनाओं को लूला डा सिल्वा ने पहले ही खारिज करते हुए उसे दखलअंदाजी करार दिया था। सोमवार को उन्होंने एक बार फिर दोटोक शब्दों में कहा कि वह किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि इसका सीधा मतलब राष्ट्रीय संप्रभुता से है और जिस भी देश के पास इस गुणवत्ता का तेल मौजूद होगा वह कभी किसी को इसमें अपनी टांग अड़ाने की अनुमति नहीं देगा।
सरकारी कंपनी पेत्रोब्रास ने इस इलाके में समुद्र के भीतर गहरे पानी में ड्रिलिंग का अभियान अक्टूबर 2025 में शुरू किया था। कंपनी की मुख्य कार्यकारी मैग्दा चाम्ब्रियार्ड ने इस संबंध में बताया कि इस खोज ने इस बात पर पक्की मुहर लगा दी है कि ब्राजीलियाई इक्वेटोरियल मार्जिन में तेल मिलने को लेकर कंपनी की उम्मीदें पूरी तरह सही साबित हुई हैं। उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि कंपनी देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह समर्पित है।
ऊर्जा बदलाव और राजनीतिक विरोध का सामना
राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा का यह तर्क रहा है कि जीवाश्म ईंधन से इतर स्वच्छ ऊर्जा की तरफ ब्राजील के बदलाव को वित्तीय मदद देने के लिए इन तेल से मिलने वाले राजस्व की सख्त जरूरत है। सोमवार को अपनी बात रखते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि वह जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाने की अपनी लड़ाई से पीछे नहीं हट रहे हैं क्योंकि ब्राजील आगे भी बायोफ्यूल के क्षेत्र में नए आविष्कार का सरताज बना रहेगा और रिन्यूएबल एनर्जी में एक प्रमुख खिलाड़ी की भूमिका निभाता रहेगा।
जब राष्ट्रपति ने पिछले साल नवंबर में ब्राजील की मेजबानी में हुए कॉप30 जलवायु सम्मेलन से ठीक कुछ हफ्ते पहले पेत्रोब्रास को खोजपूर्ण ड्रिलिंग शुरू करने की हरी झंडी दी थी, तब पर्यावरणविद् सन्न रह गए थे। सोमवार को दिए अपने बयानों में उन्होंने उस समय हुए भारी विरोध का जिक्र किया और खासतौर पर यूरोप से उठी आलोचनाओं को अलग से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कई लोग नहीं चाहते थे कि वह इस बात का ऐलान करें कि पेत्रोब्रास को लाइसेंस मिल गया है क्योंकि उनका मानना था कि इससे यूरोपीय देश नाराज हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने कॉप सम्मेलन से पहले ही वहां ड्रिलिंग शुरू कराने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि देश और कंपनी का हित दांव पर लगा हुआ था।
तटीय इलाकों में रोजगार की उम्मीदें और सियासत
तट के पास तेल मिलने की इस संभावना ने ओयापोक शहर के लोगों में एक नई उम्मीद जगा दी है। स्थानीय आवास प्राधिकरणों के मुताबिक अमापा राज्य के इस शहर में नौकरियों और नए अवसरों की आस में बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना शुरू हो गया है। राष्ट्रपति चुनाव में अब दो महीने से भी कम का वक्त बचा है, ऐसे में लूला डा सिल्वा ब्राजील के इस दूरदराज कोने में आर्थिक विकास की उम्मीद लगाए बैठे मतदाताओं को अपने पक्ष में लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, साथ ही वह उन लोगों को भी नाराज नहीं करना चाहते जो पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित बुरे प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।



















