पूरे आठ साल के लंबे इंतजार के बाद देवघर के लोगों को एक बार फिर बढ़िया खरीदारी का मौका हाथ लगा है. शहर के शिवलोक परिसर में इन दिनों हस्तशिल्प उत्सव मेला सजा हुआ है, जहां देश के 15 राज्यों के मशहूर उत्पाद एक ही छत के नीचे मिल रहे हैं. खास बात यह है कि यहां कई चीजें बाजार के मुकाबले कम दाम पर मिल रही हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ रहा.
मेले में रोजाना भारी भीड़ उमड़ रही है और लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं. रंग-बिरंगे स्टॉल और अलग-अलग राज्यों की कला, संस्कृति और हस्तशिल्प की झलक यहां आने वालों को खूब लुभा रही है. यही वजह है कि यह मेला सिर्फ देवघर ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है.
14 जून से 5 जुलाई तक चलेगा मेला
शिवलोक परिसर में यह मेला 14 जून से शुरू हुआ है और 5 जुलाई तक चलेगा. आयोजक और लखनऊ निवासी सुनील शर्मा ने बताया कि इस बार देश के करीब 15 राज्यों के कारीगर और व्यापारी अपने-अपने इलाके के मशहूर उत्पाद लेकर देवघर पहुंचे हैं. यानी अब लोगों को अलग-अलग राज्यों में जाकर खरीदारी करने की जरूरत नहीं, क्योंकि कई राज्यों की खास चीजें यहीं एक जगह मौजूद हैं.
किन राज्यों की क्या खासियत
मेले में लखनऊ की मशहूर चिकनकारी के परिधान, सहारनपुर की लकड़ी से बनी आकर्षक सजावटी वस्तुएं और राजस्थान का प्रसिद्ध चूरमा लोगों को खूब पसंद आ रहा है. इनके अलावा कई पारंपरिक उत्पाद भी यहां मौजूद हैं. हाल यह है कि लगभग हर स्टॉल पर खरीदारों की भीड़ देखने को मिल रही है.
महिलाओं के लिए खास विकल्प
मेले में महिलाओं और युवतियों के लिए खरीदारी के ढेरों आकर्षक विकल्प मौजूद हैं. यहां कुर्तियां सिर्फ 200 रुपये से शुरू हो रही हैं. इसके साथ ही जयपुरी कॉटन ड्रेस, दिल्ली के स्टाइलिश शरारे, राजस्थानी सूट, जयपुरी प्रिंट की कुर्तियां और लखनऊ की चिकनकारी समेत कई फैशनेबल परिधान बिक्री के लिए रखे गए हैं.
कपड़ों की कीमत 200 रुपये से लेकर 1800 रुपये तक है, यानी हर वर्ग के लोग अपने बजट के हिसाब से खरीदारी कर सकते हैं. इन स्टॉलों को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह दिख रहा है. कपड़ों के अलावा हाथ से बने सजावटी सामान, घरेलू इस्तेमाल की चीजें और पारंपरिक उत्पाद भी लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं.
सुबह साढ़े 11 बजे से रात 9 बजे तक खुला
मेला रोजाना सुबह करीब 11:30 बजे से शुरू होकर रात 9 बजे तक चलता है. शाम के समय यहां सबसे ज्यादा भीड़ जुटती है. परिवार के साथ आने वाले लोग खरीदारी के साथ-साथ मेले के माहौल का भी भरपूर आनंद ले रहे हैं. आयोजकों का कहना है कि इस मेले का मकसद देश के अलग-अलग हिस्सों की कला और हस्तशिल्प को लोगों तक पहुंचाना है, ताकि कारीगरों को बेहतर बाजार मिले और ग्राहकों को सही दाम पर अच्छी क्वालिटी के उत्पाद मिल सकें. ऐसे में अगर आप भी कुछ खास, पारंपरिक और किफायती सामान खरीदना चाहते हैं, तो 5 जुलाई तक चलने वाले इस मेले का रुख कर सकते हैं.













