कद्दू की खेती करने वाले किसानों के सामने एक उलझन अक्सर आती है — बेल हरी-भरी दिखती है, फूल भी खूब आते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में वे मुरझाकर झड़ जाते हैं और फल बनना रुक जाता है। नतीजा सीधे जेब पर पड़ता है, क्योंकि जितने फूल टिकेंगे उतना ही फल बनेगा और उतनी ही उपज होगी।
समस्या को रोग समझ लेना सबसे बड़ी भूल
कृषि विज्ञान केंद्र, सुलतानपुर में कार्यरत कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीके त्रिपाठी के अनुसार, फूलों का सूखना दिखने में आम लगता है पर इसका असर गंभीर होता है। जब फूल समय से पहले मुरझाकर गिरते हैं तो फल बनने की प्रक्रिया रुक जाती है और पैदावार लगातार घटने लगती है। उनका कहना है कि अधिकतर किसान इसे कोई बीमारी मान बैठते हैं, जबकि असलियत में इसके पीछे एक नहीं, कई कारण काम कर रहे होते हैं — कभी पोषण की कमी, कभी पानी का असंतुलन, तो कभी कीट और मौसम।
पानी का संतुलन: न कम, न ज्यादा
डॉ. त्रिपाठी इसे सबसे बड़ी वजह मानते हैं। अगर खेत में लंबे समय तक नमी नहीं रहती तो पौधा तनाव में आ जाता है और उसके फूल सूखने लगते हैं। दूसरी तरफ, अगर खेत में पानी भर जाए तो जड़ों तक ऑक्सीजन सही ढंग से नहीं पहुंच पाती और पौधा भीतर से कमजोर पड़ने लगता है। कमजोर पौधा फूलों को संभाल नहीं पाता, इसलिए वे टिकने के बजाय झड़ जाते हैं।
उनकी सलाह है कि किसान कद्दू के खेत में पानी जमा न होने दें। अगर पानी ज्यादा हो जाए तो जल निकासी का पुख्ता इंतजाम होना चाहिए, वरना पौधों में पानी लग जाने का खतरा बना रहता है।
मिट्टी में पोषण की कमी
फूल सूखने की एक अहम वजह पोषक तत्वों की कमी भी है। अगर मिट्टी उपजाऊ नहीं है या उसमें जरूरी तत्व नहीं हैं, तो इसका सीधा असर पौधे और उसके फूलों पर पड़ता है और फूल सूख जाते हैं। इससे बचने के लिए जरूरी है कि खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, बोरॉन और दूसरे सूक्ष्म तत्वों की कमी समय रहते पूरी कर दी जाए।
परागण न होना: फूल हैं पर फल नहीं
कद्दू में फल तभी बनता है जब नर और मादा फूलों के बीच सफल परागण हो। अगर मधुमक्खियां और दूसरे परागण करने वाले कीट पर्याप्त संख्या में खेत तक नहीं पहुंचते, तो मादा फूल फल में नहीं बदल पाते और सूखकर गिर जाते हैं। बारिश, तेज हवा और कीटनाशकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल परागण को घटा देता है। इसीलिए डॉ. त्रिपाठी फूल आने के समय अनावश्यक कीटनाशकों का छिड़काव कम करने की सलाह देते हैं।
रस चूसने वाले कीटों का हमला
फल मक्खी, एफिड, थ्रिप्स और दूसरे रस चूसने वाले कीट कद्दू के पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। ये फूलों और कोमल हिस्सों का रस चूस लेते हैं, जिससे फूल कमजोर होकर सूख जाते हैं। कई बार इन कीटों के कारण फूलों का विकास ही रुक जाता है और फल नहीं बन पाता। इससे बचने के लिए खेत का नियमित निरीक्षण बहुत जरूरी है।
फफूंद, वायरस और बैक्टीरिया जनित रोग
फफूंद, वायरस और बैक्टीरिया से होने वाले रोग भी फूलों के सूखने की वजह बनते हैं। रोग लगने पर पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, बेल कमजोर हो जाती है और फूल झड़ने लगते हैं। डाउनी मिल्ड्यू और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी बीमारियां कद्दू की फसल को खासा प्रभावित करती हैं। ऐसे में रोगग्रस्त पौधों को समय रहते पहचानकर उनका उपचार कर देना चाहिए, ताकि बाकी पौधों तक रोग न फैले।
बचाव कैसे करें
कद्दू के फूलों को सूखने से बचाने के लिए संतुलित सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और लगातार निगरानी जरूरी है। खेत में जल निकासी अच्छी रखें, समय पर पोषक तत्व दें और कीट व रोग नियंत्रण के उपाय अपनाते रहें। फूल आने के दौरान मधुमक्खियों की गतिविधि बढ़ाने की कोशिश करें। बोरॉन और दूसरे सूक्ष्म तत्वों का संतुलित इस्तेमाल भी फसल के लिए फायदेमंद रहता है।













