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बंपर कमाई का मौका: गेहूं कटाई के बाद लगाएं टमाटर, जानें खेती का नया तरीकाव्यापार
19 जून 2026, 8:29 am (45 दिन पहले)· 3

बंपर कमाई का मौका: गेहूं कटाई के बाद लगाएं टमाटर, जानें खेती का नया तरीका

कृषि क्षेत्र में युवा अब आधुनिक तरीकों से खेती कर रहे हैं, जिसमें ऑफ-सीजन फसलें उगाना मुनाफे का नया जरिया बन गया है. गेहूं की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में टमाटर की खेती करके किसान अच्छा-खासा मुनाफा…

आजकल कृषि के क्षेत्र में एक नई क्रांति देखने को मिल रही है, जहाँ युवा किसान पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक और स्मार्ट फार्मिंग की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. मौजूदा समय में खेती से अधिकतम मुनाफा कमाने के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि किस मौसम में कौन सी फसल लगाई जाए. यदि आप खेती से शानदार कमाई करना चाहते हैं, तो आपको भीड़ से हटकर सोचना होगा. गेहूं की कटाई के बाद जो खेत अक्सर खाली पड़े रहते हैं, वे इस समय टमाटर की खेती के लिए एक बेहतरीन अवसर प्रदान कर सकते हैं, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है.

बेहतर मुनाफे का रास्ता: ऑफ-सीजन खेती

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेती में ज्यादा कमाई का सीधा सिद्धांत ऑफ-सीजन यानी गैर-मौसमी फसलें उगाना है. जब किसी सब्जी का प्राकृतिक मौसम खत्म होने लगता है, तो बाजार में उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है, कभी-कभी तो 5 गुना तक. यह स्थिति अक्सर सावन और भादो (मानसून) के महीनों में देखी जाती है, जब सब्जियों के दाम आसमान छूने लगते हैं. इस दौरान टमाटर की कीमतें ₹100 प्रति किलो या उससे भी अधिक हो सकती हैं. ऐसे में ऑफ-सीजन टमाटर की खेती किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है.

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टमाटर की खेती क्यों है फायदेमंद?

यदि किसान इस समय टमाटर लगाते हैं, तो यह मात्र 40 दिनों में फल देना शुरू कर देगा. लागत और मुनाफे के गणित को समझना महत्वपूर्ण है: एक पौधे पर कुल मिलाकर लगभग ₹20 का खर्च आता है. यदि ऑफ-सीजन में टमाटर ₹100 प्रति किलो बिकता है और एक पौधे से 10 किलो टमाटर भी प्राप्त होते हैं, तो एक पौधे से करीब ₹1,000 तक की कमाई होने का अनुमान है. यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कैसे कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है.

बिहार कृषि विश्वविद्यालय का मार्गदर्शन

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह ने बताया कि ऑफ-सीजन खेती करना कुछ हद तक जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन सही तकनीक और कड़ी मेहनत के साथ यह बेहद सफल रहता है. उन्होंने विशेष रूप से बरसात के मौसम में किसानों को अलान विधि (मचान विधि) अपनाने की सलाह दी है. डॉ. सिंह के अनुसार, अलान विधि में बरसाती टमाटर को जमीन पर फैलने देने के बजाय लकड़ी या बांस के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है, यानी मचान बनाया जाता है. ऐसा करना बहुत जरूरी है क्योंकि जमीन पर फैलने से मानसून की तेज बारिश के कारण फसल के गलने और सड़ने का खतरा बढ़ जाता है.

बीएयू द्वारा विकसित किस्में और तकनीक

वैज्ञानिक नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) ने एक खास किस्म का गरमा टमाटर विकसित किया है, जो बीज रहित (seedless) है. बाजार में इस किस्म के टमाटर की मांग और कीमत दोनों ही सामान्य टमाटर की तुलना में काफी ज्यादा है. इसके अतिरिक्त, भागलपुर की मिट्टी और जलवायु को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने कुछ बेहतरीन किस्मों की सिफारिश की है, जिनमें Namdhari 4266, Abhilash और Sahu 3251 शामिल हैं. कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह का कहना है कि यदि किसान उन्नत बीजों का चयन करें और सही तकनीकों (जैसे अलान विधि) का उपयोग करें, तो खाली पड़े खेत उनकी आमदनी को कई गुना बढ़ाने का मुख्य जरिया बन सकते हैं.

सवाल-जवाब

ऑफ-सीजन खेती क्या है?
ऑफ-सीजन खेती में फसलें ऐसे समय में उगाई जाती हैं जब वे आमतौर पर नहीं उगतीं, जिससे किसान सीमित आपूर्ति के कारण मिलने वाली ऊंची बाजार कीमतों का लाभ उठा सकें.
ऑफ-सीजन टमाटर की खेती खास तौर पर फायदेमंद क्यों है?
गैर-मौसमी समय में, खासकर मानसून के महीनों में, टमाटर की कीमतें अक्सर काफी बढ़ जाती हैं, कभी-कभी तो पाँच गुना तक, जिससे ऑफ-सीजन खेती बहुत लाभदायक हो जाती है.
किसानों को ऑफ-सीजन मुनाफे के लिए टमाटर कब लगाना चाहिए?
किसानों को गेहूं की कटाई के बाद खाली हुए खेतों में टमाटर लगाने पर विचार करना चाहिए ताकि वे ऑफ-सीजन मांग का लाभ उठा सकें.
प्रति टमाटर पौधे से कितनी कमाई की उम्मीद है?
यदि ऑफ-सीजन टमाटर ₹100 प्रति किलोग्राम बिकते हैं और एक पौधा 10 किलोग्राम उपज देता है, तो एक पौधे पर ₹20 की लागत के मुकाबले लगभग ₹1,000 तक की कमाई हो सकती है.
अलान विधि क्या है?
अलान विधि, या मचान विधि, में टमाटर के पौधों को जमीन पर फैलने देने के बजाय लकड़ी या बांस की संरचनाओं के सहारे ऊपर उठाया जाता है, जो विशेष रूप से मानसून के दौरान सड़न से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है.
मानसून के टमाटर के लिए अलान विधि की सिफारिश किसने की?
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह ने किसानों को अलान विधि अपनाने की विशेष सलाह दी.
BAU ने टमाटर की कौन सी खास किस्में विकसित की हैं?
बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने एक अनोखी बीजरहित 'गरमा' (गर्मी) टमाटर की किस्म विकसित की है जिसकी बाजार में उच्च मांग और कीमत है.
भागलपुर के लिए कौन सी टमाटर किस्में अनुशंसित हैं?
भागलपुर की मिट्टी और जलवायु के लिए विश्वविद्यालय ने Namdhari 4266, Abhilash और Sahu 3251 जैसी किस्मों की सिफारिश की है.
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