तेलंगाना राज्य में डेयरी उद्योग और पशुपालन का दायरा तेजी से फैल रहा है, जिसके कारण दुधारू पशुओं, घोड़ों और बकरियों के पौष्टिक चारे की मांग में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। हैदराबाद के पुराने शहर में चंद्रायणगुट्टा इलाके से पशु आहार की बड़े पैमाने पर आपूर्ति करने वाले जहीर अहमद के अनुसार, चने का भूसा या छिलका पशुओं के पोषण और पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसी वजह से डेयरी फार्म संचालक, बकरी पालक और अश्वपालक इस चारे की नियमित खरीदारी करते हैं। इस व्यवसाय को बेहद कम शुरुआती पूंजी के साथ आसानी से शुरू किया जा सकता है और रोजाना बेहतर बिक्री हासिल करके हर महीने शानदार कमाई की जा सकती है।
मिलों से सीधी खरीदारी और बोरा पैकेजिंग का मॉडल
जहीर अहमद बताते हैं कि इस कारोबार को सफलता पूर्वक चलाने के लिए दाल मिलों से सीधे टनों के हिसाब से थोक माल मंगाया जाता है। इसके बाद स्टॉक को सुरक्षित रखने के लिए छोटे गोदाम या खुले शेड का इस्तेमाल किया जाता है। माल पहुंचने पर इसे 30 किलोग्राम, 50 किलोग्राम और 1 क्विंटल के बोरों में अच्छी तरह पैक किया जाता है। अलग-अलग वजन की पैकेजिंग करने से खुदरा खरीदारों और छोटे किसानों को सामान बेचने में आसानी होती है, जिससे कारोबार का मुनाफा मार्जिन बढ़ जाता है।
निवेश, बिक्री का तरीका और शुद्ध मुनाफा
चने के भूसे का व्यापार शुरू करने के लिए लगभग 1.5 से 3 लाख रुपये की शुरुआती कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है। यदि कोई व्यापारी प्रतिदिन औसतन 1.5 से 2 टन माल या 40 से 50 बोरों की बिक्री कर लेता है, तो सभी तरह के परिचालन खर्च घटाने के बाद हर महीने 1,00,000 से 1,50,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से बचाया जा सकता है। थोक माल की सप्लाई पर प्रति टन 1,500 रुपये से 2,500 रुपये तक की बचत होती है, जबकि 30 से 50 किलो के बोरों की खुदरा बिक्री पर 15% से 25% तक का मार्जिन मिलता है।
बिक्री की लचकदार व्यवस्था और मौसमी उछाल
इस व्यापार में हर तरह के ग्राहकों की जरूरत का ध्यान रखा जाता है। जो खरीदार टनों के हिसाब से माल उठाते हैं या अपनी गाड़ी खुद भरकर ले जाते हैं, उन्हें अतिरिक्त मार्जिन दिया जाता है। वहीं छोटे पशुपालकों के लिए प्रति किलोग्राम के भाव से भी माल उपलब्ध कराया जाता है। चारे की कमी वाले मौसम और विभिन्न त्योहारों के दौरान बाजार में भूसे की मांग कई गुना बढ़ जाती है, जिससे व्यापारियों की मासिक कमाई 2,00,000 रुपये प्रति माह से भी अधिक हो जाती है।
कम जोखिम और नकद कारोबार के फायदे
पशु आहार के इस कारोबार की सबसे बड़ी खासियत इसका कम जोखिम और स्थिर बाजार मांग है। डेयरी और पशुपालन से जुड़े लोग दैनिक आधार पर चारे की खरीदारी करते हैं, जिससे यह पूरी तरह नकदी में चलने वाला धंधा बन जाता है। उधारी का जोखिम न के बराबर होने के कारण स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की तलाश कर रहे युवाओं और नए उद्यमियों के लिए यह व्यापार एक सुरक्षित और टिकाऊ अवसर प्रदान करता है।



















