प्रेडिक्शन मार्केट चलाने वाली कंपनी कैल्शी ने बुधवार को इलिनॉय राज्य के खिलाफ फेडरल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी का साफ कहना है कि राज्य सरकार को प्रेडिक्शन मार्केट पर टैक्स वसूलने का कोई कानूनी हक नहीं है। यह मुकदमा इलिनॉय के एक नए कानून को लेकर है, जो खेल से जुड़े दांव पर भारी टैक्स लगाने जा रहा है।
दरअसल, पिछले हफ्ते इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रित्ज़कर ने एक बिल पर दस्तखत कर उसे कानून बना दिया। इस कानून में जहां एक तरफ क्रिप्टो लेनदेन पर पूरे राज्य में टैक्स लगाने का प्रावधान है, वहीं दूसरी तरफ एक 'स्पोर्ट्स वेजरिंग फंड' भी बनाया गया है। यह फंड 1 जुलाई से लागू होने वाला है और इसके तहत खेल से जुड़े प्रेडिक्शन मार्केट के दांव से होने वाली कुल कमाई पर 15 प्रतिशत टैक्स वसूला जाएगा।
टकराव की असली जड़ क्या है
इस पूरे झगड़े की जड़ एक बुनियादी सवाल है, कि प्रेडिक्शन मार्केट आखिर हैं क्या। इलिनॉय का तर्क है कि खेल से जुड़े प्रेडिक्शन मार्केट दरअसल राज्य के नियंत्रण वाली स्पोर्ट्स बेटिंग का ही एक रूप हैं, इसलिए राज्य उन पर टैक्स लगा सकता है। वहीं इंडस्ट्री के बड़े नाम और डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इसके बिल्कुल उलट दलील देते रहे हैं। उनका कहना है कि ये दांव असल में स्वैप हैं, जिन पर फेडरल स्तर पर CFTC की निगरानी रहती है, राज्य की नहीं।
कैल्शी ने इसी आधार पर इलिनॉय सरकार को कोर्ट में घसीटा है। कंपनी का कहना है कि उसकी खेल से जुड़ी कमाई पर राज्य टैक्स नहीं लगा सकता, क्योंकि यह कमाई जुए से होने वाली आय के दायरे में आती ही नहीं।
कैल्शी को किस बात का डर
कैल्शी ने अपनी शिकायत में जो आशंका जताई है, वह इस लड़ाई की गंभीरता बताती है। शिकायत में लिखा है, '1 जुलाई 2026 को कैल्शी इलिनॉय में आपराधिक दंड की जद में आ जाएगी, बशर्ते वह या तो इलिनॉय के निवासियों को ऐसे स्पोर्ट्स इवेंट कॉन्ट्रैक्ट देना बंद कर दे जो उसके खास फेडरल रेगुलेटर की नजर में पूरी तरह कानूनी हैं, या फिर इलिनॉय को लाखों डॉलर चुकाए और राज्य के नियामक ढांचे के आगे झुक जाए।'
कैल्शी का यह कदम ट्रंप के CFTC की राह पर ही चल रहा है। पिछले हफ्ते CFTC ने इलिनॉय के खिलाफ पहले से चल रहे एक मुकदमे में संशोधन कर राज्य के इस नए टैक्स के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था। इतना ही नहीं, CFTC ने एक प्रारंभिक निषेधाज्ञा यानी प्रिलिमिनरी इंजंक्शन के लिए भी अर्जी दी है, ताकि इलिनॉय को अगले हफ्ते इस कानून को लागू करने से रोका जा सके।
क्रिप्टो पर भी टैक्स की मार
गौरतलब है कि इलिनॉय अब बिटकॉइन और दूसरे क्रिप्टो लेनदेन पर भी टैक्स लगाने जा रहा है, जिसे आलोचक 'सबसे ज्यादा दंडात्मक' टैक्स बताकर निशाना साध रहे हैं।
देशभर में छिड़ी है यह कानूनी जंग
इलिनॉय के इस नए टैक्स को लेकर हो रही खींचतान दरअसल एक बड़ी लड़ाई का ताजा हिस्सा भर है। पूरे अमेरिका में राज्यों और फेडरल सरकार के बीच इस बात को लेकर अधिकार क्षेत्र की जंग चल रही है कि प्रेडिक्शन मार्केट का भविष्य कौन तय करेगा। ट्रंप प्रशासन इस तेजी से बढ़ते सेक्टर के बचाव में पूरी ताकत से उतरा हुआ है। दूसरी तरफ, चाहे वह रिपब्लिकन शासित राज्य हों या डेमोक्रेट शासित, दोनों ही तर्क दे रहे हैं कि कैल्शी और इसकी प्रतिद्वंद्वी पॉलीमार्केट जैसी कंपनियां 18 साल जितने कम उम्र के ग्राहकों तक को बिना नियमन वाला जुआ परोस रही हैं।
इस मुद्दे पर इस वक्त लगभग हर फेडरल अधिकार क्षेत्र में मुकदमे चल रहे हैं। यही वजह है कि माना जा रहा है कि आखिरकार इस पूरे विवाद का फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को ही करना पड़ेगा।













