अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में बहुमूल्य धातुओं के दामों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान जारी रहने और ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट के बीच निवेशक अपनी रणनीतियों को नए सिरे से साध रहे हैं। हाजिर बाजार में सोना मामूली बढ़त के साथ करीब 3,944 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, हालांकि इससे पहले के सत्र में यह 3,965 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छूने के बाद फिसल गया था। दूसरी तरफ, चांदी की कीमतों में शुरुआती गिरावट के बाद थोड़ी रिकवरी देखने को मिली और यह मंगलवार को करीब 50 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती नजर आई। सोमवार को 3.6 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाने के बाद चांदी अभी भी नकारात्मक दायरे में टिकी हुई है।
कच्चे तेल में गिरावट से वैश्विक महंगाई का दबाव घटा
कीमती धातुओं के रुझान पर कच्चे तेल के दामों में आए बड़े सुधार का सीधा असर पड़ा है। वैश्विक बाजार में अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 1 प्रतिशत टूटकर लगभग 95.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड भी मामूली गिरावट के साथ लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल कीमतों में यह नरमी कई प्रमुख भू-राजनीतिक घोषणाओं के बाद दर्ज की गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस साल के अंत तक इजरायल को दिए जाने वाले अपने 4 अरब डॉलर के सहायता कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर देगा। इस घोषणा के बाद तेल बाजार ने अपनी पिछली शुरुआती बढ़त गंवा दी।
इसके साथ ही ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उपजी चिंताओं को दूर करते हुए अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने स्थिति स्पष्ट की। क्रिस राइट ने बताया कि ईरान के केशम द्वीप पर रात भर किए गए हमलों से क्षेत्र की तेल आपूर्ति में किसी तरह की रुकावट नहीं आई है। ऊर्जा आपूर्ति सामान्य बने रहने और कच्चे तेल के भाव गिरने से दुनिया भर में मुद्रास्फीति का दबाव कम हो सकता है। यदि ईंधन सस्ता होता है तो केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरों को और अधिक बढ़ाने की बाध्यता भी घट सकती है, जिससे वित्तीय बाजारों को थोड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
फेडरल रिजर्व की दिसंबर बैठक पर सट्टा बाजार की निगाहें
ब्याज दरों के मोर्चे पर बाजार के प्रतिभागी बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। सीएमई के फेडवॉच टूल के आंकड़ों पर नजर डालें तो बाजार दिसंबर नीति समीक्षा में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की करीब 75 प्रतिशत संभावना जता रहा है। आगामी बैठक में मौद्रिक सख्ती जारी रहने के आसार से डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती बनी रह सकती है, जिसका सीधा असर बिना ब्याज देने वाली धातुओं जैसे सोने और चांदी पर दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजे नीतिगत दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। वर्तमान चुनावी परिदृश्य में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर डेमोक्रेट्स के दोबारा नियंत्रण हासिल करने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, जबकि सीनेट के अंतिम नतीजों को लेकर स्थिति अब भी पूरी तरह अनिश्चित बनी हुई है। संसद के दोनों सदनों में सत्ता के संतुलन से आर्थिक प्राथमिकताओं और सरकारी खर्च के फैसलों पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है।
गोल्ड काउंसिल ने घटाया निवेश वृद्धि का अनुमान
सोने के मांग-आपूर्ति समीकरणों को लेकर विश्व स्वर्ण परिषद की ताजा रिपोर्ट ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है। विश्व स्वर्ण परिषद ने चालू वर्ष के लिए सोने में होने वाली निवेश वृद्धि के अपने पूर्व अनुमान को आधा कर दिया है। परिषद ने इस वृद्धि अनुमान को 400 मीट्रिक टन से घटाकर 200 मीट्रिक टन कर दिया है। संस्थागत और खुदरा निवेशकों की मांग का यह अनुमान भले ही घटाया गया हो, लेकिन दूसरी तरफ परिषद ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जाने वाली सोने की आधिकारिक खरीदारी के अपने अनुमान को बढ़ा दिया है। केंद्रीय बैंकों की लगातार मजबूत खरीदारी लंबी अवधि में सोने की कीमतों के लिए एक ठोस सुरक्षा कवच तैयार कर रही है।

















