कीमती धातुओं के बाजार में बीते एक साल के दौरान भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। कुछ महीने पहले तक जब चांदी ने जोरदार तेजी दिखाते हुए 4 लाख का स्तर पार किया था, तब बाजार में यह चर्चा जोरों पर थी कि यह धातु 5 लाख के आंकड़े को भी पार कर सकती है। हालांकि हालिया कारोबारी सत्रों में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और बीते एक महीने के भीतर ही चांदी की कीमतों में 18 फीसदी की तीखी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार के विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और नरमी देखने को मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से संपत्ति जोड़ने वाले निवेशकों के लिए यह गिरावट अपने पोर्टफोलियो में धातु का आवंटन बढ़ाने का एक ठोस मौका साबित हो सकती है। मौजूदा दौर में अपेक्षाकृत कम भाव पर खरीदारी करने से भविष्य में बेहतर रिटर्न मिलने की गुंजाइश बन रही है।
वैश्विक स्तर पर एक साल के निचले स्तर पर पहुंची चांदी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी इस समय अपने पिछले एक साल के सबसे निचले स्तर पर कारोबार कर रही है। मौजूदा भाव नवंबर, 2025 के मुकाबले भी काफी नीचे आ चुके हैं। कीमतों में इस तेज दबाव के पीछे बढ़ती महंगाई की चिंताएं और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की आशंका प्रमुख वजह मानी जा रही है। वैश्विक बाजार में 3 नवंबर को हाजिर चांदी का भाव लुढ़ककर 48.63 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक चला गया था। हालांकि बाद में इसमें आंशिक सुधार देखा गया, फिर भी कारोबार की समाप्ति तक इसमें 1.62 फीसदी की गिरावट बनी रही। आंकड़ों के अनुसार साप्ताहिक आधार पर चांदी 8.37 फीसदी कमजोर हुई है, जबकि पूरे महीने का आंकड़ा देखें तो इसमें 18 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
घरेलू बाजार और एमसीएक्स पर कीमतों का हाल
वैश्विक कमजोरी का सीधा असर भारत के घरेलू जिंस बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मल्टीकमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 4 दिसंबर की डिलीवरी वाले चांदी अनुबंध का भाव 2.17 फीसदी की कमजोरी के साथ 1,79,794 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। बाजार की इस उठापटक के केंद्र में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़ी आशंकाएं हैं, जहां नीतिगत दरों में आगे और बढ़ोतरी का डर बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका के रोजगार आंकड़े, बेरोजगारी की स्थिति और मुद्रास्फीति के रुझान भी कीमतों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगे कच्चे तेल की स्थिति और लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
औद्योगिक दबाव और सोने-चांदी का ऐतिहासिक अनुपात
एवीपी कमोडिटी रिसर्च के शोधकर्ता कायनात चेनवाला के अनुसार कीमती धातुओं में तेज बढ़त के बाद एक स्वाभाविक तकनीकी सुधार आता है, जो बाजार के चक्रीय स्वभाव का हिस्सा है। पारंपरिक मांग के अलावा सेमीकंडक्टर, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल विनिर्माण जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की गतिविधियों का असर भी चांदी की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर सोने के भाव में चांदी की तुलना में काफी कम उतार-चढ़ाव देखा गया है। इसी स्थिरता के कारण हाल के दिनों में सोने और चांदी का मूल्य अनुपात बढ़कर 79 के स्तर तक पहुंच गया, जो हाल के वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर दर्ज किया गया है। यह बढ़ता अनुपात यह समझने का एक प्रमुख पैमाना है कि औसतन दोनों धातुओं में से किसकी कीमतों की चाल किस दिशा में तेज रही है।
आने वाले समय में संभावित दायरे और आगे का रुख
बाजार विशेषज्ञों का आकलन है कि निकट भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी का भाव 47 से 50 डॉलर प्रति औंस के दायरे में टिका रह सकता है। यदि यह धातु इस दायरे को बनाए रखने में सफल रहती है, तो आने वाले समय में इसके और अधिक सस्ते होने की संभावना सीमित मानी जा रही है। हालांकि यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है और भाव 47 डॉलर के नीचे फिसलता है, तो यह गिरावट 43 से 45 डॉलर प्रति औंस के आसपास जाकर संभल सकती है। यह दबाव मुख्य रूप से महंगाई के बने रहने और बॉन्ड यील्ड में मजबूती की स्थिति में ही गहरा सकता है। मौजूदा परिस्थितियों में भाव के इससे नीचे जाने के आसार बहुत कम दिख रहे हैं। ऐसे में जो निवेशक लंबी अवधि के लिए धातु में अपना एक्सपोजर बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह स्तर रणनीतिक रूप से अनुकूल माना जा सकता है, क्योंकि अगले साल से कीमतों में दोबारा तेजी लौटने की मजबूत संभावनाएं जताई जा रही हैं।

















