वेस्टइंडीज ने दूसरे टेस्ट पर कसा शिकंजा, केवम होज के नाबाद शतक से मजबूत स्थितिप्रियंका चोपड़ा ने लॉस एंजिल्स में मनाई शानदार दिवाली, गजरे और मांगटीका में देसी अंदाज पर टिकी सबकी नजरेंडेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला टीकों का अंतिम परीक्षण शुरू, सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन भी शामिलदिवाली की सफाई में सीलिंग फैन को आसानी से चमकाने के आसान टिप्सदीवाली की रात जम्मू के ऐतिहासिक नेहरू बाजार में लगी भीषण आग, मची अफरा-तफरीसमस्तीपुर के चमन लाल के रसकदम के स्वाद का राज आया सामने, रोजाना दो क्विंटल दूध से होती है तैयारीअमिताभ बच्चन की सेहत बिगड़ी, कौन बनेगा करोड़पति 18 की शूटिंग रुकीत्योहारों से पहले सहारनपुर मंडल में भारी चीनी स्टॉक, कीमतों में उछाल की आशंका खारिजलाल चौक से स्वर्ण मंदिर तक रोशनी में डूबा देश, दिल्ली में प्रदूषण ने बढ़ाई चिंतादेशभर में दिवाली की धूम, रोशनी से सजे ऐतिहासिक स्थल और बॉर्डर पर तैनात जवानों ने मनाया जश्न
समस्तीपुर के चमन लाल के रसकदम के स्वाद का राज आया सामने, रोजाना दो क्विंटल दूध से होती है तैयारीखानपान
9 नव॰ 2026, 12:25 am (2 मिनट पहले)· 0

समस्तीपुर के चमन लाल के रसकदम के स्वाद का राज आया सामने, रोजाना दो क्विंटल दूध से होती है तैयारी

बिहार के समस्तीपुर में मशहूर चमन लाल के रसकदम की लोकप्रियता और उसकी अनूठी रेसिपी का खुलासा हो गया है। शुद्ध दूध से पारंपरिक तरीके से बनने वाली इस मिठाई का एक पीस 25 रुपये में बिकता है।

बिहार के मिष्ठान्न प्रेमियों के बीच रसकदम का नाम आते ही मुंह में पानी आ जाता है, लेकिन जब बात समस्तीपुर के चमन लाल के रसकदम की होती है तो दीवानगी कुछ अलग ही स्तर पर पहुंच जाती है। लोगों के मन में हमेशा यह उत्सुकता बनी रहती है कि इस मिठाई में ऐसा क्या जादू है जो खाने वालों को बार-बार दुकान की ओर खींच लाता है। इसी रहस्य से पर्दा उठाने के लिए जब हकीकत टटोली गई तो दुकान पर काम करने वाले कारीगर संतोष कुमार राय ने इसकी खासियतों से पर्दा उठाया और बताया कि असली स्वाद के पीछे शुद्धता का सबसे बड़ा हाथ है।

दूध से लेकर खोवा और छेना बनाने की पूरी विधि

बाजार में मिलने वाली कई मिठाइयों के विपरीत यहां रेडीमेड खोवा या छेना बाहर से नहीं खरीदा जाता है। दुकान पर ही गाय और भैंस के दूध को आपस में मिलाकर शुद्ध खोवा तैयार किया जाता है और किसी भी तरह की मिलावट से पूरी तरह परहेज किया जाता है। कारीगर संतोष कुमार राय का मानना है कि बेहतरीन मिठाई वही है जिसके कच्चे माल में कोई मिलावट न हो और इसी परंपरा का पालन यहां शुरुआती दौर से ही किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें

रसकदम तैयार करने की प्रक्रिया बेहद दिलचस्प और पारंपरिक है। सबसे पहले एक बड़े बर्तन में दूध को उबाला जाता है और उसे लगातार आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक वह गाढ़ा होकर खोवा न बन जाए और उसमें एक खास लालिमा न आ जाए। इसके बाद इस तैयार खोवा में चीनी मिलाकर अच्छी तरह भुना जाता है और फिर इसे ठंडा होने के लिए कुछ देर छोड़ दिया जाता है। स्वाद को और अधिक बढ़ाने के लिए इसमें इलायची पाउडर भी मिलाया जाता है।

इस तरह तैयार होती है रसकदम की फाइनल शेप

खोवा तैयार होने के ठीक समांतर प्रक्रिया में दूसरे बर्तन में दूध को फाड़कर ताजा छेना बनाया जाता है। इस छेना को हाथों से अच्छी तरह मसलकर छोटी-छोटी गोलियों का आकार दिया जाता है। इसके बाद खोवा की एक परत हाथ में ली जाती है और उसके बिल्कुल बीच में छेना की गोली को सुरक्षित रखा जाता है। चारों तरफ से खोवा को अच्छी तरह लपेटकर इसे पूरी तरह गोल आकार दिया जाता है।

मिठाई को अंतिम रूप देते समय इसके बाहरी हिस्से पर पोस्ता दाना लगाया जाता है, जिसके बाद चमन लाल का यह स्पेशल रसकदम बनकर पूरी तरह तैयार हो जाता है। कारीगर का यह भी कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान खोवा और छेना का सही अनुपात बनाए रखना बहुत जरूरी होता है क्योंकि थोड़ी सी भी चूक मिठाई के स्वाद और बनावट दोनों को बिगाड़ सकती है।

प्रतिदिन दो क्विंटल दूध की खपत और कीमत

इस मशहूर रसकदम की मांग और लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे बनाने में प्रतिदिन दो क्विंटल से अधिक दूध की खपत होती है। इतनी भारी मात्रा में मिठाई बनने के बावजूद कई बार शाम ढलते-ढलते दुकान का पूरा स्टॉक खाली हो जाता है। कीमत की बात करें तो यह लजीज मिठाई लगभग 600 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेची जाती है, जबकि ग्राहक चाहें तो इसे 25 रुपये प्रति पीस के हिसाब से भी खरीद सकते हैं।

कारीगर बताते हैं कि इसकी शुद्धता और अनोखा स्वाद ही है जो ग्राहकों को दूर-दूर से खींचकर यहां लाता है। कई खरीदार तो ऐसे हैं जो नियमित रूप से इस दुकान पर आते हैं और बिना रसकदम खरीदे नहीं लौटते हैं, जिससे इस पुरानी दुकान की साख आज भी उतनी ही मजबूत बनी हुई है।

सवाल-जवाब

चमन लाल का रसकदम किस शहर में प्रसिद्ध है?
चमन लाल का रसकदम बिहार के समस्तीपुर में बेहद प्रसिद्ध है।
रसकदम बनाने के लिए किस प्रकार के दूध का उपयोग होता है?
इसे तैयार करने के लिए गाय और भैंस के दूध को मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है।
चमन लाल के रसकदम की कीमत क्या है?
यह मिठाई लगभग 600 रुपये प्रति किलोग्राम और 25 रुपये प्रति पीस की दर से बिकती है।
रोजाना कितने दूध की खपत होती है?
रसकदम बनाने में रोजाना दो क्विंटल से अधिक दूध का इस्तेमाल किया जाता है।
इस मिठाई की क्या मुख्य विशेषता है?
इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी शुद्धता है क्योंकि इसमें रेडीमेड खोवा या छेना नहीं खरीदा जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp