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भारत ने मई 2026 में रूस से ₹56,000 करोड़ का तेल और ईंधन खरीदा, चीन के बाद बना दूसरा सबसे बड़ा खरीदारव्यापार
14 जून 2026, 9:29 am (45 दिन पहले)· 0

भारत ने मई 2026 में रूस से ₹56,000 करोड़ का तेल और ईंधन खरीदा, चीन के बाद बना दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

CREA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी प्रतिबंधों और ट्रंप की चेतावनियों के बीच भारत ने मई में रूस से 5.8 अरब यूरो (करीब 56,000 करोड़ रुपये) का जीवाश्म ईंधन खरीदकर वैश्विक खरीदारों में दूसरा स्थान बनाए रखा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कई पश्चिमी देशों की प्रतिबंध लगाने की चेतावनियों के बावजूद भारत ने रूस से तेल और गैस की खरीद में कोई कटौती नहीं की है। इसका सीधा असर आंकड़ों में दिखा है — मई 2026 में भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की नई रिपोर्ट इस रुझान की पुष्टि करती है।

आंकड़ों में कितनी बड़ी खरीद

रिपोर्ट बताती है कि भारतीय रिफाइनरियों ने खरीद का दायरा बढ़ाया, जिसके चलते रूस से कच्चे तेल और दूसरे ईंधनों का कुल आयात बढ़कर 5.8 अरब यूरो यानी लगभग 56,000 करोड़ रुपये के पार चला गया। रूस के कच्चे तेल के निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा चीन का रहा, जो मई में 50 फीसदी तक पहुंचा। भारत 36 फीसदी हिस्सेदारी के साथ इसके ठीक पीछे, दूसरे पायदान पर बना रहा।

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कच्चे तेल का दबदबा, कोयला और तेल उत्पाद भी

मई में रूस से भारत के कुल आयात में अकेले कच्चे तेल (Crude Oil) की हिस्सेदारी करीब 83 फीसदी रही। यानी खरीद का बड़ा हिस्सा सीधे क्रूड का था। लेकिन रिफाइनरियों ने सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं मंगाया — रूस से तेल उत्पादों और कोयले की खरीद भी बड़े पैमाने पर जारी रही। रिपोर्ट के मुताबिक तेल उत्पादों का आयात 55 करोड़ यूरो का रहा, जबकि कोयले के आयात का मूल्य 42.9 करोड़ यूरो दर्ज किया गया।

एक महीने में 8 फीसदी का उछाल

भारत के कुल कच्चे तेल आयात में मासिक आधार पर आठ फीसदी की मजबूत बढ़त देखी गई। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह रूसी क्रूड रहा, जिसका आयात मई में 21 फीसदी बढ़ गया। इस बढ़ी हुई आमद का सबसे ज्यादा असर गुजरात के रिफाइनिंग और औद्योगिक केंद्रों पर दिखा। आंकड़ों के अनुसार वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल के मुकाबले मई में 36 प्रतिशत ज्यादा रूसी तेल जहाजों से उतारा गया। वहीं दुनिया के सबसे बड़े जामनगर रिफाइनिंग परिसर में भी रूसी क्रूड की आवक मासिक आधार पर 14 प्रतिशत बढ़ गई।

सरकारी रिफाइनरियों की दोबारा एंट्री

निजी ही नहीं, सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरी कंपनियों ने भी इस साल की शुरुआत में आयात फिर से शुरू करने के बाद खरीद का स्तर बढ़ाया है। न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरी ने नवंबर 2025 के आखिर में रूसी तेल मंगाना रोक दिया था, लेकिन मार्च से इन दोनों ने दोबारा खरीद शुरू कर दी। मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति मासिक आधार पर 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में यह बढ़ोतरी 42 प्रतिशत तक पहुंच गई।

ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी में तो पिछले दो साल में रूसी कच्चे तेल की सबसे बड़ी मात्रा उतारी गई। यह इस बात का साफ संकेत है कि भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों के दबाव के बीच भी रियायती दर पर मिलने वाला रूसी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए मुनाफे का सौदा बना हुआ है।

यूक्रेन युद्ध ने बदल दिया समीकरण

यह पूरा बदलाव यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद शुरू हुआ। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और व्यापारिक रोक ने वैश्विक ऊर्जा कारोबार की दिशा ही पलट दी, और इसी दौरान भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हो गया। सस्ती दरों पर रूसी क्रूड खरीदकर भारतीय रिफाइनरियों ने न सिर्फ अपनी ऊर्जा लागत घटाई, बल्कि अपने रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को भी मजबूती दी है।

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