महाराजगंज में घर में रखे हेलमेट में छिपे सांप ने ली 11 साल के बच्चे की जान, मां भी घायलबुलियन बाजार में 6 सितंबर को शांति, जानें फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी से सोने-चांदी पर मंडरा रहा खतरापश्चिम बंगाल में रास्ता पार करते सियार से टकराई बाइक, होम ट्यूटर अमित कुमार कोले की मौतमिस्र की चर्चित टीवी होस्ट सारा खलीफा समेत 12 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई33000 फीट की ऊंचाई पर भड़का यात्री, अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट की करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंगइंडो-रशियन राइफल्स से हाथ मिलाकर अडाणी डिफेंस बनाएगी AK-203 राइफल का गोला-बारूद, 5 साल का करारपश्चिम बंगाल में शिक्षक की दरियादिली से 13 साल बाद छात्र को मिली नजर, शिक्षक दिवस पर छलक आए पिता के आंसूजालोर के वार्ड 10 में शेरू खान का गाने गाकर वोट मांगने का अंदाज सोशल मीडिया पर छायावाराणसी में पानी पर चलती दो पहिया नाव को लेकर अखिलेश यादव का तंजमिलावटी शहद पहचानने के लिए FSSAI के ये टेस्ट आएंगे काम, जानें खरीदते समय क्या देखें
इंडो-रशियन राइफल्स से हाथ मिलाकर अडाणी डिफेंस बनाएगी AK-203 राइफल का गोला-बारूद, 5 साल का करारव्यापार
6 सित॰ 2026, 12:07 pm (17 मिनट पहले)· 2

इंडो-रशियन राइफल्स से हाथ मिलाकर अडाणी डिफेंस बनाएगी AK-203 राइफल का गोला-बारूद, 5 साल का करार

अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ पांच साल के लिए करार किया है, जिसके तहत वह देश में बन रही AK-203 राइफल के लिए 7.62x39 मिमी गोला-बारूद की सप्लाई करेगी।

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ पांच साल का करार किया है। इस करार के तहत अडाणी डिफेंस देश में तैयार हो रही AK-203 राइफल के लिए 7.62x39 मिमी गोला-बारूद की सप्लाई करेगी, जिसका निर्माण भी भारत में ही होगा। इस डील का मकसद भारत-रूस राइफल प्रोजेक्ट के लिए पूरी तरह से घरेलू सप्लाई चेन खड़ी करना है, ताकि राइफल हो या उसका गोला-बारूद, दोनों के लिए देश बाहर पर निर्भर न रहे।

पांच साल तक होगी गोला-बारूद की सप्लाई

कंपनी की जानकारी के मुताबिक, इस करार के तहत अडाणी डिफेंस अगले पांच वर्षों तक AK-203 प्रोजेक्ट के लिए जरूरी छोटे हथियारों के गोला-बारूद की आपूर्ति करती रहेगी। इससे इस पूरे प्रोग्राम को भारत में ही एक भरोसेमंद सप्लाई सोर्स मिलेगा, जिससे कॉन्ट्रैक्ट की पूरी अवधि के दौरान गोला-बारूद की उपलब्धता में कोई रुकावट नहीं आएगी। खास बात यह है कि इस डील से राइफल बनाने का काम और गोला-बारूद तैयार करने का काम, दोनों अब एक ही प्रोग्राम के भीतर आपस में जुड़ गए हैं, जिससे पूरी सप्लाई चेन का प्रबंधन आसान होगा।

