वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में इस हफ्ते ब्रिटिश पाउंड प्रमुख मुद्राओं की तुलना में कमजोर प्रदर्शन दर्ज कर रहा है। वित्तीय बाजारों में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा मौद्रिक सख्ती को लेकर जो आक्रामक अनुमान लगाए जा रहे थे, विश्लेषकों ने उनकी व्यावहारिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रुख के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है और पाउंड स्टर्लिंग में चौतरफा बिकवाली देखने को मिल रही है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक सख्ती के अनुमानों पर विशेषज्ञों का रुख
मौजूदा समय में डेरिवेटिव्स और मुद्रा बाजार एक साल की समयसीमा में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा 25 बेसिस पॉइंट्स यानी 0.25 प्रतिशत की चार ब्याज दर वृद्धियों की संभावना मानकर चल रहे हैं। इसके विपरीत, विश्लेषकों का मानना है कि यूनाइटेड किंगडम की आर्थिक स्थिति इतनी अधिक दर वृद्धियों का समर्थन नहीं करती। ब्राउन ब्रदर्स हैरिमन के विश्लेषकों का आकलन है कि यूके की अर्थव्यवस्था पहले से ही अपनी पूर्ण क्षमता से नीचे काम कर रही है।
वर्तमान में बैंक ऑफ इंग्लैंड की बैंक दर 3.75 प्रतिशत पर स्थिर है। यह स्तर केंद्रीय बैंक के अनुमानित 2 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के तटस्थ ब्याज दर दायरे के ऊपरी छोर के बेहद करीब है। इसके अतिरिक्त, यूके सरकार की राजकोषीय नीति आने वाले दिनों में अधिक सख्त और प्रतिबंधात्मक होने की संभावना है। जब आर्थिक विकास धीमा हो, मौजूदा दरें पहले से ही तटस्थ दायरे के शीर्ष पर हों और सरकारी खर्च पर नियंत्रण हो, तो केंद्रीय बैंक के लिए आक्रामक रूप से दरों को बढ़ाना व्यावहारिक नहीं माना जाता। यही मुख्य कारण है कि बाजार अब बैंक ऑफ इंग्लैंड से जुड़ी अति-आक्रामक उम्मीदों को घटा रहा है, जिसका सीधा असर पाउंड पर पड़ रहा है।
तकनीकी विश्लेषण और पाउंड बनाम डॉलर का स्तर
मुद्रा बाजार में पाउंड बनाम अमेरिकी डॉलर यानी GBP/USD 1.3224 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार यह जोड़ी 1.32 के निकट स्थिर बनी हुई है, जो पिछले बंद स्तर से 0.05 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इस मुद्रा जोड़ी का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है।
दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेतकों का अध्ययन करने से पता चलता है कि यह जोड़ी स्पष्ट रूप से 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी 1.3402 से नीचे बनी हुई है। जब तक हाजिर कीमत इस अहम ट्रेंड इंडिकेटर के नीचे रहती है, तब तक बिकवाली करने वालों का पलड़ा भारी रहेगा। यदि तेजी की शुरुआत करनी है, तो खरीदारों को सबसे पहले 1.3402 पर स्थित इस 20-दिवसीय ईएमए को फिर से हासिल करना होगा, ताकि मौजूदा मंदी के दबाव को कम किया जा सके और एक मजबूत रिकवरी का रास्ता साफ हो सके।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 25 के स्तर तक गिर चुका है, जो यह दर्शाता है कि दैनिक चार्ट पर यह जोड़ी ओवरसोल्ड जोन में प्रवेश कर चुकी है। ओवरसोल्ड आरएसआई आमतौर पर यह संकेत देता है कि गिरावट की गति जरूरत से ज्यादा खिंच चुकी है, लेकिन यह अपने आप में ट्रेंड रिवर्सल की गारंटी नहीं देता। इसके अलावा, 14-दिवसीय आरएसआई लाइव स्तर 26 पर है, जबकि एमएसीडी -0.01 पर बना हुआ है, जो इसके सिग्नल स्तर -0.00 से नीचे नकारात्मक गति को दिखाता है। बॉलिंगर बैंड्स (20, 2) का दायरा 1.33 से 1.37 के बीच है, जिसमें मौजूदा भाव निचले बैंड के नीचे फिसल गया है। औसत डायरेक्शनल इंडेक्स 30 पर एक मजबूत रुझान की पुष्टि कर रहा है। वर्तमान संरचना में नजदीकी सपोर्ट स्तरों की कमी के कारण, यदि 1.32 के पिवट स्तर से नीचे और गिरावट होती है, तो यह जोड़ी तकनीकी रूप से नए निचले स्तरों की ओर बढ़ सकती है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतियां और मुद्रा पर प्रभाव
यूनाइटेड किंगडम के लिए संपूर्ण मौद्रिक नीति का निर्धारण बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा किया जाता है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक और मुख्य वैधानिक लक्ष्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत वह मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर को 2 प्रतिशत के वार्षिक स्तर पर स्थिर रखने का प्रयास करता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार बेस लेंडिंग रेट में बदलाव करना होता है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड वह ब्याज दर तय करता है जिस पर वह वाणिज्यिक बैंकों को धन उधार देता है और जिस पर बैंक आपस में लेन-देन करते हैं। यह आधार दर पूरे देश की अर्थव्यवस्था में कर्ज और बचत पर ब्याज दरों के सामान्य स्तर को सीधे तौर पर निर्धारित करती है, जिससे अंततः पाउंड स्टर्लिंग का विदेशी मुद्रा मूल्य भी तय होता है।
