ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण की औपचारिक शुरुआत हो गई है। 25 सितंबर से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस चार दिवसीय आयोजन का मकसद राज्य के औद्योगिक सामर्थ्य और स्थानीय शिल्प को दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचाना है। उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कारीगरों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र और विनिर्माण तंत्र पर विशेष जोर दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक तकनीक के सटीक तालमेल के सहारे देश के अग्रणी विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है।
पारंपरिक कौशल को वैश्विक पहचान और ओडीओपी की भूमिका
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की जमीनी शिल्प परंपरा को मिले नए प्रोत्साहन की पृष्ठभूमि साझा की। उन्होंने याद किया कि वर्ष 2017 में चुनावी घोषणा पत्र तैयार करने के दौर में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते अमित शाह ने स्थानीय कारीगरी की पहचान उजागर करने पर बल दिया था। उनका मानना था कि राज्य की अंतर्निहित शक्ति उसके पारंपरिक उद्योगों में बसी है और सही दिशा मिलते ही उत्पादन क्षेत्र में प्रदेश अभूतपूर्व ऊंचाई छू सकता है। इसी दृष्टिकोण को लागू करते हुए प्रदेश सरकार ने 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' और 'वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन' जैसी योजनाओं के जरिए जिले-वार विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक ब्रांडिंग और सीधे वाणिज्यिक अवसर उपलब्ध कराए हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार इस रणनीति ने सदियों पुराने क्षेत्रीय व्यवसायों को नया जीवन दिया है और स्थानीय उत्पादकों को बिचौलियों से मुक्त कर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ा है।
मेक इन इंडिया अभियान और बदलता निवेश परिदृश्य
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के समग्र विनिर्माण परिदृश्य पर बात रखी। उन्होंने बताया कि 12 वर्ष पूर्व शुरू किए गए मेक इन इंडिया मिशन ने देश को डिजाइन, विनिर्माण और नवाचार का एक मजबूत वैश्विक केंद्र बनाने में आधारभूत भूमिका निभाई है। राज्य के संदर्भ में उन्होंने बीते समय की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक दौर में सुरक्षा और व्यवस्था की चिंताओं के चलते प्रदेश के लिए निवेश बैठकें दिल्ली में आयोजित करनी पड़ती थीं।
उन्होंने कहा कि अब बेहतर कानून-व्यवस्था, उद्योग समर्थक नीतियों और प्रशासनिक सक्रियता के बल पर राज्य खुद बड़े पूंजी निवेश का मुख्य केंद्र बन चुका है। पिछले व्यापार मेले की उपलब्धियों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उस संस्करण में 5 लाख से अधिक आगंतुक पहुंचे थे और 2,400 से अधिक सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए थे। उन्होंने भरोसा जताया कि मौजूदा चौथा संस्करण पुराने सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के संकल्प को नई गति देगा।
विदेशी भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां
इस वर्ष व्यापार प्रदर्शनी के अंतरराष्ट्रीय आयाम में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। पिछले आयोजन में 72 देशों से 550 अंतरराष्ट्रीय खरीदार पहुंचे थे, जबकि इस बार भागीदारी बढ़कर 90 देशों के 600 से अधिक खरीदारों तक पहुंच गई है। इसके अलावा लगभग 1.5 लाख बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि कई प्रमुख राष्ट्र इस मंच पर भागीदार देश के रूप में शामिल हुए हैं। इनमें वियतनाम, जापान, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस प्रमुख हैं। इन देशों के समर्पित पवेलियन द्विपक्षीय व्यापार समझौतों, तकनीकी हस्तांतरण और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारियों को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

