ये भी पढ़ें

अमेठी के कोरवा प्लांट में बन रही है राइफल

राइफल का निर्माण इंडो-रशियन राइफल्स यानी IRRPL कर रही है, जबकि गोला-बारूद बनाने की जिम्मेदारी अब अडाणी डिफेंस के पास होगी। IRRPL को साल 2019 में भारत और रूस के बीच हुए अंतर-सरकारी समझौते के तहत खास तौर पर भारतीय सशस्त्र बलों के लिए AK-203 राइफल बनाने के मकसद से स्थापित किया गया था। इसकी फैक्ट्री उत्तर प्रदेश में अमेठी जिले के कोरवा नामक स्थान पर स्थित है। इस ज्वाइंट वेंचर में भारत की तरफ से एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड हिस्सेदार हैं, वहीं रूस की तरफ से कंसर्न कलाश्निकोव और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट इसमें शेयरहोल्डर हैं। यानी राइफल के डिजाइन से लेकर उसकी मैन्युफैक्चरिंग तक, दोनों देशों की कंपनियां इस प्रोजेक्ट में साझीदार हैं।

2021 में सरकार ने दिया था छह लाख से ज्यादा राइफल का ऑर्डर

रक्षा मंत्रालय ने AK-203 राइफल के स्वदेशी निर्माण के लिए IRRPL को ही अधिकृत ज्वाइंट वेंचर के तौर पर चुना है। दिसंबर 2021 में सरकार ने इस कंपनी के साथ 6,01,427 राइफलों के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था और ये सभी राइफलें कोरवा स्थित प्लांट में ही तैयार होनी हैं। इतनी बड़ी तादाद में राइफल तैयार होने के बाद उनके लिए लगातार गोला-बारूद की जरूरत भी बनी रहेगी, यही वजह है कि अब इसकी सप्लाई के लिए भी अलग से करार किया गया है। दूसरी ओर अडाणी डिफेंस पहले से ही भारत में छोटे हथियारों के गोला-बारूद बनाने की क्षमता विकसित कर चुकी है। इसके अलावा कंपनी का एक और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट कानपुर में भी मौजूद है, जहां पहले से ही इस तरह के गोला-बारूद का उत्पादन होता रहा है।

हाल ही में बनी थी पहली पूरी तरह स्वदेशी राइफल शेर

कुछ समय पहले ही शेर नाम की पहली ऐसी AK-203 राइफल तैयार हुई थी, जो पूरी तरह भारतीय पुर्जों और सामग्री से बनी है, और उसका सफलतापूर्वक टेस्ट-फायर भी किया गया। IRRPL के CEO और MD मेजर जनरल एस. के. शर्मा ने इस मौके पर कहा, "ये IRRPL में हम सभी के लिए बहुत गर्व का पल है।" उन्होंने आगे बताया कि पूरी तरह भारतीय सामग्री से बनी इस पहली राइफल को सफलतापूर्वक तैयार करके उसका परीक्षण भी किया जा चुका है। राइफल के बाद अब गोला-बारूद के लिए भी घरेलू सप्लाई चेन तैयार होने से पूरा AK-203 कार्यक्रम धीरे-धीरे पूरी तरह स्वदेशी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सवाल-जवाब

अडाणी डिफेंस और इंडो-रशियन राइफल्स के बीच क्या करार हुआ है?
अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 5 साल के लिए AK-203 राइफल के लिए 7.62x39 मिमी गोला-बारूद की सप्लाई का करार किया है।
राइफल कौन बना रहा है और गोला-बारूद कौन बनाएगा?
राइफल इंडो-रशियन राइफल्स यानी IRRPL बना रही है, जबकि गोला-बारूद अडाणी डिफेंस बनाएगी।
IRRPL का प्लांट कहां स्थित है?
IRRPL का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में स्थित है।
सरकार ने कितनी AK-203 राइफल के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया था?
सरकार ने दिसंबर 2021 में 6,01,427 AK-203 राइफल की मैन्युफैक्चरिंग के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया था।
IRRPL में किन कंपनियों की हिस्सेदारी है?
भारत की तरफ से एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड, जबकि रूस की तरफ से कंसर्न कलाश्निकोव और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट इसमें शेयरहोल्डर हैं।
हाल ही में कौन-सी नई राइफल तैयार हुई थी?
हाल ही में 100 प्रतिशत भारतीय पुर्जों से बनी पहली AK-203 राइफल शेर सफलतापूर्वक तैयार और टेस्ट-फायर की गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR