देवघर जिले में बरसात के मौसम के दौरान पशुपालकों को एक बहुत बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। इस दौरान मवेशियों के रहने के स्थानों के आसपास बड़े आकार के मच्छर और मक्खियों का भारी प्रकोप देखने को मिलता है। खूंटे से बंधे गाय और भैंस इन कीटों के हमलों से बेहद परेशान हो जाते हैं। पारंपरिक तौर पर लोग जानवरों को इनसे राहत दिलाने के लिए केवल गोबर और कंडे का धुआं करने का ही सहारा लेते हैं, जो हर बार पूरी तरह कारगर साबित नहीं होता। जब ये कीड़े जानवरों को लगातार काटते हैं, तो उन्हें तेज बुखार आ जाता है और उनकी नींद भी पूरी तरह प्रभावित होती है। इस निरंतर बेचैनी और तनाव का सीधा असर मवेशियों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके दूध देने की क्षमता पर भी पड़ता है। दूध उत्पादन में गिरावट आने से पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ता है और उनकी कमाई घटने लगती है।
घरेलू नुस्खे से बनाएं मच्छर भगाने वाला असरदार मिश्रण
इस गंभीर समस्या का समाधान सुझाते हुए देवघर के राय जी गोशाला के मालिक और पशु विशेषज्ञ जयकांत राय ने एक बेहद सरल और किफायती घरेलू उपाय साझा किया है। उनके अनुसार, यदि बारिश के दिनों में गोहाल के भीतर मक्खियों और मच्छरों का आतंक बहुत ज्यादा बढ़ गया है, तो कुछ आसान चीजों की मदद से इस माहौल को बदला जा सकता है। इस विशेष घोल को तैयार करने के लिए नीम की ताजी पत्तियों, कपूर और फिनाइल की जरूरत होती है। सबसे पहले नीम की पत्तियों को अच्छी तरह पीसकर उसका रस निकाला जाता है। इसके बाद कपूर को पूरी तरह पीसकर इस नीम के रस में मिला दिया जाता है। अंत में इस मिश्रण में फिनाइल की एक निश्चित और सीमित मात्रा मिलाकर छिड़काव के लिए तैयार किया जाता है।
गोहाल और मवेशियों के शरीर पर छिड़काव करने का तरीका
विशेषज्ञ के अनुसार तैयार किए गए इस मिश्रण का छिड़काव गोहाल के फर्श, दीवारों और उन सभी कोनों में किया जाना चाहिए जहां इन कीटों का जमावड़ा सबसे ज्यादा होता है। ऐसा करने से गोहाल के आसपास का वातावरण काफी हद तक इन हानिकारक कीटों से सुरक्षित रहता है। हालांकि, मवेशियों के शरीर पर किसी भी तरह के घोल का इस्तेमाल करने से पहले पूरी सावधानी बरतना आवश्यक है। इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि फिनाइल जैसे रसायन पशु की आंख, नाक, मुंह, शरीर के किसी खुले घाव या अन्य संवेदनशील अंगों के संपर्क में बिल्कुल न आएं। किसी भी जोखिम से बचने के लिए जानवर की त्वचा पर इसका उपयोग करने से पहले पशु चिकित्सक की राय लेना हमेशा बेहतर होता है।
साफ-सफाई और जल निकासी का रखें विशेष ध्यान
वर्षा ऋतु में केवल स्प्रे या घोल छिड़कने से ही काम नहीं चलता, बल्कि गोशाला की स्वच्छता पर भी पूरा ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। परिसर में जहां भी बारिश का पानी इकट्ठा हो रहा हो, उसे तुरंत बाहर निकालने की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके अलावा गोहाल के अंदर गोबर, गंदगी और सड़े हुए गीले चारे को ज्यादा समय तक जमा न रहने दें, क्योंकि ऐसी नम जगहें कीटों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होती हैं। मवेशियों का रहने का स्थान जितना सूखा और साफ-सुथरा रहेगा, उन्हें उतना ही अधिक आराम मिलेगा। जब जानवर कीटों के आतंक से मुक्त रहेंगे, तो वे चैन से बैठ सकेंगे और बिना किसी बाधा के अपना चारा और पानी ग्रहण कर सकेंगे।
पशुपालकों के लिए जरूरी सावधानियां और चिकित्सीय सलाह
बरसात का यह समय पशुपालकों के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की मांग करता है। यदि कोई मवेशी लगातार सुस्त या परेशान दिखाई दे, चारा खाना कम कर दे, दूध की मात्रा में अचानक भारी कमी दर्ज की जाए या फिर मक्खियों के काटने से शरीर पर घाव उभरने लगें, तो केवल घरेलू नुस्खों पर ही निर्भर न रहें। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी योग्य पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। साथ ही किसी भी रासायनिक उत्पाद को सीधे जानवर के शरीर पर लगाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। थोड़ी सी सतर्कता, नियमित साफ-सफाई और सही उपायों को अपनाकर पशुपालक बारिश के मौसम में अपने मवेशियों को कीट जनित परेशानियों से महफूज रख सकते हैं और दूध के उत्पादन में होने वाली गिरावट को सफलतापूर्वक रोक सकते हैं।



















