स्मार्टफोन में मौजूद पुरानी तस्वीरों को देखकर अपने रोजमर्रा के कपड़ों को व्यवस्थित करना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान होने जा रहा है। गूगल ने अपने फोटो प्लेटफॉर्म पर एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फीचर पूरी तरह जारी कर दिया है, जो आपकी तस्वीरों में दिखने वाले कपड़ों को पहचानकर एक वर्चुअल क्लोसेट यानी डिजिटल अलमारी में बदल देता है। 90 के दशक की मशहूर हॉलीवुड फिल्म 'क्लूलेस' में मुख्य किरदार शेर के पास मौजूद हाई-टेक डिजिटल वार्डरोब से मिलता-जुलता यह कॉन्सेप्ट अब असल जिंदगी में स्मार्टफोन यूजर्स के हाथों में पहुंच चुका है। कंपनी ने इसे भारत, अमेरिका और ब्राजील के सभी एंड्रॉयड और आईओएस उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध करा दिया है।
कपड़ों की तस्वीरों से खुद तैयार होगा डिजिटल वार्डरोब
फिल्म 'क्लूलेस' में दिखाया गया डिजिटल वार्डरोब का विचार एक बेहद अमीर बेवर्ली हिल्स टीनेजर की भव्य जीवनशैली को दर्शाने के लिए पेश किया गया था, जिसके पास इतने कपड़े थे कि उन्हें संभालने के लिए कंप्यूटर स्क्रीन की जरूरत पड़ती थी। अब आम स्मार्टफोन यूजर भी उसी तरह की तकनीक का फायदा उठा सकते हैं। गूगल का एआई सिस्टम आपकी लाइब्रेरी में मौजूद उन तस्वीरों का विश्लेषण करता है जिनमें आपने कपड़े पहने हुए हैं। यह तकनीक उन कपड़ों की एक डिजिटल नकल तैयार कर देती है, जिसे ऐप के अंदर एक व्यवस्थित अलमारी की तरह देखा जा सकता है।
कैटेगरी फिल्टर और मिक्स-मैच करने की सुविधा
इस फीचर के जरिए यूजर अपने परिधानों को अलग-अलग श्रेणियों में छांट सकते हैं। ऐप में टॉप्स, बॉटम्स, गहने और अन्य फैशन एक्सेसरीज जैसे फिल्टर दिए गए हैं। यूजर इन अलग-अलग श्रेणियों में से कपड़ों को चुनकर आपस में मिला सकते हैं, जिससे बिना अलमारी से कपड़े निकाले ही नए आउटफिट कॉम्बिनेशन बनाकर देखे जा सकते हैं कि कौन सी ड्रेस किसके साथ बेहतर लगेगी। सुरक्षा और निजता के मसले पर गूगल ने स्पष्ट किया है कि यह फीचर सिर्फ यूजर की निजी सुविधा के लिए बनाया गया है। आपके पहनावे और कपड़ों से जुड़ा कोई भी डेटा रिटेलर्स या किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं किया जाता है।
रोलआउट का दायरा और जेमिनी स्पार्क के नए टूल्स
गूगल ने इस साल की शुरुआत में इस वर्चुअल क्लोसेट फीचर की घोषणा की थी और गर्मियों में इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की योजना बनाई थी। एंड्रॉयड यूजर्स को इसका शुरुआती एक्सेस जून में दिया गया था, और अब यह सपोर्टेड मार्केट्स में आईओएस डिवाइसों पर भी पूरी तरह एक्टिव हो चुका है। इस बड़े रोलआउट के साथ ही गूगल फोटोज में कई अन्य महत्वपूर्ण संपादन टूल्स भी शामिल किए गए हैं। इनमें जेमिनी स्पार्क की मदद से केवल एक प्रॉम्प्ट लिखकर तस्वीरों को सिलेक्ट करने, ब्राइट बनाने और सीधे शेयर करने की सुविधा दी गई है। हालांकि अमेरिका में जेमिनी स्पार्क आधारित इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए गूगल एआई प्रो या अल्ट्रा सब्सक्रिप्शन होना आवश्यक है।
मार्कअप में प्राइवेसी पेन और एंड्रॉयड के लिए नए मूड्स फिल्टर
तस्वीरों को एडिट करने के लिए दिए जाने वाले मार्कअप टूल को भी काफी बेहतर बनाया गया है। इसमें एक नया रिडैक्टिंग पेन जोड़ा गया है, जिसकी मदद से यूजर गाड़ी की नंबर प्लेट या अन्य संवेदनशील निजी जानकारियों को आसानी से धुंधला यानी ब्लर कर सकते हैं। इसके अलावा अपनी पसंद के हिसाब से स्केच बनाने के लिए सटीक मोटाई वाले स्लाइडर्स और टेक्स्ट जोड़ते समय कई नए फॉन्ट्स चुनने का विकल्प भी दिया गया है। एआई की मदद से फोटो का रूप बदलने वाले रीमिक्स टेम्पलेट्स की संख्या भी बढ़ाई गई है। इसके साथ ही एंड्रॉयड यूजर्स के लिए 'मूड्स' नाम से खास फोटो फिल्टर्स पेश किए गए हैं, जो तस्वीरों को 35एमएम फिल्म और 2000 के दशक के डिजिटल कैमरे जैसा विंटेज लुक देते हैं।



















