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गया के गांवों में गहराया जल संकट, किसान और ग्रामीण नदी के बीच बोरिंग करने को मजबूरव्यापार
28 जून 2026, 12:28 pm (45 दिन पहले)· 6

गया के गांवों में गहराया जल संकट, किसान और ग्रामीण नदी के बीच बोरिंग करने को मजबूर

बिहार के गया जिले के कई गांवों में भीषण जल संकट के कारण लोग सूखे नदी के बीच बोरिंग कराने को मजबूर हैं। धान की बुवाई और दैनिक जरूरतों के लिए ग्रामीण 1 किलोमीटर दूर तक पाइप बिछा रहे हैं।

गया जिले के कई हिस्सों में इन दिनों गंभीर जल संकट की स्थिति बनी हुई है। गर्मी का मौसम खत्म होने के बावजूद पानी की किल्लत कम नहीं हुई है, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन दूभर हो गया है। विशेष रूप से डुमरिया और इमामगंज प्रखंड के इलाकों में स्थिति काफी नाजुक है। मैगरा, मैरा, सिद्धपुर और झिकटिया समेत लगभग 12 गांवों में ग्रामीणों को पानी के एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यह समस्या उस समय और गंभीर हो जाती है जब खेती के लिए पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

खेती के लिए नदी बनी एकमात्र सहारा

इस समय धान का बीज डालने का सीजन चल रहा है, लेकिन पानी की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। सोरहर नदी पूरी तरह से सूख चुकी है, जिसके कारण किसान अब नदी के बीचों-बीच बोरिंग कराने को मजबूर हैं। वहां से लंबी पाइपलाइन बिछाकर 500 से 1000 मीटर दूर स्थित अपने खेतों और घरों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। मोटर की मदद से निकाले गए इस पानी के जरिए ही धान के बिचड़े को जीवित रखने का प्रयास किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल किसानों बल्कि सामान्य निवासियों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।

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भूजल स्तर में भारी गिरावट

क्षेत्र में पानी का जलस्तर इतना नीचे गिर गया है कि अधिकांश सरकारी चापाकल पूरी तरह से बेकार हो चुके हैं। मैगरा बाजार जैसे इलाकों में सालों से पेयजल का संकट व्याप्त है। कई संपन्न लोगों ने अपने निजी स्तर पर हजारों रुपए खर्च करके बोरिंग कराई थी, लेकिन उन्हें भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया। बोरिंग के असफल होने का एक प्रमुख कारण जमीन की बनावट है, जहां 15 फीट खुदाई के बाद ही कड़ी चट्टानें निकल आती हैं, जिसके आगे पानी का मिलना असंभव सा हो जाता है।

क्या कहते हैं स्थानीय निवासी?

झिकटिया गांव के निवासी महावीर रजक ने बताया कि आसपास के कई गांवों में पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। खेती का समय निकल रहा है और जलस्तर नीचे होने के कारण बोरिंग भी फेल हो रही है। इस इलाके के दर्जनों परिवार अब सुबह-शाम सोरहर नदी के पास जाकर अपनी जरूरतों के लिए पानी इकट्ठा करते हैं। यह नदी अब इन लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह काम कर रही है, क्योंकि घरों में पानी की आपूर्ति के अन्य स्रोत लगभग समाप्त हो चुके हैं।

वर्षों पहले टूटा बांध बना मुसीबत की जड़

ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 10 से 12 साल पहले मैरा गांव के पास सोरहर नदी में पानी को रोकने के लिए एक पत्थर का बांध बनाया गया था। हालांकि, समय के साथ पानी के तीव्र बहाव के कारण वह बांध क्षतिग्रस्त होकर बह गया। तब से आज तक उस स्थान पर किसी भी प्रकार का निर्माण या मरम्मत कार्य नहीं किया गया है। बांध के टूटने के कारण नदी में पानी का संचयन नहीं हो पाता, जिसका खामियाजा आज इस क्षेत्र के किसानों और आम जनता को उठाना पड़ रहा है।

सवाल-जवाब

गया के किन क्षेत्रों में पानी की सबसे अधिक समस्या है?
डुमरिया और इमामगंज प्रखंड के मैगरा, मैरा, झिकटिया और सिद्धपुर समेत लगभग 12 गांवों में पानी का भारी संकट है।
ग्रामीण पानी के लिए किसका उपयोग कर रहे हैं?
ग्रामीण सूखी सोरहर नदी के बीचों-बीच बोरिंग कर रहे हैं और वहां से पाइपलाइन के जरिए पानी खेतों और घरों तक ला रहे हैं।
बोरिंग करने में क्या दिक्कत आ रही है?
जमीन में 15 फीट की गहराई के बाद कठोर पत्थर मिलते हैं, जिससे बोरिंग असफल हो जाती है और पानी नहीं निकल पाता।
नदी पर बांध क्यों नहीं है?
मैरा गांव के पास 10-12 साल पहले बना पत्थर का बांध पानी के तेज बहाव में टूट गया था और उसके बाद से वहां कोई मरम्मत कार्य नहीं हुआ।
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