कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने नियोक्ताओं और संस्थानों के लिए एक नई विवाद समाधान पहल शुरू की है। इस विशेष एकमुश्त निपटारा योजना का मुख्य उद्देश्य पीएफ अंशदान जमा करने में हुई देरी के पुराने मामलों को आपसी सहमति से हल करना है, ताकि लंबे समय से चल रहे कानूनी और प्रशासनिक गतिरोध को समाप्त किया जा सके।
विशेष दरों पर होगी हर्जाने की गणना
योजना के प्रावधानों के अनुसार 14 जून 2024 से पहले के मामलों में विलंब की अवधि के आधार पर हर्जाने की गणना कम दरों पर की जाएगी। इस प्रक्रिया में देरी के समय के मुताबिक 0.25 प्रतिशत, 0.50 प्रतिशत और 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से पेनल्टी तय की जाएगी। इसे सभी संस्थानों के लिए एक समान रूप से 45 प्रतिशत की सीधी छूट मानना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा, क्योंकि गणना पूरी तरह से देरी की अवधि पर निर्भर करती है।
इन चार श्रेणियों के मामलों को मिलेगा लाभ
यह सुविधा मुख्य रूप से चार अलग-अलग तरह की परिस्थितियों में फंसी कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें वे संस्थान शामिल हैं जिनके खिलाफ पेनल्टी से जुड़ा कोई भी मामला किसी भी अदालत में विचाराधीन है। इसके अलावा जिन मामलों में पेनल्टी का औपचारिक आदेश जारी हो चुका है लेकिन पूरी राशि की वसूली अभी तक नहीं हो पाई है, वे भी इसके दायरे में आते हैं। जिन प्रतिष्ठानों को केवल नोटिस मिला है लेकिन अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है, तथा जिन मामलों में अभी तक नोटिस भी जारी नहीं किया गया है, वे भी इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं।
ब्याज भुगतान और लिखित हलफनामा है अनिवार्य
इस योजना का लाभ उठाने के लिए कंपनियों को कुछ जरूरी शर्तों का पालन करना होगा। आवेदन दाखिल करने से पहले संस्थान को संबंधित अवधि का पूरा ब्याज धारा 7Q के प्रावधानों के तहत अनिवार्य रूप से जमा कराना होगा। इसके साथ ही नियोक्ता को यह लिखित आश्वासन देना होगा कि एक बार समझौता हो जाने के बाद वह इस मामले को लेकर भविष्य में किसी भी अदालत या मंच पर आगे अपील दायर नहीं करेगा।
किन्हें नहीं मिलेगा इस योजना का फायदा
कुछ विशेष परिस्थितियों में संस्थानों को इस योजना के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। जिन प्रतिष्ठानों से पेनल्टी की शत-प्रतिशत राशि की वसूली पहले ही की जा चुकी है, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा धोखाधड़ी, वित्तीय गबन या रिकॉर्ड्स में जानबूझकर छेड़छाड़ और गड़बड़ी करने वाले मामलों को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है। जो संस्थान निर्धारित ब्याज का भुगतान करने से असमर्थ या अनिच्छुक हैं, वे भी इसके पात्र नहीं माने जाएंगे।
ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करना होगा आवेदन
पात्र और इच्छुक कंपनियों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन माध्यम से प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए नियोक्ताओं को ईपीएफओ के आधिकारिक एम्प्लॉयर पोर्टल पर लॉगिन करके विश्वास मॉड्यूल के जरिए अपना आवेदन दर्ज कराना होगा। आवेदन पत्र को संस्थान के अधिकृत व्यक्ति के डिजिटल हस्ताक्षर या ई-साइन के माध्यम से ही जमा करना अनिवार्य है। अधिकारियों द्वारा जांच और स्वीकृति मिलने के बाद संशोधित पेनल्टी की राशि की जानकारी दी जाएगी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने और निर्धारित भुगतान हो जाने के बाद विभाग की तरफ से आधिकारिक निपटारे का प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा।


















