भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले प्रमुख बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में जुलाई महीने के दौरान बड़ा सुधार देखने को मिला है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश के नौ बुनियादी उद्योगों की विकास दर जुलाई में 5.4 फीसदी दर्ज की गई है, जो पिछले साल के इसी महीने की 3.2 फीसदी ग्रोथ के मुकाबले लगभग दोगुनी है। हालांकि, जून के महीने में दर्ज की गई 6 फीसदी की ग्रोथ रेट की तुलना में जुलाई में उत्पादन की गति थोड़ी सुस्त जरूर पड़ी है। इसके बावजूद अप्रैल से जुलाई 2026 की शुरुआती चार महीनों की अवधि में इन बुनियादी क्षेत्रों की संचयी वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत रही है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी समान अवधि में महज 1.5 फीसदी दर्ज की गई थी।
नया आधार वर्ष और 9 उद्योगों का दायरा
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुनियादी उद्योगों के उत्पादन सूचकांक में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सरकार की तरफ से जून के महीने से इस डेटा को वर्ष 2022-23 के नए आधार वर्ष के साथ जारी किया जा रहा है, जबकि इससे पहले आधार वर्ष 2011-12 हुआ करता था। इस नए संशोधन के तहत इंडेक्स में लौह अयस्क को भी शामिल कर लिया गया है। लौह अयस्क के जुड़ने से देश के कोर सेक्टर उद्योगों की कुल संख्या आठ से बढ़कर अब नौ हो गई है। यह नौ बुनियादी उद्योग भारत के कुल औद्योगिक और कारोबारी परिदृश्य में 70 प्रतिशत से अधिक का भारी योगदान देते हैं, जिसके कारण इनकी ग्रोथ दर का सीधा असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
इन क्षेत्रों ने दी मजबूती, उर्वरक और कच्चे तेल में गिरावट
जुलाई महीने के दौरान बुनियादी उद्योगों के मिले-जुले परिणाम सामने आए हैं। कोयला, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद, सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क के उत्पादन में दर्ज की गई तेजी ने ओवरऑल इंडेक्स को संभालने का काम किया। इसके विपरीत कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा इस्पात यानी स्टील उत्पादन की रफ्तार भी काफी धीमी पड़ गई है। जुलाई में इस्पात क्षेत्र की वृद्धि दर सिमटकर 2.9 फीसदी पर आ गई, जबकि पिछले साल जुलाई 2025 में यह 15.7 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने बताया कि उर्वरक, कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र की कोर इंडेक्स में संयुक्त रूप से लगभग 14 फीसदी हिस्सेदारी है और इनमें गिरावट का सिलसिला जारी रहा, हालांकि प्राकृतिक गैस के उत्पादन में महीने दर महीने आधार पर गिरावट की तीव्रता कम हुई है।
आगामी महीनों में सुस्ती की आशंका और IIP पर असर
इंडेक्स में 53.4 प्रतिशत का बड़ा भारांश रखने वाले लौह अयस्क, बिजली और इस्पात क्षेत्र की विकास दर में जून के मुकाबले नरमी दर्ज की गई है। अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत के मुताबिक बेस इफेक्ट के प्रभाव के कारण अगस्त महीने में इन बुनियादी क्षेत्रों की वृद्धि दर 5 फीसदी के स्तर से भी नीचे जा सकती है। वहीं रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का आकलन है कि कोर सेक्टर के उत्पादन रुझानों को देखते हुए जुलाई के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर में भी कमी आएगी। जून में IIP वृद्धि दर 7.3 फीसदी रही थी, जिसके जुलाई में घटकर लगभग 6 से 6.5 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है।



















