भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग की रूपरेखा तैयार होती दिख रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार को संभालने वाली कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स घरेलू पूंजी बाजार में उतरने की व्यापक तैयारी में जुटी है। इस प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम के तहत कंपनी 1,065 रुपये से लेकर 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय कर सकती है। यदि यह निर्गम इसी मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर पेश होता है, तो कंपनी का कुल मूल्यांकन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये यानी तकरीबन 107 अरब डॉलर के स्तर को छू सकता है। इस निर्गम के जरिए कुल 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की योजना सामने आई है, जिससे कंपनी के खाते में 28,755 करोड़ रुपये से लेकर 30,213 करोड़ रुपये तक की ताजा पूंजी आने का अनुमान है।
हालांकि, इस प्रस्तावित पेशकश को लेकर अभी रिलायंस इंडस्ट्रीज अथवा जियो प्लेटफॉर्म्स की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बाजार नियामक के समक्ष जब कंपनी अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल करेगी, तभी निर्गम का वास्तविक आकार, निश्चित मूल्य दायरा और अन्य वैधानिक विवरण पूरी तरह स्पष्ट हो सकेंगे। प्राथमिक बाजार के विशेषज्ञ इस संभावित कदम को घरेलू वित्तीय इतिहास की एक बेहद अहम परिघटना के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का यह आकार भारत में अब तक पेश हुए किसी भी आईपीओ से कहीं अधिक बड़ा साबित होगा।
पूर्ण रूप से फ्रेश इश्यू होगा सार्वजनिक निर्गम
इस बड़े बाजार निर्गम की सबसे उल्लेखनीय संरचनात्मक विशेषता इसका पूरी तरह से नए शेयरों पर आधारित होना है। मौजूदा जानकारी के अनुसार, इस पूरे सौदे को सौ फीसदी फ्रेश इश्यू के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसका सीधा तकनीकी अर्थ यह है कि कंपनी में पहले से निवेश कर चुके बड़े प्रमोटर या रणनीतिक साझेदार इस प्रक्रिया में ऑफर फॉर सेल के जरिए अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहे हैं। परिणामस्वरूप, वैश्विक तकनीकी दिग्गज मेटा और गूगल जैसी कंपनियां, जिन्होंने पूर्व में इस डिजिटल उद्यम में पर्याप्त वित्तीय पूंजी लगाई थी, इस आरंभिक निर्गम के माध्यम से अपनी मौजूदा शेयरधारिता से बाहर नहीं निकलेंगी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोटरों और वैश्विक रणनीतिक भागीदारों द्वारा अपनी हिस्सेदारी न बेचना कंपनी के आंतरिक वित्तीय स्वास्थ्य और उसके दीर्घकालिक कारोबारी भविष्य पर मजबूत भरोसे को प्रदर्शित करता है। जुटाई जाने वाली संपूर्ण 30,213 करोड़ रुपये की पूंजी सीधे उद्यम के विस्तार, डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास और नई तकनीकी परियोजनाओं में लगाई जा सकेगी, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना है।
विश्लेषकों के अनुमानों और वर्तमान मूल्यांकन का गणित
ऊपरी मूल्य सीमा 1,119 रुपये प्रति शेयर के आधार पर आंका गया लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये या 107 अरब डॉलर का संभावित मूल्यांकन कुछ पूर्ववर्ती बाजार आकलनों की तुलना में थोड़ा संयमित जान पड़ता है। इससे पहले वित्तीय गलियारों में ऐसी चर्चाएं जोरों पर थीं कि रिलायंस समूह अपने इस डिजिटल आर्म के लिए तकरीबन 11 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन की तलाश कर रहा है। इसके अलावा, जून महीने में घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने जियो प्लेटफॉर्म्स का संभावित वैल्यूएशन 115 से 118 अरब डॉलर के दायरे में तय किया था। उसी समयावधि के आसपास दोलत कैपिटल ने भी कंपनी का मूल्यांकन लगभग 110 अरब डॉलर रहने का अनुमान व्यक्त किया था।
इस प्रकार, वर्तमान में सामने आ रहा प्रस्तावित मूल्य दायरा विश्लेषकों द्वारा लगाए गए पिछले स्वतंत्र अनुमानों के लगभग बराबर या उनसे हल्का सा नीचे बैठता है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, मूल्यांकन को आक्रामक स्तर पर ले जाने के बजाय इस स्तर पर सीमित रखना निवेशकों को आकर्षित करने और बाजार में मांग की निरंतरता बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
शेयर आरक्षण ढांचा और निर्गम प्रबंधन व्यवस्था
प्रस्तावित निर्गम के शेयर आवंटन ढांचे को प्राथमिक बाजार के स्थापित नियमों के अनुरूप वर्गीकृत किया गया है। इसके तहत पात्र संस्थागत खरीदारों यानी क्यूआईबी के लिए कुल निर्गम का 50 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखा जाना प्रस्तावित है। आम खुदरा निवेशकों के लिए इस सार्वजनिक निर्गम में 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है, जबकि उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्तियों और गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी के लिए शेष 15 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किए जाने की योजना है।
कंपनी के प्रत्येक शेयर का अंकित मूल्य 10 रुपये निर्धारित रहने की उम्मीद है। प्रक्रिया संपन्न होने के पश्चात इन शेयरों की लिस्टिंग देश के दोनों प्रमुख एक्सचेंजों, बीएसई और एनएसई, पर कराई जाएगी। इस पूरे ऐतिहासिक निर्गम के रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी केफिन टेक्नोलॉजीज को सौंपे जाने की सूचना है। इसके साथ ही, निर्गम के कुशल वित्तीय प्रबंधन, संस्थागत संपर्क और बुक बिल्डिंग प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए कंपनी ने 19 प्रमुख मर्चेंट बैंकों की सेवाएं ली हैं।
संभावित तिथियां और ग्रे मार्केट प्रीमियम का रुख
यद्यपि निर्गम की आधिकारिक समय-सारिणी की वैधानिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन बाजार की गतिविधियों पर नजर रखने वाले कुछ मंचों ने इसकी संभावित समय-सीमा को लेकर संकेत दिए हैं। इन अनौपचारिक विवरणों के मुताबिक, निवेशकों के लिए बोली लगाने की संभावित खिड़की 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर के बीच खुल सकती है। इसके उपरांत, सफल आवेदकों को शेयरों का आवंटन 26 अक्टूबर को किए जाने और दोनों प्रमुख एक्सचेंजों पर अंतिम लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की संभावना जताई जा रही है। बहरहाल, जब तक नियामक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं होते, इन सभी तारीखों को पूरी तरह अस्थायी माना जाना चाहिए। एंकर निवेशकों की बोली की तारीख, न्यूनतम लॉट साइज और खुदरा निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि जैसी आवश्यक शर्तें भी औपचारिक विवरणों के प्रकाशन के बाद ही पुष्ट होंगी।
इस बीच, अनौपचारिक ग्रे मार्केट में भी इस संभावित पेशकश को लेकर सक्रियता दर्ज की जा रही है। अनौपचारिक कारोबार में यह शेयर 160 रुपये से 170 रुपये प्रति शेयर के प्रीमियम पर कारोबार करता देखा गया है। यदि प्रस्तावित ऊपरी मूल्य सीमा 1,119 रुपये को आधार बनाया जाए, तो 160 से 170 रुपये का यह ग्रे मार्केट प्रीमियम लगभग 14 से 15 प्रतिशत के संभावित लिस्टिंग लाभ का संकेत प्रस्तुत करता है।



















