ठंड का मौसम कृषि क्षेत्र में मशरूम उत्पादन के लिए सबसे मुफीद वक्त माना जाता है। इस दौरान वातावरण का तापमान आमतौर पर 22 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जाता है, जो मशरूम की बढ़िया और स्वस्थ पैदावार के लिए पूरी तरह मुफीद रहता है। खेती या बागवानी के जरिए अच्छी अतिरिक्त कमाई की योजना बना रहे लोगों के लिए बटन मशरूम की पैदावार एक बेहद लाभकारी जरिया साबित हो रही है। सामान्य किस्मों जैसे ओयस्टर मशरूम की तुलना में बटन मशरूम को बाजार में काफी ज्यादा तवज्जो और बेहतर मूल्य दोनों मिलते हैं। जमुई के अनुभवी उत्पादक पप्पू तांती, जो बीते कई वर्षों से बड़े पैमाने पर इसकी खेती से जुड़े हैं, बताते हैं कि नए उत्पादकों के लिए बटन मशरूम चुनना सबसे बढ़िया कदम है क्योंकि बाजार में इसकी कीमत और ग्राहकों के बीच इसकी मांग बाकी सभी किस्मों से कहीं आगे रहती है।
शाकाहारियों का मटन कहलाता है यह मशरूम
बाजार में बटन मशरूम की लगातार बनी रहने वाली जबर्दस्त मांग की सबसे प्रमुख वजह इसका खास जायका है। अपने बेहतरीन स्वाद और बनावट के चलते खानपान की दुनिया में इसे शाकाहारियों का मटन भी कहा जाता है। जितने भी बड़े होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट हैं, वे अपनी विभिन्न प्रकार की सब्जियों और खास व्यंजनों में मुख्य रूप से बटन मशरूम को ही शामिल करते हैं। आम उपभोक्ता भी इसके स्वाद के कायल हैं, जिससे पूरे साल इसकी खरीदारी का दायरा लगातार विस्तृत बना रहता है।
स्थानीय स्तर पर बिक्री और डेढ़ गुना बेहतर दाम
बटन मशरूम उगाने वाले किसानों को अपनी उपज खपाने के लिए दूरदराज की मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं। यह पूरी पैदावार स्थानीय बाजार में ही हाथों-हाथ बिक जाती है, बल्कि कई बार ग्राहक खुद किसानों के घर पहुंचकर सीधे ताजा मशरूम की खरीदारी कर लेते हैं। आर्थिक दृष्टि से दोनों किस्मों की तुलना करें तो अंतर बेहद साफ दिखाई देता है। जहां खुले बाजार में ओयस्टर मशरूम अमूमन ₹100 प्रति किलो के भाव पर बिकता है, वहीं बटन मशरूम का थोक भाव ही ₹150 से लेकर ₹180 प्रति किलो तक आसानी से मिल जाता है। यह सीधा अंतर किसानों की आमदनी को बहुत कम समय में कई गुना बढ़ा देता है।
लंबी शेल्फ लाइफ और सुरक्षित रख-रखाव
पप्पू तांती के मुताबिक बटन मशरूम का एक बड़ा व्यावहारिक लाभ यह है कि तुड़ाई के फौरन बाद इसके खराब होने या गलने का जोखिम बेहद कम रहता है। आमतौर पर कई अन्य मशरूम तोड़ने के अगले ही दिन से काले पड़ने लगते हैं और उनकी गुणवत्ता तेजी से गिर जाती है, लेकिन बटन मशरूम को तुड़ाई के बाद भी 2 से 3 दिनों तक पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है। अगर किसी किसान के आसपास तुरंत कोई बड़ा थोक बाजार मौजूद न हो या उपज को फौरन परिवहन के जरिए भेजने की सुविधा न मिले, तब भी फसल खराब होने की हड़बड़ाहट नहीं होती। रैक बनाकर सीमित स्थान में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है, जिससे सर्दियों के महीनों में कम लागत लगाकर भी भारी मुनाफा कमाना संभव हो जाता है।

















