भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी उद्योगों ने शानदार वापसी की है। जून 2026 में इन प्रमुख सेक्टरों के उत्पादन में पांच महीने की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह उछाल अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संकेत दे रहा है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी मांग और आंकड़ों को मापने के नए और सटीक तरीकों से रफ्तार मिली है।
इंडेक्स की गणना में बड़े बदलाव
आर्थिक विकास को मापने के तरीके में सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया है। विकास दर की गणना के लिए अब पुराने बेस ईयर 2011-12 की जगह 2022-23 का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही, इंडेक्स के दायरे को भी बढ़ाया गया है। देश के औद्योगिक विकास में इसके विशाल योगदान को देखते हुए, आयरन ओर (लौह अयस्क) को भी अब कोर इंडस्ट्री का दर्जा दे दिया गया है। इस बड़े फैसले के बाद देश में कुल कोर सेक्टर्स की संख्या आठ से बढ़कर नौ हो गई है, जिससे अर्थव्यवस्था की ज्यादा सटीक तस्वीर सामने आ सकेगी।
जनवरी के बाद विकास की सबसे तेज रफ्तार
सोमवार को कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री की तरफ से जारी किए गए नए और विस्तृत आंकड़े इस बदलाव का असर साफ दिखाते हैं। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के डाटा के अनुसार, जून महीने में इन नौ प्रमुख सेक्टर्स ने कुल मिलाकर 5% की दमदार ग्रोथ हासिल की है। यह जनवरी 2026 के बाद औद्योगिक उत्पादन का सबसे अच्छा प्रदर्शन है, जब इन क्षेत्रों की विकास दर 5.2% के स्तर पर थी। जून के इस शानदार आंकड़े ने एक मजबूत रिकवरी का संकेत दिया है, जिसने मई 2026 की मात्र 3.2% की सुस्त रफ्तार को काफी पीछे छोड़ दिया है और पूरे बाजार में एक नया आर्थिक भरोसा जगाया है।
आयरन ओर का शानदार प्रदर्शन
लिस्ट में शामिल होने के साथ ही आयरन ओर सेक्टर ने आंकड़ों पर अपना भारी असर दिखाया है। जून के महीने में इस सेक्टर के उत्पादन में 43.9% की जबरदस्त छलांग देखने को मिली है, जो मई में दर्ज की गई 19% की वृद्धि से कहीं ज्यादा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे बेस इफेक्ट का भी बड़ा हाथ है, क्योंकि पिछले साल ठीक इसी महीने में आयरन ओर के उत्पादन में 16.4% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण क्षेत्र में तेजी
देश भर में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और निर्माण कार्यों का सीधा असर बुनियादी सामग्रियों के उत्पादन पर भी साफ नजर आ रहा है। सीमेंट सेक्टर ने मांग में तेजी के चलते 9.8% की मजबूत छलांग लगाई है, जबकि अहम माने जाने वाले स्टील उद्योग ने भी 4.6% की स्थिर और सकारात्मक ग्रोथ बनाए रखी है। बैंक ऑफ बड़ौदा के जाने-माने मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने इस तेजी की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि निर्माण से जुड़ी सामग्रियों में यह जबरदस्त उछाल सीधे तौर पर सरकार और निजी कंपनियों दोनों की तरफ से किए जा रहे भारी पूंजीगत खर्च का परिणाम है।
ऊर्जा क्षेत्र ने तोड़ी सुस्ती
ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़ों ने भी औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। बिजली उत्पादन ने अपनी तेज रफ्तार कायम रखते हुए जून में 9.8% की वृद्धि दर्ज की। इससे पहले मई में भी इसमें 11.2% का भारी उछाल आया था। कई राज्यों में भीषण गर्मी और उद्योगों में बढ़ती खपत इस लगातार तेजी का मुख्य कारण रही है। इसके साथ ही कोयला सेक्टर ने भी तीन महीने की सुस्ती के चक्र को तोड़ते हुए राहत की खबर दी है और सकारात्मक रुख के साथ 1.4% की ग्रोथ हासिल की है।














