दिल्ली में अब हर महीने चुभेगा बिजली बिल: DERC ने मंजूर किया मासिक PPAC, जानिए किन उपभोक्ताओं की जेब होगी ढीलीव्यापार
4 घंटे पहले· 0

दिल्ली में अब हर महीने चुभेगा बिजली बिल: DERC ने मंजूर किया मासिक PPAC, जानिए किन उपभोक्ताओं की जेब होगी ढीली

दिल्ली विद्युत नियामक आयोग ने तीनों बिजली कंपनियों को अप्रैल 2026 से हर महीने PPAC वसूलने की छूट दी है, जिससे 400 यूनिट से ज्यादा खपत वाले उपभोक्ताओं के बिल में 1% से 3.30% तक का इजाफा हो सकता है.

भीषण गर्मी में जब घर-घर एसी और कूलर दिन-रात चल रहे हैं, ठीक उसी वक्त दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक ऐसा फैसला आया है जो उनके मासिक बजट को सीधे प्रभावित करेगा. पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी झेल चुके राजधानीवासियों को अब बिजली के बिल में भी अतिरिक्त भार उठाना पड़ सकता है.

क्या बदला है इस फैसले में

दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों — बीआरपीएल (BRPL), बीवाईपीएल (BYPL) और टीपीडीडीएल (TPDDL) — को अप्रैल 2026 से हर महीने पीपीएसी (Power Purchase Adjustment Charge) वसूलने की अनुमति दे दी है. अब तक यह शुल्क तीन-तीन महीने के अंतराल पर लगाया जाता था. नए आदेश के बाद इसका असर तिमाही के बजाय हर महीने के बिल में नजर आएगा.

आखिर यह PPAC होता क्या है

दरअसल पीपीएसी एक अतिरिक्त शुल्क है, जिसके सहारे बिजली खरीदने में आई बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं से वसूल की जाती है. जब कोयला, गैस और दूसरे ईंधनों के दाम चढ़ते हैं तो बिजली बनाना भी महंगा हो जाता है, और इसी बढ़े खर्च का एक हिस्सा आम उपभोक्ता तक पहुंचा दिया जाता है. यह कोई दिल्ली तक सीमित व्यवस्था नहीं है — देश के 25 से ज्यादा राज्यों में यह पहले से चल रही है.

अप्रैल 2026 के लिए तय दरें

आयोग ने अप्रैल 2026 के लिए जो दरें मंजूर की हैं, उनमें टीपीडीडीएल (TPDDL) के दायरे में आने वाले उत्तर और पश्चिम दिल्ली के उपभोक्ताओं के लिए यह शुल्क 16% तय किया गया है. खास बात यह है कि बिजली कंपनियों ने जितनी दर की मांग रखी थी, आयोग ने उससे कम दर को ही हरी झंडी दी है.

किसे राहत, किसकी जेब पर बोझ

दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ उठाने वाले उपभोक्ताओं को फिलहाल चिंता करने की जरूरत नहीं है. जो लोग 0 से 200 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं, उन पर इस बदलाव का कोई असर नहीं होगा. इसी तरह 0 से 400 यूनिट तक खपत करने वाले सब्सिडीधारकों पर भी कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा. इसकी वजह यह है कि दिल्ली की सब्सिडी यूनिट के आधार पर मिलती है, बिल की राशि के आधार पर नहीं.

असली मार उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगी जो महीने में 400 यूनिट से ज्यादा बिजली फूंकते हैं या जो सब्सिडी के दायरे से बाहर हैं. ऐसे लोगों के बिल में 1% से लेकर 3.30% तक का अतिरिक्त सरचार्ज जुड़ सकता है. अनुमान है कि इन उपभोक्ताओं को जून के महीने में अपेक्षाकृत भारी-भरकम बिजली बिल थमाया जा सकता है.

नया 'नियम F' और इसका मकसद

आयोग ने इस आदेश के साथ एक नया 'नियम F' भी लागू किया है. इसके मुताबिक अगर किसी महीने पीपीएसी की पूरी रकम नहीं वसूली जा पाती, तो बकाया हिस्से को आगे के महीनों में चरणबद्ध तरीके से समायोजित किया जा सकेगा. इससे बिजली कंपनियों को अपनी लागत समय पर वसूलने में आसानी होगी.

कंपनियों और आयोग का तर्क

बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) का कहना है कि उन्हें बिजली बनाने वाली कंपनियों को समय पर भुगतान करना पड़ता है. अगर लागत की भरपाई समय पर नहीं होती तो उन पर वित्तीय दबाव बढ़ जाता है और ब्याज का अतिरिक्त बोझ भी झेलना पड़ता है. वहीं DERC का मानना है कि हर महीने पीपीएसी वसूलने से बिजली कंपनियों की नकदी की स्थिति बेहतर रहेगी और आगे चलकर उपभोक्ताओं को एकमुश्त बड़े वित्तीय झटके से बचाया जा सकेगा.

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