परंपरागत फसलों के मुकाबले बागवानी (उद्यानिकी) किसानों के लिए कमाई का एक मजबूत जरिया बनती जा रही है, और इसकी शुरुआत के लिए साल का यह दौर सबसे मुफीद माना जाता है। मानसून दस्तक देने ही वाला है, इसलिए विशेषज्ञ कह रहे हैं कि बरसात आने से पहले अगर खेत की बुनियादी तैयारी पूरी कर ली जाए तो पौधों की बढ़वार कहीं बेहतर होती है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिला उद्यानिकी विभाग के उप-संचालक निर्मल कुमार गोयल ने TrendKia से बातचीत में किसानों के लिए इसी तैयारी का पूरा खाका साझा किया है।
पहले खेत, फिर पौधा — रोपाई से पहले की तैयारी
गोयल का कहना है कि इस सीजन में बागवानी अपनाने का इरादा रखने वाले किसानों को सबसे पहला काम खेत में गड्ढों की खुदाई का पूरा कर लेना चाहिए। उनके मुताबिक अभी का समय इसी प्राथमिक तैयारी यानी खेत को रोपाई लायक बनाने के लिहाज से सबसे उपयुक्त है। फायदा यह होगा कि जैसे ही आने वाले दिनों में बारिश शुरू होगी, किसान पहले से तैयार इन गड्ढों में बिना देरी किए पौधे रोप सकेंगे।
शिवपुरी की मिट्टी के लिए ये पांच फल हैं फायदे का सौदा
विशेषज्ञ के अनुसार शिवपुरी जिले की जलवायु और मिट्टी ऐसी पांच फलदार फसलों के लिए खासतौर पर अनुकूल है, जिनसे किसान अच्छा-खासा मुनाफा कमा सकते हैं। यह सूची है — आम, नींबू, अमरूद, कटहल और सीताफल। यानी जो किसान बागवानी की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं, उनके पास चुनने के लिए कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं।
नींबू का बगीचा लगाना है तो यह दूरी याद रखें
तकनीकी पहलू समझाते हुए उप-संचालक ने बताया कि नींबू का बगीचा लगाने वाले किसानों को पौधों के बीच की दूरी पर खास ध्यान देना होगा। नींबू के पौधे आपस में 6×6 मीटर की दूरी पर लगाए जाने चाहिए। उनकी सलाह है कि इसी माप के हिसाब से खेत में पहले से निशान (मार्किंग) लगाकर गड्ढे खोद लिए जाएं, ताकि बारिश शुरू होते ही पौधारोपण का काम तुरंत किया जा सके।
सब्सिडी और मुफ्त पौधे चाहिए तो ऐसे करें आवेदन
जो किसान सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी या पौधों का लाभ लेना चाहते हैं, उनके लिए भी रास्ता बताया गया है। इसके लिए उद्यानिकी विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग के ई-लॉटरी सिस्टम के जरिए लाभार्थियों का चयन होगा। स्वीकृति मिल जाने पर किसान विभाग के तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक अपने खेतों में पौधारोपण शुरू कर सकते हैं।