जब मुद्रास्फीति बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके प्रतिक्रिया देता है। ब्याज दरों के बढ़ने से आम नागरिकों और व्यापारिक घरानों के लिए बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है और महंगाई पर लगाम लगती है। विदेशी मुद्रा बाजार के नजरिए से यह पाउंड स्टर्लिंग के लिए सकारात्मक होता है, क्योंकि उच्च ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को यूके के परिसंपत्ति बाजारों में पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई लक्ष्य से नीचे गिर जाती है, तो यह इस बात का संकेत होता है कि आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को घटाकर कर्ज सस्ता करने का प्रयास करता है ताकि उद्योग-धंधे विस्तार के लिए उधार ले सकें, जो सामान्यतः पाउंड स्टर्लिंग की विनिमय दर के लिए नकारात्मक माना जाता है।
क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का तंत्र
अत्यधिक आर्थिक संकट या असामान्य परिस्थितियों में, जब केवल ब्याज दरों में कटौती करने से अर्थव्यवस्था में तरलता नहीं लौटती, तब बैंक ऑफ इंग्लैंड क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा लेता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग एक अंतिम उपाय वाली मौद्रिक नीति है, जिसके जरिए केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में ऋण प्रवाह को व्यापक पैमाने पर बढ़ाता है।
इस प्रक्रिया के तहत बैंक ऑफ इंग्लैंड नई नकदी का सृजन करके वाणिज्यिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड तथा ट्रिपल-ए रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है। इससे वित्तीय संस्थानों के पास नकदी बढ़ती है और वे अर्थव्यवस्था में अधिक कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। हालांकि, मुद्रा की आपूर्ति बढ़ने के कारण क्वांटिटेटिव ईजिंग से आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग की विनिमय दर कमजोर होती है।
इसके विपरीत, जब अर्थव्यवस्था मजबूती की ओर बढ़ रही हो और महंगाई दोबारा पैर पसारने लगे, तब केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी लागू करता है। यह क्वांटिटेटिव ईजिंग की पूरी तरह से उल्टी प्रक्रिया है। जहां क्यूई में बैंक ऑफ इंग्लैंड बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के तहत वह नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और पहले से खरीदे गए बॉन्डों की परिपक्वता पर मिलने वाली मूल राशि का दोबारा निवेश नहीं करता। इस प्रक्रिया से बाजार में मुद्रा की अधिकता घटती है, जो आम तौर पर पाउंड स्टर्लिंग की मजबूती में योगदान देती है।
वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां और अमेरिकी डॉलर का दबदबा
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में केवल बैंक ऑफ इंग्लैंड ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के कदम भी मुद्राओं की चाल तय कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दरों में दो और बढ़ोतरी किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताएं दोबारा बढ़ा दी हैं। इस वजह से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इन परिस्थितियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत होकर दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है, जिससे सभी प्रमुख मुद्राओं पर चौतरफा दबाव बना हुआ है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD एशियाई कारोबारी सत्र में टूटकर 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास आ गया, जो अगस्त की शुरुआत के बाद का निचला स्तर है। ओवरनाइट ट्रेडिंग में यह जोड़ी अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज से नीचे फिसल गई। यद्यपि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें लगाई जा रही थीं, परंतु मजबूत अमेरिकी डॉलर के आगे वे निष्प्रभावी साबित हुईं।
जापानी येन के मोर्चे पर, USD/JPY तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर 159.00 तक पहुंचने के बाद थोड़ा सुस्त हुआ। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप किए जाने की आशंका से कारोबारियों ने सतर्कता बरती। बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। नीति सामान्यीकरण की दिशा में यह कदम बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप था, लेकिन बैंक ऑफ जापान के समग्र रुख को देखते हुए जापानी येन में व्यापक तेजी सीमित रही। सोने की कीमतों में भी यूरोपीय सत्र के दौरान सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी डॉलर में हल्की मुनाफावसूली से सोने को थोड़ा सहारा जरूर मिला, परंतु फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और ऊंची बॉन्ड यील्ड डॉलर के पक्ष में बनी हुई हैं।
















