अचल संपत्ति के बाजार में आमतौर पर खरीदार फ्लैट, रिहायशी प्लॉट या व्यावसायिक दुकानों की ओर रुख करते हैं. हालांकि, चीन के हुनान प्रांत में एक महिला निवेशक ने पारंपरिक सोच से बिल्कुल अलग रास्ता चुना. जब शहर का एक नया रिहायशी इलाका पूरी तरह विकसित भी नहीं हुआ था, तब उन्होंने वाहनों की बढ़ती जरूरत को भांपते हुए पार्किंग स्लॉट में भारी निवेश करने का जोखिम उठाया. आज वही अप्रत्याशित दांव उनके लिए हर महीने लाखों रुपये के तय किराए और संपत्ति के ऊंचे मूल्यांकन का जरिया बन चुका है.
डेवलपर की तंगी और महिला का 40 फीसदी हिस्सा खरीदना
यह मामला साल 2018 में पूरे हुए एक बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है. उस दौर में इस रिहायशी योजना के भीतर ज्यादातर खरीदारों की दिलचस्पी केवल फ्लैट्स खरीदने में थी और कोई भी अतिरिक्त पार्किंग स्पेस पर पूंजी लगाने के पक्ष में नहीं था. प्रोजेक्ट तैयार करने वाला रियल एस्टेट डेवलपर उस समय नकदी की भारी किल्लत से जूझ रहा था और उसे अपनी रुकी हुई संपत्तियों को जल्द बेचना था.
महिला ने डेवलपर की इस वित्तीय मजबूरी और बाजार के खालीपन को एक मौके के तौर पर देखा. उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के करीब 40 फीसदी हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित करते हुए कुल 196 पार्किंग स्पेस एक साथ खरीद लिए. इस पूरी डील के लिए उन्होंने 1.4 करोड़ युआन का एकमुश्त भुगतान किया, जो भारतीय मुद्रा में करीब 19.36 करोड़ रुपये या लगभग 20 करोड़ रुपये (20 लाख डॉलर) के बराबर बैठता है. जब यह सौदा हुआ, तब आसपास के कई लोगों ने इसे भारी घाटे और बर्बादी वाला फैसला करार दिया था.
इलाके का तेजी से कायाकल्प और पार्किंग की भारी किल्लत
सौदा पूरा होने के बाद कुछ ही वर्षों में उस पूरे क्षेत्र की भौगोलिक और व्यावसायिक स्थिति तेजी से बदल गई. जिस जगह पर पहले सन्नाटा रहता था, वहां आधुनिक शॉपिंग मॉल, बड़े स्कूल, अस्पताल और अन्य नागरिक सुविधाएं खुल गईं. इन सुविधाओं के शुरू होते ही वहां परिवारों की बसाहट बढ़ी और निजी कारों की संख्या में अप्रत्याशित उछाल आया.
अचानक पैदा हुई इस मांग के बीच लोगों को अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए जगह नहीं मिल रही थी. चूंकि प्रोजेक्ट की 40 प्रतिशत पार्किंग पर अकेले इस महिला का मालिकाना हक था, इसलिए वाहनों के मालिकों के पास उनसे संपर्क करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा. इस तरह जो जगह कभी खाली पड़ी थी, वह रातों-रात उस इलाके की सबसे कीमती जरूरत में तब्दील हो गई.
लाखों की मासिक कमाई और स्थानीय निवासियों का विरोध
मांग बढ़ते ही महिला ने अपने स्वामित्व वाले स्लॉट को मासिक किराए पर देना शुरू कर दिया. साल 2018 में इलाके के भीतर पार्किंग का जो सामान्य किराया तय था, महिला आज उससे दोगुनी दर वसूल रही हैं. एक स्लॉट से उन्हें हर महीने 7,258 रुपये का किराया मिल रहा है. यदि 192 पार्किंग स्लॉट के हिसाब से गणना की जाए, तो उन्हें हर महीने करीब 14 लाख रुपये की नियमित कमाई किराए से हो रही है.
किराए की इस ऊंची दर से परेशान होकर आसपास के स्थानीय निवासियों ने महिला पर दबाव बनाने की कोशिश की. स्थानीय लोगों ने मांग रखी कि इस मासिक किराए को घटाकर 4,334 रुपये प्रति स्लॉट किया जाए, लेकिन महिला ने अपने वैध व्यवसायिक फैसले का हवाला देते हुए किराया घटाने से साफ इनकार कर दिया.
दोगुने से ज्यादा दाम पर रीसेल और अदालत की मुहर
मासिक किराए के अलावा महिला इन पार्किंग स्लॉट्स की रीसेल से भी भारी मुनाफा कमा रही हैं. उन्होंने इनमें से कुछ स्लॉट्स को अपनी मूल खरीद लागत से 80 फीसदी से ज्यादा के मुनाफे पर बेचने के सौदे तय कर लिए हैं. वर्तमान में एक पार्किंग स्लॉट की कीमत बढ़कर 15 हजार डॉलर यानी करीब 14.52 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है, जिससे यह निवेश दोतरफा मुनाफा दे रहा है.
स्थानीय निवासियों ने महिला के इस एकाधिकार और निवेश सौदे को रद्द कराने के लिए बाकायदा अदालत का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि, अदालत ने स्थानीय लोगों की याचिका खारिज करते हुए फैसला पूरी तरह से महिला के पक्ष में सुनाया. अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि जब प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, तब पार्किंग स्पेस खरीदने का मौका सभी खरीदारों के पास बराबर था. चूंकि उस वक्त यह बड़ा वित्तीय जोखिम केवल इस महिला ने उठाया था, इसलिए आज जब हालात अनुकूल हैं तो उन्हें अपने कानूनी निवेश से जायज मुनाफा कमाने से कतई नहीं रोका जा सकता.



















