त्योहारी सीजन के सबसे बड़े खरीदारी पर्व से ठीक पहले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं के भाव में नरमी का रुख देखा जा रहा है। 4 नवंबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर कारोबार के दौरान सोने और चांदी दोनों के भाव में कमजोरी दर्ज की गई। घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमत 202 रुपये फिसलकर 139250 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। इसी तरह चांदी में काफी तेज मंदी देखने को मिली है, जहां इसकी कीमत 1887 रुपये लुढ़ककर 177811 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। विदेशी बाजारों की बात करें तो कॉमेक्स पर चांदी का भाव 0.98 फीसदी टूटकर 49 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किया गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का रेट 0.19 फीसदी की हल्की बढ़त लेकर 3,947 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है।
मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड का बुलियन बाजार पर असर
कीमती धातुओं के मौजूदा भाव पर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतकों का सीधा प्रभाव पड़ रहा है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी से सोने की कीमतों पर दबाव गहराता जा रहा है। ब्लू लाइन फ्यूचर्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट फिलिप स्ट्राइबल का कहना है कि मजबूत होता डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड सोने के भाव को ऊपर जाने से रोक रहे हैं। वित्तीय बाजारों में निवेशक इस समय अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते की चर्चाओं और अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच डॉलर की चाल को बहुत सतर्कता से देख रहे हैं। जब बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत होते हैं, तो बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेशकों का आकर्षण कम होने लगता है।
कच्चे तेल में नरमी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
कमोडिटी बाजार के दूसरे बड़े मोर्चे पर कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को लगभग 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते यह तीन हफ्तों के अपने निचले स्तर पर पहुंच गया। ऊर्जा बाजार में कारोबारी इस समय यूक्रेन और ईरान से जुड़े सैन्य संघर्षों को समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों पर बारीक नजर रखे हुए हैं। हालांकि, इन दोनों संघर्ष क्षेत्रों में हाल में हुए हमलों के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं और शांति वार्ता की संभावनाएं एक साथ मौजूद होने की वजह से तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका व्यापक असर कमोडिटी धारणा पर पड़ रहा है।
धनतेरस की त्योहारी खरीदारी और खुदरा बाजार के हालात
देशभर में इस साल धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी। भारतीय संस्कृति और परंपरा में इस दिन सोने और चांदी की खरीदारी को अत्यंत शुभ माना जाता है। अनगिनत भारतीय परिवारों के लिए धनतेरस के मौके पर इन कीमती धातुओं को खरीदना केवल एक धार्मिक रस्म या परंपरा नहीं है, बल्कि यह भविष्य की वित्तीय सुरक्षा और बचत का भी बेहद अहम माध्यम रहा है। धनतेरस से ठीक दो दिन पहले कीमतों में आई इस हालिया गिरावट ने उन ग्राहकों को थोड़ी राहत पहुंचाई है, जो त्योहारी गहनों या सिक्कों की खरीदारी का मन बना रहे थे। खुदरा खरीदारों के बीच अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि मौजूदा मूल्य स्तरों को देखते हुए इस धनतेरस पर सोने या चांदी में से किसका चयन अधिक फायदेमंद साबित होगा।
खुदरा बाजार की स्थिति देखें तो चांदी के भाव में आई इस सुस्ती से ग्राहकों के लिए खरीदारी का अनुकूल माहौल बनता दिख रहा है। देश के प्रमुख शहरों जैसे जयपुर, लखनऊ, कोयंबटूर, मदुरै, विजयवाड़ा, पटना, नागपुर, चंडीगढ़ और सूरत में चांदी के दाम एक समान स्तर पर स्थिर देखे गए हैं। इन सभी शहरों में 10 ग्राम चांदी का भाव 1,999 रुपये, 100 ग्राम चांदी की कीमत 19,990 रुपये और 1 किलोग्राम चांदी की कीमत 1,99,900 रुपये दर्ज की गई है। इस तरह का स्पष्ट मूल्य ढांचा खुदरा ग्राहकों को अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार छोटी या बड़ी मात्रा में खरीदारी की सुविधा देता है।
भारतीय खरीदारों का बदलता खर्च और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े
भारत में सोने की कीमतें भले ही रिकॉर्ड उच्च स्तरों पर कारोबार कर रही हों, लेकिन ग्राहकों की खर्च करने की प्रवृत्ति में कोई बड़ी कमी नहीं आई है। हालांकि ऊंची कीमतों के दबाव में खरीदे जाने वाले सोने की वास्तविक भौतिक मात्रा कम हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC की एक रिपोर्ट बताती है कि 2026 के शुरुआती 9 महीनों के दौरान भारत में सोने के आभूषणों की कुल मांग सालाना आधार पर 18 फीसदी गिरकर 241.1 टन रह गई। मांग की मात्रा में यह गिरावट आने के बावजूद भारतीय ग्राहकों द्वारा गहनों की खरीद पर खर्च की गई कुल रकम 29 फीसदी बढ़कर 3,618.3 अरब रुपये के स्तर पर पहुंच गई। इसका सीधा अर्थ यह है कि ऊंची कीमतों के कारण लोग वजन के हिसाब से कम सोना खरीद पा रहे हैं, लेकिन त्योहारी और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी जेब से पहले के मुकाबले काफी ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं।
आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और औद्योगिक मांग पर टिकी नजरें
बुलियन और कमोडिटी बाजारों के जानकारों के अनुसार, मौजूदा हफ्ते में वैश्विक निवेशकों का ध्यान मुख्य रूप से अमेरिका से सामने आने वाले वृहद आर्थिक आंकड़ों पर केंद्रित रहेगा। इस कड़ी में अमेरिकी मिडटर्म चुनाव, बेरोजगारी के नवीनतम आंकड़े और नॉन-फार्म पेरोल यानी Non-Farm Payrolls डेटा सबसे अहम माने जा रहे हैं। इन आंकड़ों से विश्लेषकों को यह समझने का ठोस आधार मिलेगा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार की वास्तविक स्थिति कैसी है और केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व भविष्य में अपनी ब्याज दर नीतियों को लेकर क्या रुख अपना सकता है। अमेरिकी आर्थिक रुझानों का सीधा असर वैश्विक पूंजी बाजारों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।
इसके साथ ही, कच्चे तेल के वैश्विक दामों में जारी हलचल, अमेरिकी मुद्रास्फीति से जुड़े आगामी आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदें भी बुलियन की दिशा तय करेंगी। वहीं दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर तकनीकी उपकरणों, सोलर पैनलों और इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े औद्योगिक क्षेत्र में चांदी तथा अन्य धातुओं की खपत कितनी स्थिर रहती है, इस पर भी बाजार प्रतिभागी कड़ी नजर रखे हुए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में मांग की मजबूती अथवा नरमी आने वाले दिनों में सोने, चांदी और अन्य प्रमुख कमोडिटी के मूल्य चक्र को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी।



















